रघुवर सरकार में मंत्री बने शमरेश सिंह के बौराये ‘बाउरी ‘ !

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bauriझारखंड की राजनीति में शर्म हया और खुदारी कोई नहीं मायने नहीं रखती। चन्दनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी भाजपा के रघुवर सरकार में मंत्री बनाने के बाद इसकी व्यापक पुष्टि होती है।

बाउरी झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते लेकिन, अचानक भाजपा की ओर रुख करते हुए सत्ता की गोद में जा बैठे। जाहिर है कि आम जनता के लिए इसे पचा पाना आसान नहीं है।

बाउरी चन्दनकियारी सीट से झाविमो के उम्मीदवार के रुप में  आजसु पार्टी के प्रत्याशी उमा कान्त रजक को 34,164 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए हैं। इस सीट पर भाजपा ने गठबंधन के तहत अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया और पूरे तन-मन-धन से रजक के साथ खड़ी रही।

इस विपरित माहौल में अगर बाउरी चुनाव जीत पाए तो निश्चित तौर पर उसका एक बड़ा कारण झाविमो के संघर्ष और उसके नेता बाबूलाल मरांडी की छवि रही।

यदि हम अमर कुमार बाउरी के राजनीतिक उत्थान की बात करें तो अत्यंत रोटक तस्वीर उभर कर सामने आता है।

bauri1दरअसल, बाउरी का राजनीति उत्थान बोकारो के दबंग विधायक रहे शमरेश सिंह के धन-बल की छांव में हुआ है। बाउरी को शमरेश का भक्त लठैत भी कहा जाता है। शमरेश सिंह पहले भाजपा में थे। उन्होंने फिर निर्दलीय राजनीति की। उसके बाद वे झाविमो में शामिल होकर विधायक बने। लेकिन बीते चुनाव में वे भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा ने बीते विधानसभा चुनाव में शमरेश बोकारो से पार्टी प्रत्याशी नहीं बनाया तो वे फिर से झाविमो के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन इस बार उनका वैरंग लौट गया और निर्दलीय चुनाव लड़ कर हार गए।

शमरेश की तरह बाउरी भी झाविमो छोड़ भाजपा में गए। जब भाजपा ने चन्दनकियारी से टिकट नहीं दिया तो वे वापस झाविमो मे वापस लौट आए और पार्टी टिकट पर चुनाव लड़े और भारी अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे।

jvm_mla_froudऐसे में सबाल उठना लाजमि है कि अमर कुमार बाउरी जैसे जनप्रतिधि का चुनाव के तुरंत बाद सत्ता की लालच में विरोधी दल के नाव पर सवार होकर किस गंदी मानसिकता का परिचय दे रहे हैं ?

राजनीति में मूल्यों और आदर्शों के ढिंढोरे पीटने वाली भाजपा जिसे चुनाव में आजसू के साथ पूर्ण बहुमत मिली है, वह दूसरे दलों के गिरे विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर क्या यह संदेश देना चाहती है कि उनका कमल के खिलने के लिए कीचड़ का होना जरुरी है ? अगर भाजपा ऐसा समझती है तो शायद यह भूल रही है कि नाली के कीचड़ में कमल नहीं खिलते।

………. मुकेश भारतीय

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