रघु’राज के लिए शर्मनाक है इस श्रवण कुमार की कठिन पेंशन यात्रा

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झारखंड की राजधानी से मात्र 130 किमी. दूर लातेहार में पेंशन के मात्र 600 रुपये पाने के लिए मां बेटों की एक तिकड़ी को लंबी कठिन यात्रा करनी पड़ती है।

अपने गांव से बैंक तक आने में दो बेटों को अपनी बूढ़ी मां को 20 किलोमीटर खटोले में बैठाकर लाना पड़ता है।

इस दौरान दो नदियां पार करनी पड़ती है। जरा सोचिये एक अच्छा खासा मजबूत व्यक्ति अकेले 20 किलोमीटर चले तो थक जाए।

और चलना भी कोई समतल सडक में नहीं। ऐसी सड़क जहां सात किलोमीटर तक सड़क नाम का कुछ नहीं है। बस पगडंडी है। मिट्टी- पत्थरों वाली सड़क। जहां सिर्फ पैदल चलना भी कठिन है।

वहां अपनी बूढ़ी मां को एक बेहद थका देने वाली यात्रा पर ले जाना कितना थका देने वाला है। इसकी सहज कल्पन ही कि जा सकती है। और ऐसा हर महीने किया जाता है।

जाड़ा हो गर्मी हो या बारिश। पेंशन के 600 रुपये कि लिए दो बेटे अपनी मां को खटिया में बैठाकर इसे भारनुमा खटोले का रुप देकर बैक पहुंचते हैं।

तड़के से लेकर शाम तक की इस प्रक्रिया के बाद जब मां के कांपते हाथों में ये पैसे आते हैं तो मां का चेहरा चमक उठता है। वह दोनों बेटों को श्रवण कुमार बताती हैं।

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