ये वन-कोयला नहीं, वन-घोटाला है मौनी बाबा !

Share Button

साल 2004- 2009 के बीच कोयला मंत्रालय ने, जो कि तब प्रधानमंत्री की देख-रेख में था, औने-पौने दामों पर सरकारी और निजी कंपनियों को कोयला खदानें बांट दीं। लीक हुई सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले से देश को 10. 67 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस नुकसान में खनन के कारण जंगलों, जानवरों और जंगलों पर आजीविका के लिए निर्भर समुदायों का विनाश तक शामिल नहीं है। 
इस घोटाले के सामने आने के बावजूद मध्यप्रदेश के ‘महान’ क्षेत्र के वनों में कोयला खनन को अस्थायी मंजूरी दे दी गई है। अब मध्य भारत के दूसरे वनों का सफाया होने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। सरकार वनों को बचाने के बजाए उन्हें गंवा रही है।
सबसे बड़ी बात कि तब तक सभी नई कोयला खदानों के आवंटन और वनों के खनन की मंजूरी पर रोक लगा देनी चाहिए, जबतक इस घोटाले की पूरी जांच नहीं हो जाती।  उन क्षेत्रों का साफतौर पर निर्धारण नहीं किया जाता जहां पर खनन नहीं किया जाना चहिये । 
 वेशक नई कोयला खदानों और वनों में खनन के आवंटन पर तब तक रोक लगा देनी चाहिए जब तक इस घोटाले की पूरी जांच नहीं होती और जिन क्षेत्रों में खनन नहीं होगा उनका निर्धारण तय नहीं हो जाता
Share Button

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...