लखन सिंह के बहाने राज्यपाल सलाहकार को चुनौती देने वाला कौन है भाजपा नेता ?

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vijay_bjpराजधानी रांची के तुपुदाना ओपी थाना से कुख्यात शूटर लखन सिंह की आसान फरारी से झारखंड की कानून व्यवस्था के सामने एक बार फिर यह सबाल उठ खड़ा हो गया है कि आखिर राज  कुमार धानुका हत्या कांड के पिछे भाजपा के  किसी बड़े शातिर नेता का हाथ था या नहीं।  अगर है तो पुलिस-सत्ता तंत्र में वे कौन लोग हैं, जो उस नेता को बचाने की जुगत भिड़ाये हैं ? क्योंकि इस बार लखन सिंह की गिरफ्तारी राष्ट्रपति शासन के दौरान महामहिम राज्यपाल के सलाहकार के. विजय कुमार के सीधे निर्देश पर की गई थी। एक लंबे अरसे के बाद धानुका हत्याकांड के मूल खुलासा होने की लोगों  में यह उम्मीद जगी थी।

रांची से प्रकाशित राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के अनुसार राज्यपाल के सलाहकार के.विजय कुमार के कहने पर  शूटर लखन सिंह को पकड़ा गया था। श्री कुमार ने पुलिस अफसरों को यह निर्देश दिया था कि वे अपराधियों की सूची तैयार करें, जिसमें यह साफ हो कि कौन अपराधी ए, कौन अपराधी बी और कौन अपराधी सी श्रेणी का है। 

अफसरों के लिखे पत्र में लखन सिंह का भी जिक्र किया गया है। उसे रांची का कुख्यात शातिर अपराधी बताया गया है। सलाहकार ने यह भी निर्देश दिया था कि जो भी बड़े अपराधी बाहर हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाये।

कई गंभीर अपराधों के आरोपी कुख्यात शूटर लखन सिंह का नाम राजकुमार धानुका हत्याकांड में काफी चर्चित हुआ। धानुका की हत्या वर्ष 2009 में लखन सिंह एवं उसके साथियों ने कचहरी रोड के पंचवटी प्लाजा में कर दी थी। उस समय वह जेल में बंद कुख्यात भोला पांडे गिरोह से जुड़ा था। भोला पांडे के ईशारे पर ही सुपारी लेकर धानुका की हत्या की गई थी। तब धानुका की हत्या में भाजपा के एक बड़े नेता का नाम भी सामने आया था। उसे बचाने के लिये रांची के अफसर जुट गये थे।

लखन के बयान में उक्त भाजपा नेता का नाम आ चुका है।  चर्चा तो यहां तक है कि धानुका हत्याकांड में पुलिस के कुछ अफसर भी अप्रत्यक्ष रुप से शामिल थे। लिहाजा पुलिस कस्टडी में लखन सिंह से कड़ाई से पूछताछ नहीं की गई। 

इस बार महामहिम राज्यपाल के सलाहकार के निर्देश पर लखन सिंह की गिरफ्तारी के बाद संभावना थी कि धानुका हत्याकांड की पूरी कलई खुल जायेगी। लिहाजा गिरफ्तार लखन सिंह को थाना से ही कुछ पुलिस अफसरों के ईशारे पर भगा दिया गया। शनिवार को लखन सिंह का एक साथी एक संदेश लेकर थाना पहुंचा था। जैसे ही वह थाना से बाहर निकला, वैसे ही थोड़ी देर बाद लखन सिंह भाग खड़ा हुआ।

चर्चा है कि भागने-भगाने का यह सौदा दस लाख में तय हुआ था। इस मामले की जांच विशेष शाखा कर रही है। 

अगर दैनिक हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता के हवाले से प्रकाशित का अवलोकन किया जाये तो यह साफ स्पष्ट होता है कि लखन सिंह  फरारी प्रकरण में तथाकथित भाजपा के उक्त रसुखदार नेता की संलिप्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि मीडिया भाजपा के उस शातिर नेता के नाम का खुलासा नहीं कर पा रही है। 

तब राज कुमार धानुका हत्याकांड में कोलकाता से पकड़े लखन सिंह ने सीआईडी के एक एसपी के सामने लिखित बयान दिया था कि इसके पीछे रांची के एक बिल्डर व्यवसायी भाजपा नेता और कोलकाता के एक कोयला व्यवसायी का मूल हाथ था। उन्हीं द्वय शातिरों से सुपारी लेकर लखन सिंह ने राज कुमार धानुका को सरेआम शूट किया था। 

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