यशोदाबेन को लेकर कितने बेदर्द हैं मोदी!

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एक ओर जहां दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा अपनी पत्नी मिशेल ओबामा के साथ ओबामा अपनी पत्नी मिशेल का हाथ पकड़े स्पेशल विमान की सीढ़ी से उतर रहे थे और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनकी आगवानी करने के लिये नीचे अपनी पलकें बिछाये थे, वहीं दूसरी तरफ यह दृश्य नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन मोदी को अंदर से झकझोर रहा था।

7612_0बकौल यशोदाबेन, टीवी पर इस दृश्य को नहीं देखना चाहती थीं लेकिन, खुद को रोक पाने में असमर्थ रहीं। उनके मन में यह बात चलती रही कि वह अपने पति मोदी के साथ क्यों नहीं हैं? उन्हें पीएम की पत्नी होने का हक क्यों नहीं मिल रहा?

इस वक्त जसोदाबेन अपनी सुबह की पूजा में लगी थी। नहीं पता कि वह ईश्वर से प्रार्थना में अब क्या मांगती हैं। जसोदाबेन साड़ी पहन तैयार थीं।

जसोदाबेन के मन में ओबामा और मिशेल ओबामा का स्वागत करते वक्त मोदी के साथ रहने की तमन्ना थी लेकिन वह इस तमन्ना को दबाए उत्तरी गुजरात के अपने गांव ब्रहमवाड़ी से 120 किलोमीटर दूर एक शादी में जाने की तैयारी में हैं।

उनके भतीजे ने टीवी ऑन किया तो ओबामा के स्वागत का सीधा प्रसारण चल रहा था। वह अपने पति को गौर से देखने लगती हैं।

मिशेल और बराक ओबामा के साथ मोदी को देखकर उन्होंने बीबीसी से कहा, ‘मुझे पता है कि जब ओबामा का स्वागत हो रहा था तब मुझे भी दिल्ली में होना चाहिए था लेकिन साहेब ऐसा नहीं चाहते। इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।’

जसोदाबेन ने कहा, ‘अगर वह मुझे आज बुलाएंगे तो मैं कल पहुंच जाऊंगी। मैं बिना बुलाए कभी नहीं जाऊंगी। उन्हें मुझे बुलाना होगा। मेरा आत्मसम्मान है जिससे मैं पीछे नहीं हटूंगी। हम दोनों के बीच हैसियत की कोई बात नहीं है, हम दोनों इंसान हैं।’

Jasodabenजसोदाबेन ने कहा, ‘मैं आभारी हूँ कि उन्होंने पिछले साल मुझे अपनी पत्नी माना। मैं सरकार से मांग करती हूं कि वह मुझे हक दे जिसकी मैं हकदार हूं। मैं जानती हूं कि उन्होंने देश के लिए अपने वैवाहिक जीवन का त्याग किया। अगर मैं उनके साथ होती तो वह शायद इतना कुछ नहीं कर पाते। मेरे मन में कोई कड़वाहट नहीं है।’

जसोदाबेन ने कहा, ‘जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने स्वीकार नहीं किया मैं उनकी पत्नी हूं। मैं जब कहती थी कि मोदी की पत्नी हूं तो बीजेपी के लोग मुझे झूठा बताते थे।’

जसोदाबेन की शादी नरेंद्र मोदी से 17 साल की उम्र में 1968 में हुई थी। जसोदाबेन रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं और 14 हजार रुपए की पेंशन पर गुजारा करती हैं। उन्होंने बताया, ‘शादी के बाद वे मेरे साथ कुछ महीनों तक रहे। वह सुबह आठ बजे चले जाते थे और देर शाम घर आते थे। एक बार वह गए तो फिर नहीं आए। मैं ससुराल में तीन साल तक रही जिसके बाद मुझे लगा कि अब वह मेरे पास नहीं आएंगे। फिर मैं पढ़ाई करके टीचर बन गई।’

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात सरकार ने उनके घर के बाहर चार कमांडो तैनात किए हैं। वे साये की तरह उनके साथ चलते हैं। यहां तक कि हाल ही में उनके साथ वह मुंबई भी गए थे।

जसोदाबेन ने सूचना के अधिकार के तहत दो बार आवेदन किया है कि उन्हें इस सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी जाए। लेकिन उन्हें जानकारी नहीं दी गई कि वह गोपनीय है।

yashoda-benसोदाबेन ने अपने आवेदन में कहा, ‘मैं मंदिर जाती हूं तो ये मेरे पीछे आते हैं। अगर मैं बस पर चढ़ती हूं तो ये पीछे-पीछे कार से आते हैं। उनकी मौजूदगी मुझे डराने वाली लगती है। इंदिरा गांधी को तो उनके गार्डों ने ही मार डाला था, मैं जानना चाहती हूं कि किसके निर्देश पर इनकी तैनाती की गई है।’

जसोबाबेन ने कहा, ‘इन वजहों से गांव में मेरा मजाक बन गया है। इनके साथ मुझे आते देखकर लोग मजाक उड़ाते हुए कहते हैं, ‘देखो, मोदी की बारात जा रही है।’

ये कमांडो हर उस आदमी का अता-पता दर्ज करते हैं जो जसोदाबेन से मिलने आता है, जसोदाबेन के रिश्तेदारों को लगता है कि ये कमांडो सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उन पर नजर रखने के लिए तैनात किए गए हैं।

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