मोदी जी, परिवारवाद का विरोध या समर्थन ?

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modiपंजाब का सत्ताधारी परिवार अपने आप में एक मंत्रिमंडल है। केंद्र की नई मोदी सरकार में हरसिमरत कौर बादल के कबीना मंत्री बनने के साथ ही परिवार का हर सदस्य सरकार में शीर्ष पद पर आसीन हो गया।

परिवारवाद के विरोध में भाषण देने वाले पीएम नरेंद्र मोदी ने इस परिवार को नई सरकार में जगह दे दी।

हरसिमरत पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल की पत्नी और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की पुत्रवधू हैं।

अब बादल परिवार में एक मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और दो राज्य के कबीना मंत्री हैं।

राज्य के कबीना मंत्रियों में बादल सीनियर के साले आदर्श प्रताप सिंह कैरों और जूनियर बादल के साले बिक्रम सिंह मजीठिया हैं।

बादल परिवार ने असल में हरसिमरत के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और कहीं ज्यादा अनुभवी रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, नरेश गुजराल और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा को नजरअंदाज कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कांग्रेस नेताओं को इस बात के लिए कोसती रही है कि वह ‘एक परिवार’ से अलग कुछ सोच नहीं पा रही। इसके बावजूद हरसिमरत को चुनने में पार्टी और मोदी दोनों परिवार से आगे नहीं देख पाए।

पंजाब से भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, “यह भाजपा के दोहरे मानदंड को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। जब वह अकाली दल जैसे सहयोगी का रुख करती है तो अपनी आंखें मूंद लेती है।”

हरसिमरत बादल को न केवल केंद्र की छोटे आकार के मंत्रिमंडल में लिया गया है, बल्कि कबीना स्तर का दर्जा भी दिया गया है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे ने यह सुनिश्चित किया कि उसे कबीने में लिया जाए और नाम मात्र का कनिष्ठ मंत्री नहीं बनाया जाए।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अमृतसर से कांग्रेस के सांसद अमरिंदर सिंह ने कहा, “मैं समझता हूं कि ब्रह्मपुरा जेसे वरिष्ठ अकाली दल नेता को लिया जाना चाहिए था।”

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