रघु’राज में भी कम नहीं हो पा रहा है भ्रष्टाचार :रामटहल चौधरी

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विभिन्न मुद्दों पर खुल कर बोले वरिष्ठ भाजपा सांसद 

मुकेश भारतीय

रांची। राज्य की रघुबर सरकार अनेक क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहीं हैं। सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, विधि-व्यवस्था में सुधार का कार्य प्रशंसनीय है लेकिन, सरकार द्वारा कई अन्य गंभीर मुद्दों पर भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

ramtahal chaudhary1उक्त बातें रांची के सांसद रामटहल चौधरी ने अपने आवास पर एक खास बातचीत में कही।

श्री चौधरी ने कहा कि ओबीसी, एसटी, एससी और अन्य वर्गों के छात्रों का स्टाइपेंड कई वर्षों से पेंडिंग है। अगर छात्रों का छात्रवृति तक समय पर नहीं मिलेगा तो यह एक बड़ी बेईमानी है। उनका बैकलॉग कई सालों से यूं ही पड़ा है। पारा शिक्षक का मामला देखिए। सरकार ने कुछ राशि बढ़ाई है लेकिन, उनकी सीधा मांग है कि बिहार, छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों में जो मिल रहा है, उसे झारखंड में मिलनी चाहिए। चूकि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को पारा शिक्षक लोग ही संभाले हुये हैं तो फिर उनके साथ बेईमानी क्यों।

उन्होंने रांची क्षेत्र में पीडीएस सिस्टम के तहत हुई व्यापक गड़बड़ी के सबाल पर कहा कि यहां बहुत से लोगों का राशन कार्ड नहीं बना है। मुख्यमंत्री तो घोषणा कर रहे हैं कि सरकार किसी को राशन कार्ड विहीन नहीं रखेगी लेकिन, इनकी जो एजेंसी है। विभाग है, उसमें कुछ न कुछ खटपट होते रहता है। उसमें आपसी तालमेल का आभाव है। इसकी वजह से मुख्यमंत्री तो घोषणा करते हैं परन्तु उसका इम्पलीमेंट नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वृद्धा पेंशन मामले को देखिए। प्रधानमंत्री का स्पष्ट आदेश है कि 18 वर्ष से उपर की जो भी विधवाएं हैं या बिकलांग आदि हैं, उन सारे लोगों पर खास ध्यान दें। लेकिन यहां कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राज्य सरकार को इसे गंभीरता से लेनी चाहिए।

बीपीएल की गड़बड़ी की बाबत उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनके नाम सूची से गायब है और ढेर सारे लोग इसका नाजायज लाभ ले रहे हैं। इसमें भी तत्काल सुधार की आवश्यकता है।  बीपीएल का नये सिरे से सर्वे किया जाना चाहिए।

राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि 30 दिनों के भीतर राज्य की स्थानीय नीति तय कर दी जाएगी लेकिन, अब तक ऐसा क्यों नही हो पाया? आखिर पेंच कहां फंसा है?  इस सबाल के जबाब में सांसद ने कहा कि यह सब बहुत ही सेंसेटिव विषय है। सबसे विचार विमर्श करके और अन्य राज्यों में स्थानीय नीति तय है, उसका अध्ययन करके कदम उठाए जाने चाहिए। चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी की नौकरियों में अन्य राज्यों में भी प्रांतीय लोगों को ही नौकरियां दी जा रही है। स्थानीति लागू नहीं होने से झारखंड के बेरोजगारों का बड़ा नुकसान हो रहा है।

उन्होंने सीएनटी एक्ट की बाबत कहा कि उसमें कोई छेड़छाड़ की गुंजाईश नहीं है और न कर पाएगा। हां, उसमें कुछ जरुरी सुधार किया जा सकता है।

