मोदी के आंसू के बीच भरतीय मीडिया में नीतिश-लालू बने जोड़ी नं. वन

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बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों से देश के सारे अखबार रंगे हुए हैं. हिंदी हो या अंग्रेजी, सभी अखबारों में लालू-नीतीश की जीत और पीएम नरेंद्र मोदी की करारी हार हेडलाइंस हैं.

bihar_media_lalu_nitishकिसी अखबार में ‘नीतीश इन बिहार, मोदी बाहर’, तो कहीं लालू-नीतीश की शानदार जोड़ी की तस्वीर के साथ ‘बिहार के डीएनए में अब एनडीए नहीं’ के साथ तंज कसते दिख रहे हैं.

लगभग सभी अखबारों ने दिलचस्प हेडलाइंस के साथ लालू-नीतीश की जबरदस्त जीत और बीजेपी, की करारी हार का विश्लेषण करते हुए कार्टून्स, ग्राफिक्स और आंकड़ो के जरिए लोगों तक परिणाम पहुंचाए हैं.

lalu nitishजहां कुछ अखबारों में पीएम मोदी की इस हार को असहनीय बताते हुए उन्हें आइना दिखाने की कोशिश की है तो वहीं कुछ अखबारों में मोदी लहर के बिहार में रुकने पर भी सवाल उठाए गए हैं.

गौरतलब है दिल्ली में हुए सफाए के बाद बीजेपी के लिए बिहार में यह बहुत बड़ा झटका है . कुल 243 में से महागठबंधन ने जहां 178 सीटें हासिल कर 42 वोट शेयर अपने नाम किया है तो बीजेपी सिर्फ 58 सीटें ही जीत पाई है लेकिन 34 प्रतिशत वोट शेयर अपने नाम करने में सफल हो पाई है.

ज्यादातर समाचार पत्रों ने चुनाव परिणामों से संबंधित खबरों, फोटो, ग्राफिक्स, कार्टून्स को प्रमुखता दी है. वहीं विदेशी मीडिया ने भी इसे पीएम नरेंद्र मोदी की जबरदस्त हार के रुप में पेश किया है.

newsबिहार में मोदी की हार का देश पर असर पड़ा है. शेयर बाजार में हाहाकार के साथ कारोबार शुरू हुआ है.

अब दुनिया में भी मोदी की हार पर चर्चा हो रही है. अमेरिका, ब्रिटेन के बड़े अखबारों में मोदी की हार हेडलाइन बनी है.

न्यूय़ॉर्क टाइम्स ने तो यहां तक लिखा है कि मोदी बिहार चुनाव को अपना जनमत संग्रह मान रहे थे लेकिन जनता ने नकार दिया.

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि Mr. Modi is beatable.

दैनिक भास्कर ने लालू-नीतीश की जीत पर हेडलाइन दी है- ‘बिहार के डीएनए में अब एनडीए नहीं’. दैनिक भास्कर ने इस जीत को जनता का विशेष पैकेज बताया है. भास्कर ने दीपावली के मौके पर इसे स्वच्छता अभियान भी करार दिया है.

नवभारत टाइम्स ने लिखा है, ‘असहनीय हार’…अब आगे देखने का वक्त आ गया है. अखबार ने लालू-नीतीश की इस जीत पर अपने फ्रंट पेज पर पीएम मोदी की आंसू पोछते हुए एक तस्वीर छापी है.  और पीएम मोदी को इस हार के जरिए अपने काम में बदलाव लाने और आइना दिखाने की कोशिश की है.

अमर उजाला ने ‘ महागठबंधन की महाजीत’ बताते हुए लालू-नीतीश को ही छापा है. अखबार ने बिहार चुनाव में लालू-नीतीश को हीरो करार दिया है और मोदी की हार को करारी हार बताया है.

दैनिक जागरण लिखता है, ‘लालू नीतीश का महाधमाका’. जागरण ने लिखा है कि मोदी-शाह का जादू फीका पड़ गया है और एनडीए की करारी हार हुई है.

वहीं जनसत्ता लिखता है- महागठबंधन की महाजीत. अखबार ने लिखा है कि पीएम मोदी के वादों के साथ ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रणनीती फेल हो गई है.

हिंदुस्तान ने शार्षक दिया गया है- ‘महागठबंधन की महाविजय’ के साथ लालू-नीतीश की गले मिलते हुए  तस्वीर छापी है. अखबार ने ग्राफिक्स के जरिए लालू-नीतीश की बंपर जीत को पाठकों को बताया है.

pkपंजाब केसरी अखबार ने लिखा है- ‘बिहार में फिर नीतीशे कुमार’. अखबार के पहले पेज पर ही बीजेपी की इस करारी हार का विश्लेषण किया गया है.

अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने ‘Bihaar…’ की हेडलाइन के साथ लिखा है कि पटना ने नई दिल्ली को एक मैसेज दिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, ‘NITISH IN BIHAR, MODI BAHAR’ . अखबार ने बिहार में पिछले 10 सालों में बीजेपी का सबसे बुरा प्रदर्शन बताया है. अखबार ने बताया है कि आखिर महागठबंधन की जीत के क्या-क्या कारण रहे?

वहीं इकनॉमिक टाइम्स ने इसे मोदी की हार बताते हुए लिखा है- ‘Many Beefs Now on Modi’s Menu’. अखबार की यह हेडलाइन काफी कुछ इशारा करती है.   

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