मुन्ना मरांडी के साथ शादी कर तमाशा नहीं बनाना चाहती थीः ममता

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ममता की कहानी, उसी की जुबानीः

पिछले जून महीने में मुन्ना की शादी ममता के साथ तय थी। दरअसल, शादी से एक दिन पहले ही मुन्ना पर एक महिला ने रेप का आरोप लगाया था। जब ममता को यह बात पता चली तो, उसने उसे छोड़ दिया। ममता ने बताया कि उसने कैसे और क्यों उठाया ये सटीक कदम।ममता ने कहा कि विधायक के बेटे से मेरी शादी होगी! यह कभी सोचा तक नहीं था। मैं और मेरे घरवाले ही नहीं, सारा गांव खुश था।

हमारे संथाली समाज में एक रस्म भी है। लड़का रिश्ता तय होने से पहले लड़की के गांव में आता है। सारा गांव उसे देखता है। उस रस्म के बाद रिश्ता पक्का हो गया। कार्ड भी छप गए। पूरे संथाल में हमारी शादी के चर्चे होने लगे। पापा कहते थे, विधायकजी के आदमी आएंगे। तरडीहा गांव के बगीचे में 15 दिन से बड़ा टेंट बनाना शुरू कर दिया था।
जैसा होता ही है, मैं भी नई जिंदगी के सपने देखने लगी थी। मगर जिंदगी में अचानक तूफान आ गया। कहीं से उड़ते हुए बात आई कि मुन्ना तो दागदार है। उसके किसी लड़की से संबंध हैं। मैंने पुछवाया। सबने कहा, वह किसी लड़की के साथ रहता था। फिर पता चला कि वह लड़की मुन्ना पर यौन शोषण का आरोप लगा रही है।

mamta (2)शादी को तमाशा नहीं बनाना चाहती थी मैं  

मैं अपनी शादी को तमाशा नहीं बनाना चाहती थी। यह बीस जून की बात है। शादी की तैयारी पर लाखों रुपये लग चुके थे। 27 को तो शादी ही थी। उससे पहले मंडप पूजा, तिलक वगैरा की रस्में। जल्द फैसला लेना भी जरूरी थी। हमारे संथाली समाज में शादी तय होने के बाद तोड़ना बुरी माना जाता है। इसलिए शादी के लिए ना कहना आसान नहीं था। लेकिन फिर लगा कि यह जिंदगी भर का सौदा है, अभी चुप रह गई, तो कभी अपने आप को माफ नहीं कर सकूंगी। मैं सोचने लगी मुन्ना मरांडी से शादी की, तो जिंदगी नरक बन जाएगी।

पोडैयाहाट के होली फैमिली स्कूल से मैंने मैट्रिक किया था। वहीं से अनुशासन सीखा। स्कूल में बताया गया था कि सही और गलत का फैसला सही समय पर करना जरूरी है। गलत का विरोध करने का पाठ भी वहीं सीखा। इसी कारण इतने बड़े आदमी के बेटे को ना कहने की हिम्मत हुई। अब तो मैं बीकॉम में हूं। अच्छा और बुरा समझती हूं। इसलिए शादी से इनकार कर दिया।

पिताजी ने विधायकजी तक बात पहुंचा दी। हम जानते थे, हम पर बहुत दबाव पड़ेगा। मुझे प्राउड है कि मेरी मां, पापा और और दोनों बड़े भाइयों ने मुझे समझा। बूढ़े दादाजी ने भी। वे न डरे। न झुके। न मेरे फैसले का विरोध किया। सभी ने कहा जिंदगी तो ममता को जीनी है। हम लोग इसके रास्ते का कांटा क्यों बनें? अब तो लड़कियां खुद अपना रास्ता चुनती हैं।

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