युवा पत्रकार मनोज सिंह ने लिखा- मीडिया में ‘तल्लूचट्टू’ भी एक बीट है!

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राजनामा.कॉम। पत्रकारिता में राजनीति, क्राइम, बाजारू सहित अन्य बीट के बीच एक चापलूसी बीट भी है। जिसे तल्लूचट्टू भी कहा जाता है। इसमें काम करनेवाले खुद को ह…मी टाइप के बुद्धिजीवी पत्रकार समझते हैं।

ये हमेशा स्टेटमेंट बदल कर अपनी बातें रखते हैं। सामने वाले की जरूरत के हिसाब से नाप तौल कर बोलते फिरते हैं। मतलव सटले तो गेले….

क्या है खासियत :  चापलूसी पत्रकारों की खासियत होती है की ये अपने साथ हमेशा बुद्धि से भरा हुआ एक बक्सा भी रखते है। तेलचट्टे की तरह रेंगकर कहीं भी मुँह उठाकर घुस जाते हैं।

सामनेवाले को इनकी जरूरत है नहीं है, इन्हें इसकी परवाह नहीं। दूसरों की परवाह किये बगैर समय-समय पर ये अपना बक्सा खोल देते हैं।

इन्हे लगता है अपनी भद्दी मुस्कान और अजीब सी हरकतों की वजह से वे शकुनी चाल चलने में कामयाब हो जाएंगे। सामने वाले को इसका अन्दाजा भी नहीं लगेगा। और निरंतर अपने काम में लगे रहते हैं। लगे रहो भैया….

करियर बेहतर लेकिन कम्पीटिशन टफ : वैसे इस बीट में भी अब कम्पीटिशन है। अब यहां भी एक से बढकर एक तल्लूचट्टू हैं। पहले तेलचट्टा ही थे, अब इन्हें तेलचट्टू बनना पड़ रहा है।

कारण है कोई अधिक काम करता है तो उसे जगह मिल जाती है। कोई इस काम में ढ़ीलाई करता है तो पीछे छूट जाता है। कम्पीटिशन बढ़ने का यही कारण है और कुछ नहीं! लगे रहे अपने काम में….

मिलती है कामयाबी : अब इसका मतलब यह भी नहीँ है इस बीट में काम करने वालों को जगह नहीं मिलती है। तेलचट्टूओं को हताश होने की जरूरत नहीं है वे निरंतर अपना काम करें। कामयाबी जरूर कदम चूमेगी।

कम्पिटिशन होने के बावजूद मन लगाकर काम किया जाए तो बेहतर जगह मिलती है। विभिन्न संस्थानों में ऐसे प्राणी देखे जा सकते है। आज कई हैं जगह पर….

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