लालू के सामाजिक न्याय और नीतिश के विकास को मुंह चिढ़ा रहा है इनायतपुर

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दरभंगा (अभिषेक कुमार)। जिले के घनश्यामपुर प्रखण्ड का बुढेब इनायतपुर पंचायत आज भी बिजली सड़क स्वास्थ शिक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओ से कोसो दूर है। इस पंचायत में करीब 6000 मतदाताओं में मुश्किल से 800 के लगभग सवर्ण हैं बाकि दलित पिछड़े वर्ग से आते हैं।

inayatpur2लेकिन, यहां आज तक कोई दलित मुखिया या सरपंच नही बन पाया है। हमेशा सामान्य वर्ग से ही प्रतिनिधि बनते हैं और पंचायत का विकास नही करके अपने मुट्ठी भर गिने चुने लोगों का ही विकास करते हैं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि 13 वार्ड के इस पंचायत में दो जनवितरण प्रणाली केंद्र है जिन्हें अनाज तो पर्याप्त प्राप्त होता है पर पूरे पंचायत में मुश्किल से 70 लोगों को ही कूपन प्राप्त हुआ है जिस कारण लोग खाद्यान प्राप्त नही कर पाते। सड़कें तो बनी नही सिर्फ शिलापट्ट लग गए। बिजली किस चिड़ियाँ का नाम है, ये आजतक अधिकतर लोगो ने यहां देखा ही नही। पांच साल पहले कुछ पोल और तार दौड़ाये गए। पर उनमे बिजली आजतक नही दौड़ी। नाम केलिए खुले दो सरकारी स्कूलो में सिर्फ बच्चों की अच्छी उपस्थिति दर्ज होती है। न सही से संचालन होता है और न ही एमडीएम, पोशाक, छात्रवृति का लाभ मिलता है। ये सारा लाभ विद्यालय प्रबन्धन और अधिकारी खा जाते हैं।

कुछ लोगों ने शिकायत भी करने की हिम्मत दिखाई तो कोई कारवाई नही हुई। उलटे विद्यालय प्रधान ने दबंगो से शिकायत कर्ता दलितों की पिटाई करवा दी।

इस क्षेत्र के लोगो का कहना है कि मुट्ठी भर दबंग पैसे और पहुँच के बल पर दलितों को आगे नही बढ़ना देना चाहते और शासन पर कब्जा जमाए रखकर दलितों को गुलाम बनाये रखना चाहते हैं।

इस गुलामी की जंजीर से निकलने केलिए इन्होंने इस बार पंचायत के मुखिया एवं सरपंच के पद को आरक्षित करने की गुहार विभिन्न स्तरों पर लगाई थी और सुचना मिली की शायद आरक्षित हो जाएगा। पर ऐन वक्त पर रोस्टर में दबंगो द्वारा अधिकारीयों के मेल से बदलाव करवाकर सामान्य करवा देने की खबर मिली।

inayatpur1इस प्रखण्ड के आरक्षण रोस्टर में गड़बड़ी का प्रमाण भी मिला क्योंकि चुनाव हो जाने के बाद पांच पंचायतों में पंचायत समिति का परिणाम गिनती के वक्त रोक दिया गया क्योंकि आरक्षण रोस्टर के हिसाब से चुनाव नही हुए थे। पर इसमें भी बुढेब इनायतपुर पंचायत पर ध्यान नही दिया गया। यहां के लोगों का कहना है कि हमारी बहुलता है और हमारे विकास केलिए प्रतिनिधि हमारे वर्ग से होगा तभी हमारा पंचायत विकास कर पायेगा। लोगों ने मांग की है कि जब पांच समिति का चुनाव फिर से हो सकता है तो इस पंचायत का क्यों नही।

अब देखने वाली बात यह है कि सामाजिक न्याय का ढोल पीटने वाली लालू- नितीश की सरकार का ध्यान दलितों के हो रहे इस हकमारी के तरफ जाता है या नही। ज्ञात हो कि यह प्रखण्ड अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंर्तगत आता है, जहाँ से लगातार राजद के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी विधायक बनते आ रहे हैं और पंचायत के लोग उनके सामने भी गुहार लगा चुके हैं। वाबजूद इसके सरकार का ध्यान इस तरफ नही जाना अपनेआप में एक बड़ा आश्चर्य पैदा करता है।

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