युवा समाजसेवी पत्रकार अमित टोपनो की हत्या के विरोध में निकला कैंडल मार्च

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राजनामा.कॉम। युवा पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता अमित टोपनो की हत्या के खिलाफ विभिन्न आदिवासी संगठनों ने रांची विश्वविद्यालय कैंपस से अलबर्ट एक्का चौक तक मौन जुलूस व कैंडल मार्च निकाला।

अलबर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता जेरोम जेराल्ड कुजूर ने कहा कि अमित टोपनो ने पत्थलगड़ी व कोचांग मुद्दे पर काफी काम किया था।  उनकी हत्या इनसे जुड़ी प्रतीत होती है।

श्री कुजूर ने कहा कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराये और दोषियों को कड़ी सजा दिलाये,  ताकि अमित की आत्मा को शांति मिले और पत्रकारिता से जुड़ने की इच्छा रखनेवाले युवा इस घटना से हतोत्साहित न हों।

वरिष्ठ समाजसेवी दयामनी बारला ने कहा कि भाजपा की सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षा देने में विफल रही है। हर दिन हत्या, बलात्कार और अपहरण की घटनाएं सामने आ रही हैं। फिर भी सरकार सुशासन का राग अलाप रही है। सिर्फ अमित ही नहीं, हर आपराधिक घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। 

इस कैंडल मार्च में मेघनाथ, सुशांतो मुखर्जी, टीएसी सदस्य रतन तिर्की, आतेन टोपनो, बीजू टोप्पो, अनिल अंशुमन, ललित मुर्मू, फादर स्टैन स्वामी, वासवी, सिराज दत्ता, जेवियर कुजूर, नदीम खान,  स्टालिन, सुदीप तिग्गा, राकेश रोशन किड़ो, दीपक बाड़ा, रोजालिया तिर्की, ज्योति लकड़ा, कुलदीप तिर्की आदि लोग शामिल थे।

उधर, ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम की झारखंड कमेटी की राजधानी में बैठक हुई। इसमें युवा आदिवासी पत्रकार अमित टोपनो की हत्या का विरोध किया गया। फोरम का मानना है कि यह साधारण हत्या का मामला नहीं है। पिछले दिनों अमित टोपनो ने पत्थलगड़ी व कोचांग दुष्कर्म कांड के कई पहलुओं को उजागर किया।

फोरम के अनुसार वह जनविरोधी शक्तियों को बेनकाब करनेवाले थे। उसकी हत्या की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

इस मौके पर पूर्व विधायक विनोद सिंह, फैसल अनुराग, श्रीनिवास, मेघनाथ, बशीर अहमद, नदीम खान, अजय कंडुलना, सुदामा आदि मौजूद थे।

बता दें कि बीते 8 दिसंबर की रात पत्रकार सह सामाजिक कार्यकर्ता अमित टोपनो की डोरण्डा थाना क्षेत्र स्थित घाघरा से शव बरामद किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पत्रकार अमित की हत्या गोली मार कर की गई है। हालांकि जिस जगह से अमित का शव बरामद किया गया था, वहां के स्थानीय निवासियों ने भी रात के ढ़ाई बजे गोली चलने की आवाज सुनी थी। घटना के एक सप्ताह बाद भी अपराधियों का सुराग पुलिस अब तक पता नही कर पायी है। 

मृतक अमित टोपनो की छोटी बहन हत्यारों की अब तक गिरफ्तारी नही होने से काफी नाराज दिखी, इनकी मानें तो अमित ही घर का आधार स्तंभ था। अमित के नही रहने से परिवार के समक्ष आर्थिक समस्या भी खड़ी हो गयी है।

मृतक अमित के मित्र दीपक बाड़ा ने हत्यारों की गिरफ्तारी अब तक नही होने से पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, कि हत्या के पांच दिन गुजर चुके हैं, लेकिन पुलिस के पास कोई जवाब नही। जबकि हत्या भी नेपाल हाउस सचिवालय से मात्र कुछ ही दूरी पर हुई है। दीपक ने कहा कि अगर हत्यारों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द नही होती और उनके परिवार को मुआवजा नही दिया जाता है, तो क्रमवार आंदोलन किया जाऐगा।

पत्रकार अमित की हत्या जिस जगह पर हुई है, वहां से नेपाल हाउस सचिवालय की दूरी मात्र 2 से 3 किलोमीटर होगी। सवाल ये उत्पन्न होता है कि क्या उक्त सड़क पर रात्रि गश्ती नही होती  या फिर रात्रि गश्ती के नाम पर पुलिस कुंभकर्णी निंद्रा में रहती है।

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