लखन सिंह की फरारी के दलदल में फंसी रांची पुलिस महकमा

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crimeअपराध जगत में तेजी से उभरे कुख्यात शूटर लखन सिंह को गुरुवार को ही  रांची सिविल कोर्ट के बाहर से पकड़ा गया था। तुपुदाना ओपी  के प्रभारी कृष्ण मुरारी अपनी पुलिस टीम के साथ थाना में लाकर बंद कर दिया था। फिर दो दिन के बाद लखन सिंह तुपुदाना ओपी से भाग खड़ा हुआ। 

यह घटनाक्रम रांची पुलिस-तंत्र पर कई सबाल खड़े करते हैं। तुपुदाना पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त दावा किया था कि लखन सिंह के दसमाइल स्थित घर से देसी कट्टा, ऑटोमेटिक पिस्टल, और गोलियां बरामद की गई है। 

सबाल उठता है कि जब गुरुवार की दोपहर ही पुलिस ने लखन सिंह को हिरासत में लिया था तो चौबीस घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाबजूद उसे थाने में ही क्यो रखा गया ? शुक्रवार की शाम तुपुदाना ओपी प्रभारी ने मीडिया को बताया था कि उसे कोर्ट में पेश किया जायेगा लेकिन किसके आदेश-कृपा से पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया ? 

पुष्ट खबर है कि कुख्यात शुटर लखन सिंह के भागने के पहले उसका भाई गेंदा सिंह और प्रवीण एक्का उससे मिलने तुपुदाना ओपी आये थे। पुलिस कहती है कि गेंदा और प्रवीण ने ही लखण को भगाने की शाजिश रची। उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से लखन ने शौचालय जाने की बात कही औऱ फिर वहां से भाग खड़ा हुआ।

प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो, तुपुदाना ओपी थाना के बाहर बाइक पर गेंदा सिंह ही लखन का इंतजार कर रहा था। वहीं दूसरी बाइक पर एक अन्य युवक प्रवीण एक्का था। रांची, धुर्वा के इंस्पेक्टर बीएन सिंह स्वीकारते हैं कि बालसिरिंग की ओर जाने वाली सड़क के समीप भी लोगों ने लखन सिंह को भागते देखा है।

 लखन सिंह की गिरफ्तारी कोई गोपनीय नहीं रह गई । उसकी गिरफ्तारी की सूचना कुछ देर बाद ही न्यूज चैनलों पर  ब्रेकिंग हो चुकी थी। अगले दिन प्रायः सभी समाचार पत्रों में बड़े-बड़े सुर्खियों में प्रकाशित था। फिर उसके आसानी से भाग जाने के पीछे निचले स्तर पर पुलिस लापरवाही की बात करना समझ से परे है। 

इससे बड़ी गंभीर स्थिति और क्या हो सकती है कि बकौल पुलिस, थाना में दो युवक एक कुख्यात अपराधी को भगाने की शाजिस रचते हैं और भगाने में कामयाब भी हो जाते हैं। 

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