रांची प्रेस क्लब में शादी का आयोजन कमिटी का फैसला  : सचिव

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राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। रांची प्रेस क्लब भवन में हुई झारखंड एवं सूचना जन संपर्क विभाग के निदेशक के पीए के बेटे की शादी चर्चा का विषय बन गया है।

कई लोग इस पर सबाल उठा रहे हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि प्रेस क्लब भवन में ऐसे आयोजनों से बचना चाहिये।  प्रेस क्लब शादी समारोह या अन्य अनुष्ठानों के लिए नहीं बना हैं। ये संगोष्ठी, सेमिनार, प्रेस वार्ता तथा प्रेस से ही संबंधित व्यक्तियों के मामलों से जुड़ा होना चाहिए। जिन्होंने भी इसकी शुरुआत की हैं, यह गलत किया है।

प्रेस क्लब, रांची के सचिव शंभुनाथ चौधरी ………

प्रेस क्लब के सचिव शंभुनाथ चौधरी ने उक्त चर्चाओं के बीच राजनामा.कॉम को बताया कि प्रेस क्लब के एक हिस्से को किराये पर दी गई थी। ये समूचे कार्यकारिणी का फैसला था। प्रेस क्लब को चलाने के लिये पांच लाख रुपये प्रति माह खर्च है। बिजली बिल सवा लाख महीना है। साफ-सफाई का खर्चा 50 हजार रुपये महीना है। आखिर ये चलेगा कैसे? कहां से आयेगा पैसा?

श्री चौधरी ने आगे कहा कि जो लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं, या उसे गलत गतिविधि बता रहे हैं तो उनसे अपेक्षा है कि वे पांच लाख खर्च के ब्यू प्रिंट बताये। आखिर प्रेस क्लब के पास साधन-संसाधन का जुगाड़ कहां आये, उन्हें इसके तरीके भी तो बतानी चाहिये।

प्रेस क्लब भवन के किराये की बाबत उन्होंने बताया कि जितना एरिया लोग इस्तेमाल करेगें, उसी अनुपात में उसकी दर निर्धारित होगी। जिस शादी की चर्चा हो रही है, उसमें..चूकि जगह खाली थी, इसलिये अधिक स्थान का उपयोग कर लिया गया है।  लेकिन कार्यकारिणी के फैसले के अनुरुप करीब 1.10 लाख रुपये किराया के कमीटमेंट है।

प्रेस क्लब के सचिव ने कहा कि यदि मीडिया से जुड़े लोगों के घरेलु आयोजन होते हैं तो उसमें काफी रियायत बरती जायेगी। लेकिन गैर मीडिया वालों के लिये क्लब का पूरी तरह से व्यवसायिक दृष्टिकोण स्पष्ट है।

उन्होंने पुनः दोहराते हुये कहा कि जब क्लब के पास शादी समारोह की बात आया तो इसे बाजाप्ता कमिटी की बैठक में रखा गया। कमिटी ने इस पर व्यापक चर्चा की और सभी 15 सदस्यों ने सर्वसम्मति से फैसला लेते शादी के लिये उपलब्ध कराया गया।

उन्होनें उदाहरण देते हुये कहा कि रांची के पत्रकार अखिलेश की शादी 28 अप्रैल को है, वे चाहते हैं कि वे प्रेस क्लब में अपनी शादी करें…तो करेगें, इसमें आपत्ति वाली बात कहां है। आईएमए भवन में भी शादी होती है। रांची प्रेस क्लब में भी होती है। अगर किसी संस्था को ऐसे कार्यों से आय होती है और लोगों को सहुलियत होती है तो इसमें बुराई क्या है।

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