ये कौन है जो हवाओं में जहर घोल रहा है

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snake”…..अभी नाग पंचमी नही आयी …. कहते है सांपो को चाहे जितना भी दूध पिलाओ जहर कम नही होता …अभी मुल्क में  ना जाने कैसी हवा चल रही है जिसको देखो जहर की चर्चा में मसगूल है।

 ….जहर की फ़सल कब बोई और कब काटी जाती है ,इसके बोने का मौसम कब आता है ?.यह  भारतीय किसान को पता नही है।

जहर के खेतिहर सियासती होते है अब जाके पता चला है। आदमी के जहर के आगे सांपो का जहर अब असरदार नही है।

आदमी के काटे का कोई इलाज नही है। आदमी के जहर का असर देखने के लिए रैली के रुप में गाँवों के साँप भारी संख्या में शहर जा रहे है … ताम-झाम से लैस आदमी इतना जहरीला है ?  सभी साँप यह देख कर हैरान है !

 … परन्तु आदमी की औलाद इनसान को  क्या कहे ? वह कुछ नही बोल रहा है .हथियारों की फ़सल और जहर की खेती करने वाले ये सियासती इस चुप्पी पर अब फुफकार रहे है .. हमारी निरीह बेबस गै़रत को ललकार रहे है।

 …नब्बे के दशक में शायर बी.आर.विप्लवी ने बरेली के मुशायरे में जब अपना यह कलाम पढ़ा कि ;- ”ये कौन है जो हवाओं में जहर घोल रहा है , सब जानते है कोई नही बोल रहा है ”…..तब सुनकर आश्चर्य हुआ था अब सच लग रहा ”

……… दिनेश चन्द्र ,मुगलसराय अपने फेसबुक वाल पर

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