राम जाने औरत रहे या जाए….

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gujarat-modi-wife-Jsodabenओबामा का आना काफी सुखद रहा। मिशेल की उपस्थिति से कई पतियों को अपनी बीवी सुन्दर लगने लगी। विरोधियों ने भी अपने विचार डरते हुए रखे।

भई ओबामा है, जिसने ओसामा को पाकिस्तान में घुसकर बिना पाकिस्तान से पूछे मार गिराया। अमरीकी राष्ट्रपति की ताक़त का अंदाजा सबको है।

सो अखबारों ने खूब तस्वीरें छापी, हर पन्ने पर ओबामा या मिशेल ही दिखाई दिए। एकाध जगह अपने मोदी भी चाय या बगिया या रेडियो पर बराक बराक करते दिखे।

 मित्रता की डींगे हिंदी में हाँकी, भई बराक समझ ना जाए कि मोदी क्या दोस्ती की मिसाल दे रहे हैं। फिलहाल जनता तो सब जानती है।

अपने मोदी को भी और अमरीका के बराक को भी। फिलहाल हॉलीवुड पिक्चर का समा भारत में बना रहा। ओबामा और मिशेल की झलक के लिए रसोईघर से महिलाएँ टीवी पर झांकती रहीं और खुश होती रहीं कि यार हम भी किसी से कम नहीं।

mishel_obamaभारत में महिलाओं का आत्मविश्वास बढा तो पुरुषों की अपेक्षाओं को विराम लगा। बच्चों को भी कुछ नया लगा टीवी में।

बेटी पूछ रही थी मम्मी ये फ्राक वाली आँटी ने बाल से अपना कान क्यूँ ढक रखा है। मैं बोली कि बेटा वो इसलिए कि वो जानती हैं कि यहाँ महिला कितनी लाचार है सो उनकी चीखें सुनकर उनका भारत आना बेकार हो जाता।

मिशेल ने ओबामा को जीवन साथी चुना तो वो राष्ट्रपति बने। भारत में कहते हैं कि मोदी ने पत्नी का त्याग किया तो वो प्रधान मंत्री बने।

अब सच तो राम जाने औरत रहे या जाए पर आदमी तो पद और प्रतिष्ठा में औरत से ऊपर ही है। निष्कर्ष निकालने की जरूरत नहीं है।

अमेरिका भारत नहीं बन सकता और भारत अमेरिका नहीं। कही ना सौ टके की बात।

…………पूजा रानी सिंह

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