कुर्मी जाति को एसटी में शामिल कर आरक्षण देने की बाबत श्री चौधरी ने स्पष्ट कहा कि यहां कुर्मी समाज सन् 1932 में एसटी वर्ग में था। और ईमानदारी से कहिए तो आर्थिक, सामजिक, शैक्षणिक या हर दृष्टि से आदिवासी संस्कृति के साथ खड़ा है। रहन-सहन, खान-पान, जीवनशैली सब मैच करता है। यह सब विरोध करने वालों के लिए शोध का विषय है।

उन्होंने कुर्मी जाति को आदिवासी वर्ग में शामिल करने में सरकारी दिक्कत को लेकर कहा कि इस तरह के मामलों को लटकाने से और परेशानी बढ़ती है। जो पहले की सच्चाई है, उसकी जांच कर सरकार को निर्णय लेनी चाहिए। हो सकता है कि इसे लेकर जो विरोध होता है, टकराव की जो स्थिति बनती है, उससे भी फैसले लेने में सरकारी बाधाएं उत्पन्न होती हो। तात्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस संबंध में कैबिनेट से पास कर भेजे थे, लेकिन उसके साथ टेकनीकल चीजें नहीं थी, इसलिए वह लटकल रह गया।

रघुवर सरकार की खामियों के सबाल पर सांसद ने कहा कि अभी तो सरकार का साल-ढेड़ साल ही हुआ है। अभी खामियों नहीं ढूंढने का समय नहीं है। सरकार को बेहतर कार्य करनी चाहिए। लेनिन यहां अहम मुद्दा करप्शन का है, जो कहीं से घटा नहीं है। बढ़ता ही जा रहा है। एक अच्छी सरकार के लिए भ्रष्टाचार पर लगाम जरुरी है। इसके बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

व्यवस्था और अफसरशाही के सबाल पर उन्होंने कहा कि यहां कुछ लोग हैं , जिसके कारण भी राज्य का बेड़ा गर्क हो रहा है। सरकार को कड़ी नजर से इन्हें चिन्हित कर राज्य से बाहर फेंक देनी चाहिए।

सरकार द्वारा पूंजीपतियों को लूट की खूली छूट देने की बाबत श्री चौधरी ने कहा कि सड़क बन रही हो या कोई अन्य काम हो रहा हो। स्पष्ट मानना है कि इसका टुकड़ों में काम होना चाहिए। ताकि कम पूंजी वाले स्थानीय लोग भी राज्य के विकास में अहम भूमिका निभा सके। अब 4 हजार या बीस हजार करोड़ का टेंडर निकालिएगा तो नेचुरल है कि बाहर वाले को ही इसका फायदा होगा औऱ लूट कर भी भागेगें। स्थानीय लोग कहां भागेगें। सरकार को इस पर विशेष ध्यान देनी चाहिए।

उन्होने कहा कि थोक भाव में टेंडर कर बड़े-बड़े हॉस्पीटल बना दिए गये लेकिन वहां डाक्टर नहीं हैं, नर्स आदि नहीं हैं। यह सब पैसे की बर्बादी ही तो है।

पूंजीपतियों द्वारा जल,जंगल और जमीन पर किये जा रहे कब्जे को लेकर उन्होंने कहा कि ये सब करकार नहीं कर रही है बल्कि जितने भू-माफिया हैं, वे लोग ऐसा कर रहे हैं। किसी को बसाना अच्छी बात है लेकिन, दुखःद बात है कि किसानों को उचित पैसा भी नही दिया जा रहा है। और इसमें बिचौलिया कोई बाहर का नहीं होता है। गांव घर का ही दलाल होता है। पहले बहुत लोग विस्थापित हो चुके हैं। अब मेरा साफ कहना है कि पहले रोजी रोजगार दो, फिर उसकी जमीन लेने को सोचों अन्यथा झारखंड में कहीं टिक नहीं पाओगे। ऐसा थोड़े होता है कि विस्थापित परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे दिया और हो गया। अगर परिवार में चार भाई हैं तो चारों को रोजगार दो। तब न बैलेंस होगा। पूरा परिवार चलेगा।

