राजगीर थाना में राजनामा.कॉम के संपादक के विरुद्ध FIR से हुआ यह एक नया खुलासा

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बिना किसी संबंध-संपर्क के घर्मराज को बना दिया गया मुकेश भारतीय का गुर्गा

राजनामा.कॉम (न्यूज़ ब्यूरो)। नालंदा की पावन धरती के मनोरम राजगीर मलमास मेला की सैरात भूमि पर अतिक्रमण कर पक्के मकान और व्यवसायिक होटल बनाने वाले भूमाफियाओं की खबर से हड़कंप मचा है। उसी में एक अवैध ढंग से निर्मित राजगीर गेस्ट हाउस के मालिक और गौरक्षणी भूमि पर अतिक्रमण कर रखे शिवनंदन प्रसाद ने राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय के आलावे अन्य 4 लोगों के खिलाफ राजगीर थाना में एफआईआर दर्ज करवाई है।

वेशक उस एफआईआर में जो कुछ लिखा है, वह कोरा बकबास से अधिक कुछ नहीं है। उसमें राजगीर के बरिष्ठ पत्रकार राम बिलास जी को छोड़ राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय किसी को नहीं जानते और न ही उन लोगों के साथ किसी प्रकार का संपर्क स्थापित हुआ है। फिर उन लोगों के नाम एफआईआर में संग जोड़ा गया है।

आखिर शिवनंदन द्वारा इस तरह की हरकत के पिछे मंशा क्या है। जब इसकी तहकीकात की गई तो एक सनसनीखेज तत्थ यह उभर कर सामने आया है कि एफआईआर में नामित धर्मराज प्रसाद का अपना एक अलग ही कहानी है।

कहते हैं कि विगत 8 जून 2015 को तत्कालीन कमीशनर, डीआईजी, एसपी, डीएम  के साथ बैठक एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। उस बैठक में मलमास मेला सैरात भूमि को सीमांकन कर अतिक्रमण मुक्त करने की नीति बना कर कई तरह के मार्ग दर्शन दिए।

उस समय तात्कालीन कमीशनर ने एक संगठन भी बनाये, जिसका नाम रखा गया खुदरा व्यवसायीक संघ राजगीर। इस संगठन के अध्यक्ष निरंजन एवं सचिव धर्मराज प्रसाद बने।

वर्तमान कमीशनर ने सचिव धर्मराज प्रसाद के आवेदन के आलोक में राजगीर मलमास मेला सैरात भूमि की सीमांकन कराया गया। उससे यह बात बिल्कुल साफ हो गई कि शिवनंदन प्रसाद की होटल पूर्णतः राजगीर मलमास मेला की सैरात भूमि को अतिक्रमित कर बनाई गई है।

जाहिर है कि उसी बौखलाहट में शिवनंदन प्रसाद ने राजनामा.कॉम के संचालक-संपादक के साथ धर्मराज प्रसाद का नाम भी जोड़ दिया। ठीक इसी प्रकार की सच्चाई  दूसरे अन्य नामजद आरोपियों की है।

पूरे मामले को देख कर यही लगता है कि शिवनंदन जैसों के खिलाफ जो भी लोग आवाज उठाते हैं, उन्हें केस-मुकदमें में घसीट कर परेशान करने मुहिम शुरु हो जाती है।

राजगीर थाना में दर्ज एफआईआर में साईट की कोई खबर की चर्चा नहीं की गई है। सिर्फ व्हाट्सएप्प ग्रुप पर छवि धूमिल करने की मंशा से कंटेट वायरल करने के आरोप हैं। लेकिन एफआईआर में लिखी यह बात समझ से परे है कि आखिर किसी अतिक्रमणकारी भू-माफिया, चाहे वह कोई हो। उसके खिलाफ प्रसारित खबर से साप्रादांयिक उन्माद कैसे उत्पन्न हो सकता है।

शिवनंदन ने समाचार प्रसारण के बाद राजनामा के संपादक मुकेश भारतीय को फोन पर अनेक तरह की धमकियां दी। थाना में बैठ कर झूठे मामले दर्ज करने की स्पष्ट बात की। जिसकी ऑडियो क्लिप वेबसाइट में डाली जा चुकी है। विभिन्न माध्यमों द्वारा राजगीर एवं नालंदा के आला अधिकारी समेत अनेक शुभचिंतकों को प्रेषित की जा चुकी है।

उक्त ऑडियो क्लिप से साफ जाहिर है कि शिवनंदन  ने राजगीर थाना  पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर या फिर किसी दबाव-मिलीभगत से सब कुछ को अंजाम दिया है। कितनी अजीब बात है कि शिवनंदन सरीखे लोग एक साइट के संचालक-संपादक को थाना में बैठ कर थाना प्रभारी के सामने ही धमकी देता है और  थाना में उल्टा ही केस दर्ज हो जाता है। अगर शिवनंदन द्वारा थाना से इतर बैठ कर धमकियां दी गई तो उसके खिलाफ थाना और थाना प्रभारी की छवि प्रभावित करने- बदनाम करने की त्वरित कार्रवाई जरुर होनी चाहिये।

सबाल उठता है कि क्या राजगीर थाना पुलिस किसी भी शिकायत की बिना कोई पड़ताल किये गंभीर धारा के तहत यूं ही मामला दर्ज कर लेती है। जैसा कि इस मामले में किया गया है।

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