रघु’राज में मीडिया पर अंकुश, केवल फोटोग्राफ कवर करने के निर्देश

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भारतीय लोकतंत्र के चार स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्‍यायपालिका और मीडिया माना गया है। जिसमें मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताया गया है। जाहिर है चारों स्तंभों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां भी हैं। लेकिन जब राज्य सरकार आदेश जारी कर चौथे स्तंभ पर अंकुश लगाने की बात सामने आये तो मामला गंभीर हो जाता है।

झारखंड सरकार फरमान पर, जिसे सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव, रांची, झारखंड, द्वारा जारी किया जाता है, सवाल उठना तो लाज़मी है।

फरमान में सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन को वीडियो कॉन्फेंसिंग के जरिये अधिकारियों द्वारा मीडिया को किसी भी मामले पर बयान देने से रोके जाने का निर्देश दिया जाता है।

पत्रांक- 34 को पढ़ने पर साफ पता चलता है कि रघुवर सरकार फरमान जारी कर किस तरीके से जिला प्रशासन के माध्यम से मीडिया पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है।

पत्रांक- 34 में सरायकेला-सरसावां जिला प्रशासन को एक आदेश जारी किया गया है। इस जारी पत्रांक में जिला, अनुमंडल, प्रखंड व अंचल स्तरीय कार्यालय जिला परिषद, नगर निकाय अंतर्गत की जा रही बैठकों की प्रेस-विज्ञप्ति सूचना भवन, सरायकेला-खरसावां से जारी करने का निर्देश दिया गया है।

पत्र में सभी कार्यालय प्रधान को आदेश दिया गया है कि कार्यालय प्रधान अपने स्तर से संपन्न बैठकों की प्रेस-विज्ञप्ति सीधा मीडिया को उपलब्ध नहीं कराएंगे।

साथ ही ये भी लिखा है बगैर प्रमाणीकरण के प्रेस- विज्ञप्ति जारी करने से सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। सीधी प्रेस-विज्ञप्ति जारी करने पर संबंधित कार्यालय प्रधान के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।

सभी कार्यालय प्रधानों को पत्रांक- 34 के अनुसार बैठक समाप्ति के 1 घंटे के अंदर प्रेस-विज्ञप्ति dprosaraikelaprd@.gov.in तथा rahulskipa3291@gmail.com पर बैठक की सारी जानकारी सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

पत्र के अनुसार विभागीय बैठकों में मीडियाकर्मी केवल फोटोग्राफ ही कवर कर पायेंगे। विशेष परिस्थिति में या अधोहस्ताक्षरी के निदेशानुसार मीडियाकर्मी बैठक में भाग ले सकेंगे।

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