मोदी के सद्भावना मिशन व्रत पर खर्च हुए थे 20 करोड़

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पीएम नरेंद्र मोदी के 2011-12 में गुजरात के सीएम रहते हुए किए गए चर्चित सद्भावना मिशन व्रत पर हुए खर्च के सही आंकड़े हासिल करने में राज्य सरकार को तीन साल लग गए। गौरतलब है कि पहले राज्य सरकार ने अनुपलब्धता के आधार पर आंकड़े देने से इनकार कर दिया था। इस एक आयोजन पर 19.96 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

modiआयोजन के खर्च की जानकारी देने से इनकार के तीन साल बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की प्रोटोकॉल डिविजन ने राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त बलवंत सिंह के सामने सद्भावना व्रत पर खर्च का ब्योरा पेश किया।

कीर्ति राठौड़ द्वारा दायर एक आरटीआई का जवाब देते हुए जीएडी ने विभिन्न जिलों द्वारा इस व्रत पर एक साथ 19.96 रुपए खर्च करने की जानकारी दी। यह खर्च सभी जिलों द्वारा ‘जिला आकस्मिक फंड’ से खर्च किए गए थे। सामान्य तौर पर इस फंड का प्रयोग आपदा और आपातकाल के समय होने वाली बैठकों पर किया जाता है।

खर्चों की विस्तृत सूची में जीएडी ने बताया कि सबसे ज्यादा खर्च राज्य परिवहन की बसें किराए पर लेने में हुआ था। इसमें 16.36 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। 36 सद्भावना व्रतों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी द्वारा 39,469 करोड़ रुपए के प्रॉजेक्ट्स और आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया था।

महिती अधिकार गुजरात पहल के एक सप्ताह के आरटीआई ऐनिवर्सरी सेलिब्रेशन में भाग लेने वाले और यह आरटीआई दायर करने वाले राठौर ने कहा, ‘तीन वर्षों तक सरकार इन खर्चों की जानकारी होने से इनकार करती रही। रोचक बात है कि सभी जिलों से इस व्रत का आयोजन करने के लिए अपने आपदा वाले फंड को खर्च करने के लिए कहा गया। मैंने एक आरटीआई डालकर सवाल पूछा है कि किन परिस्थितियों में एक कलेक्टर आपदा फंड को खर्च कर सकता है।’

जीएडी के प्रोटोकॉल डिविजन के डेप्युटी सेक्रटरी जयंत गांधी के दस्तखत वाले आठसूत्री अजेंडे के एक सरकारी नोटिफिकेशन में प्रत्येक जिले से सद्भावना व्रत में अधिक से अधिक महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई थी (नभाटा)

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