रांची-हजारीबाग एन.एच.33 फोरलेन निर्माण के दौरान जम कर हुईं लूट-खसोंट

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मुआवजा देने के बजाय बना दी जानलेवा सड़क

– मुकेश भारतीय 
रांची
नेशनल हाईवे ऑथिरीटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा रांची-हजारीबाग एन.एच 33 फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान विभागीय तौर पर जम कर लूट-खसोंट मचाई गई। इसी का नतीजा है कि कहीं भी निर्धारित मापदंड के अनुसार सड़क नहीं बन सकी।

ओरमांझी ब्लॉक चौक से ठीक 200 फीट पहले की तस्वीर एनएचएआई और भू-अर्जन विभाग की नंगई साफ स्पष्ट करती है। जरा गौर से देखिए इस तस्वीर को। यह राजाराम महतो का घर है। खानदानी रैयती जमीन बने इस घर में वह अपने बीबी-बच्चों के साथ रहता है।

वर्ष 2008 में ही राजाराम महतो की जमीन और घर का अधिग्रहण हुआ लेकिन, आज तक उसका भुगतान नहीं हो सका है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनोज कुमार पाण्डेय इसे आपसी रैयती विवाद का नतीजा बताते हैं।

अगर उनकी बात को सच मान लिया भी जाए तो जमीन के भुगतान पर विवाद हो सकता है लेकिन मकान के भुगतान पर कोई विवाद होने का सबाल ही नहीं उठता। सरकारी प्रावधान के अनुसार दोनों अगल-अलग चाजें हैं। जमीन के मुआवजे का भुगतान जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा तथा मकान के मुआवजे का भुगतान एनएचएआई द्वारा किया गया था।

जब उसी खाता-प्लॉट की जमीन पर बने उसके पाटीदार को मुआवजा मिल गई तो आज तक पीड़ित को मुआवजा क्यों मिल सका है।

सबसे बड़ी बात कि कभी एनएचएआई ने तो कभी निर्माण कार्य करने वाली कंपनी ने इस मकान को जबरन गिराने की कोशिश की। अंचलाधिकारी ने सरकारी कामकाज में बाधा डालने का मुकदमा तक कर डाला लेकिन, मुआवजा की राशि नहीं दी। आखिर कहां गई राजाराम महतो के जमीन-मकान की राशि का मुआवजा  ?

मुआवजा न मिलने के कारण अधिग्रहित जमीन खाली नहीं हो सका और निर्माण कार्य करने वाली कंपनी ने उस स्थान पर जनलेवा सड़क बना कर चलते बनी। यहां दोनों ओर सड़क काफी संकरी है। कालीकरण से इतर आम आदमी का गुजरना काफी मुश्किल है। इस मकान के कारण दोनों तरफ तेज गति से आते-जाते वाहन दिखाई नहीं देते हैं। यहां सर्विस रोड तो दूर की बात, नाली कलवेट तक नहीं बन सका है और मामूली बरसात में ही सड़क झील बन जाती है और जानलेवा दुर्घटनाओं को जन्म देती है।  

जमीन-मकान मलिक राजाराम महतो का कहना है कि उनके मामले में एनएचएआई और भू-अर्जन कार्यालय की संदिग्ध भूमिका को लेकर उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्हें जिस दिन न्यायसंगत मुआवजा मिल जाएगी, उसी दिन वे जमीन-मकान खाली कर देगें।

बहरहाल, यह तस्वीर कोई एक राजाराम महतो की नहीं है। नेवरी विकास से लेकर हजारीबाग तक ऐसे अनेक लोग हैं, एक तरफ जिनका हक मारा गया है वहीं, दूसरी तरफ मनमाने तरीके से दोबारा-तीबारा मुआवजे की राशि दी गई है। यहां खाली जमीन पर भी मकान दर्शा कर करोड़ों का वारा न्यारा किया गया है।

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