मैं कलम का सिपाही हूं, मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

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educationजला दे नफरत की आग में अपनी
मानवता को कर तू अब अनमोल
मैं कलम का सिपाही हूँ
मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

जो चढे फाँसी पे भारत माँ की जय बोल
तू ही लगा दे उनकी गर्दन का कुछ मोल
चन्द्र शेखर प्यारा भगत सिंह मेरा दुलारा
राणा संग जय गाये शिवाजी की हम अब
लक्ष्मी बेटी के कर्म कोे वीर बेटो से तोल
मैं कलम का सिपाही हूँ
मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

जो अगणित दीपक बन वीर भाई ते हमारे
जल गए देश खातिर तूफानों में एक किनारे,
जले कई तूफानों में पर हारे नही अंधेरो से
देश की लिए दी जाँ माँगा नहीं स्नेह से कुछ भी तू अब मुँह खोल
मैं कलम का सिपाही हूँ
मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

सूरज सा बन कृष्ण जब दिखाता हो दिशाएं,
उसकी गर्जन से हिले धरती और विशाल शिखाएँ
कांपे थर थर दुश्मन और जाए चलने से जिसके धरती भी डोल
मैं कलम का सिपाही हूँ
मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल।

सोया हैं कई सालो से अंधा धृतराष्ट् बन देश चकाचौंध का मारा
मुगलों और अंग्रेजों ने बिगाड़ा था तू क्या जाने इतिहास हमारा
पावन है इस देश की माटी तू सिर्फ वंदे मातरम् बोल
मैं कलम का सिपाही हूँ
मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

जहाँ मीरा नित गाये श्री कृष्ण के भजनों के ही बोल
महिमा जहा श्री राम की सब गाये कबीरा के भजनों को गाये
जयसि से सूरदास के भजनों में राधा कृष्ण के प्रेम को पाये
जहा मंगल से मंगल हो सूर्य चन्द्र जिसके भूगोल
मैं कलम का सिपाही हूँ
मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

pp……………..अशोक सपड़ा (दिल्ली) की कलम से

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