यह कोई सांप्रदायिक नहीं, राजनीतिक दंगा है भाई !

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chanho1दंगा पीड़ित चान्हो सिलगाई गाव की घटना ने कई राजनितिक दलों की पोल खोल दी है। पोल तो सरकार की इक्षा शक्ति और उसके प्रशासनिक अमले की भी खुली है।

सिलगई गांव से पुरे मुसलमान भाई भाग गए है। उनके घर तोड़ डाले गए है। राजनितिक दलों के गुंडे नुमा लोग इसका फायदा उठा रहे है।

गांव में जितने बांस के पेड़ थे सब काट कर लाठी बन गए है। कहने के लिए पुलिस का पहरा है लेकिन पुलिस की चलती नहीं। जिसे जो मन करता है करता फिर रहा है।

तमाम हिन्दू संगठन आज इस दंगे में मारे गए एक आदिवासी के लिए न्याय की मांग कर रहे है। चली गयी जो लौट नहीं सकती।

सरकार की तरफ से क्षतिपूर्ति के नाम पर पैसे दे दिए गए। अक्सर देश में ऐसा ही होता है। घायलो के परिजनों को भी पैसे दिए गए। दंगा में शामिल लोगो की गिरफ्तारी भी हुयी। सब जेल गए। लेकिन माहौल अभी भी तनाव पूर्ण ही है।

चार दिन पहले की घटना और आज में कोई बदलाव नहीं है। संभव है चुनाव तक ऐसा ही माहौल रहे। हो सकता है माहौल और ख़राब भी हो जाए या यह कहिये की माहौल ख़राब कर दिया जाय।

राजनीति में जो लाभ हो वही किया जाता है। कोई मरे यार कटे। किसी की लॉस पर अगर किसी की जीत हो जाती है या फिर सरकार बन जाती है तो घाटा क्या है। सत्ता पक्ष बेबस और लाचार है। और विपक्ष को अपनी राजनीति सूझ रही है।

सवाल है कि जो लोग और राजनितिक दल दो दिनों से इस घटना के विरोध में बंद की राजनीति कर रहे है वे जय श्रीराम और कालीमाता की जय क्यों बोल रहे है। यह तो अतिवादि चरित्र ही है। चान्हो की घटना पुरे प्रदेश में फैलाई जा रही है।

लेकिन सिलगाई की घटना में मुसलमान लोग भी काम दोषी नहीं है। भले ही तन पर कपड़ा नहीं हो धर्म के नाम पर सब कुछ कर जाते है। जब यहाँ के मुसलमानो को मदरसा बनाने ,मस्जिद बनाने की जमीन दे गयी थी तो फिर किस लोभ से चार एकड़ और जमीन पर उनकी नज़ारे टिकी थी ? नवाज पढ़ने के लिए ?

अगर इतना ही शौक था तो इस जमीं को खरीद लेते। कब्जा करने की राजनीति ठीक नहीं थी।

एक सवाल और है की जब सिलगई गांव में २९ घर ही मुसलमानों के है तो मंगल की सुबह में ५ हजार से ज्यादा मुसलमान कहां से और किसके इशारे पर घटना स्थल पर आ गए ?  क्या कोई नेता और अधिकारी भी इसमें शामिल था?  फिर हिन्दुओ ने विरोध किया तो क्या गलती थी ?

लेकिन ये सब तो पीछे की कहानी है। अब जो भी हो रहा है वह राजनीति के सिवा कुछ भी नहीं। सरकार और तमाम राजनितिक दलों का अब एक ही कर्तब्य है कि जो लोग गांव से भागे-भागे फिर रहे हैं, उसे स्थापित किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाला दिन और खतरनाक होगा।

 …….. वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल अपने फेसबुक वाल पर।

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