रघु’राज में भी बेलगाम हैं प्रदेश के निजी स्कूल

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PRIZEमुकेश भारतीय

रांची। इस बार फिर प्रदेश में  शहर से लेकर गांव तक प्रायः निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं।  बीते साल री-एडमिशन के नाम पर पैसा वसूला गया। हो हंगामा हुआ।  अखबारों में मामला उठा  तो इस वर्ष री-एडमिशन का नाम बदल गया।

अब वार्षिक चार्ज, पीपुल फंड, विल्डिंग फंड, बस भाड़ा, व्यंजन शुल्क, चिकित्सा शुल्क के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है। स्कूल में ठेला लगाकर पिकनिक के नाम पर भी अवैध वसूली हो रही है।

यहां तक कि कई स्कूल अपने ही कैंपस में दुकान खोल लिये हैं। पुस्तक, कॉपी, बैग, जूता, मोजा से लेकर बेल्ट तक बेच रहे हैं।

कई बड़े स्कूल शहर के कुछ दुकानदारों से कमीशन तय कर लिये हैं। स्कूल में नामांकन और स्कूल द्वारा निर्धारित दुकान से ही कॉपी, पुस्तक, ड्रेस, बैग व अन्य सामान खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य किया जा रहा है।

निजी स्कूली ने कमाई का फंडा अपनाया है। हर साल कॉपी किताब बदलता है। जिसका सीधा लाभ किताब दुकानदार को मिलता है।

कमीशनखोरी के इस खेल में अभिवावकों को 50 रूपये की किताब को लगभग 200 रूपये तक खरीदना पड़ता है।

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