एक बेहतर झारखंड के निमार्ण को लेकर कहा कि इसके लिए सरकार को ठीक से पहल करना होगा। यह बिना जन सहयोग के संभव नहीं है। सभी विभागों को चाहिए कि वे समय पर काम करे। मार्च लूट न करे। मार्च के पहले ही सब काम निपटा ले। केन्द्र सरकार की ओर से धन की कमी नहीं है। फिर भी राज्य को अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। राज्य सरकार को चाहिए कि इसे गंभीरता से देखे। सीधे सीएम को एक्शन लेनी चाहिए कि कौन विभाग कितनी राशि सरेंडर कर रहा है।

उन्होंने बताया कि मनरेगा को देखिए। जितने लोग यहां काम किए, उन्हे पैसा नहीं मिला है अभी तक। हालत यह है कि मनरेगा से लोग डरने लगे हैं। समय से उन्हें पैसा नहीं मिलता है। किसानों का कुंआ आधा-अधुरा ही धंस रहा है। यह सब व्यवस्था शुरु से ही गड़बड़ है। इस पर काफी हंगामा भी हुआ है। इसीलिए सरकार को चाहिए कि सीधे लाभुक के खाते में भेजे। अगर कुछ गड़बड़ होगा तो धरा जाएगा।

उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकार की ग्रामीण योजना बनाओ कार्यक्रम की काफी प्रशंशा करते हुए कहा कि पहले होता यह था कि उपर से सब योजना बन कर आता था और जहां पानी नहीं है, वहां चेकडैम बन गया। जहां पुल की जरुरत  नहीं है, वहां पुल बन गया। जहां सड़क की जरुरत है वहां पगडंडी भी नहीं बना। पैसे का खूब दुरुपयोग हुआ है। कहां कौन अस्पताल बना रहा है, किसी को पता ही नहीं चलता। विभाग को भी पता नहीं है। सब उपर उपर ही दलाल से मिल कर लूटा जाता रहा है। अब गांव को यह अधिकार मिला है कि वे अपनी आवश्कताओं के अनुरुप राशि का सदुपयोग कर सकेगें। पंचायतों को साल में अब एक करोड़ रुपया मिलेगा। अगर उसका दुरुपयोग रुका तो दो चार साल में तो कोई समस्या ही न रहेगा। यह गांव के लिए एक सुनहरा अवसर है। अगर इसमें गांव वाले चूक गए तो चूक गए। अब कोई सरकार या अफसर की बात तो है नहीं।

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव मुंडा सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। अब महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण भी मिल गया है। भारी  तादात में लोग जनप्रतिनिधि चुन कर आए हैं। लेकिन इसमें चिंता का विषय यह है कि भ्रष्टाचार नीचे स्तर तक आ गया है। हम एमपी, एमएलए चुनाव में जितना खर्च करते हैं, उससे कई गुणा अधिक वार्ड-मुखिया वाले खर्च कर के आ रहे हैं। जाहिर है कि वे लूट मचाएगें। लेकिन आगाह करता हूं कि वे लुटेगें तो धराएगें भी और  सीधे जेल जाएगें।

उन्होंने राज्य सरकार की महती साईकिल योजना के स्वरुप में बदलाव की आलोचना की और कहा कि पहले बच्चों को साईकिल खरीद कर देने की योजना थी। इसमें प्रखंड स्तर पर थोड़ी बहुत गड़बड़ी हो सकती थी। उसे सुधारा जा सकता था। लेकिन अब नकद राशि दी जा रही है। उससे कोई महंगा मोबाईल ले रहा है तो कोई टीवी,फ्रीज खरीद रहा है या फिर खा-पी के उड़ा रहा है। सरकार इस पर तत्काल गंभीरता से विचार करे। साईकिल फर्जी बिक्रेता और क्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

उन्होंने केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को बेरोजगारों एवं छोटे-छोटे व्यवसायियों के लिए एक बड़ा अवसर बताया। लेकिन बैंकों की असहयोगात्मक रवैये की तीखी आलोचना की। कहा कि वे जल्द ही डीसी के यहां सभी बैंक के लोगों की बैठक कर मामले की समीक्षा कर कड़ा एक्शन लेगें।

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