मुखिया की गुंडई पर पुलिस की कार्यशैली को लेकर पत्रकारों में उबाल

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झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिला के राजनगर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर पंचायत की मुखिया की दबंगई देखने लायक है। बनकाटी गांव में मुखिया फंड से एक सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिसमें घटिया निंर्माण कार्य का ग्रामीणों ने विरोध किया, उसके बाद  मुखिया सावित्री मुर्मू अपने समर्थकों के साथ विरोध स्थल पर पहुंची। उसके बाद विरोध कर रहे ग्रामीणों पर लाठी डंडे के साथ टूट पड़ी।

इतना ही नहीं, उनके समर्थकों ने महिला या पुरूष किसी को भी नहीं बख्शा सभी की जमकर पिटाई शुरू कर दी। वहीं मीडिया कवरेज करने गए एक पत्रकार पर भी मुखिया और उनके समर्थकों ने हमला बोल दिया और जान से मारने की धमकी दी। 

वहीं बनकटी गांव के लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। वैसे जब सड़क निर्माण का काम शुरू किया गया था तो गांववाले काफी खुश थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घटिया निर्माण कार्य का विरोध उन्हें इतना महंगा पड़ेगा।

इधर मुखिया और उनके गुर्गों की हिमात इतनी कि पत्रकार को भी नहीं बख्शा फिलहाल स्थानीय पत्रकार ने राजनगर थाने में मुखिया और उनके समर्थकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वैसे घटना के बाद से मुखिया और उनके समर्थक फरार हैं।

राजनगर थानें में शिकायत दर्ज होते ही पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर मीडिया पर हमला आखिर कब तक होता रहेगा। और सावित्री मुर्मू जैसी जनप्रतिनिधि की दबंगई के लिए कानून में कोई सजा है, या नही….।

इधर मुखिया और उसके गुर्गों द्वारा रिपोर्टर बीरेंद्र मंडल पर कवरेज के दौरान जानलेवा हमला किया गया उसके बाद जान से मारने की धमकी दी। स्थानीय पत्रकार ने राजनगर थाना में मामला दर्ज कराया, लेकिन राजनगर थाना ने पत्रकार के शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया और शाम को थाना प्रभारी ने पत्रकार को फोन कर समझौता कर लेने की बात कही।

इतना ही नहीं थानेदार ने पत्रकार को कहा अगर केस में समझौता नहीं करोगे तो काउंटर केस करने की बात मुखिया कर रही है, जिसमें एससी/ एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इससे जिले के पत्रकारों में उबाल है।

राजनगर थाना में शिकायत दर्ज करने के बाद पत्रकार वीरेंद्र मंडल सीधा जिला पुलिस मुख्यालय पहुंचा, जहां जिले के पुलिस कप्तान अपने अधिकारियों के संग बैठक कर रहे थे। लगभग 3 घंटा इंतजार के बाद बैठक खत्म हुई।

बैठक के बाद जब जिले के पुलिस कप्तान से मिलने पत्रकार पहुंचा तो उन्होंने बस इतना ही कहा मैं देखता हूं क्या मामला है थाना प्रभारी से बात करता हूं। और फिर 3 दिनों के अवकाश पर चले गए।

इधर पत्रकार वीरेंद्र मंडल ने सराइकेला एसडीपीओ से भी फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की तो उन्होंने कहा वह किसी जरूरी काम से चांडिल निकल रहे हैं कल आकर मिले।

तब तक पूरे मामले की पटकथा राजनगर थाने में तैयार की जा चुकी थी। जहां मुखिया काउंटर केस करने के लिए थाना प्रभारी के पास अपने समर्थकों के साथ बैठी हुई थी, और थानेदार पत्रकार को समझौता करने की बात कह रहे थे।

पत्रकार वीरेंद्र मंडल पर हुए हमले से एक ओर जहां जिले के पत्रकारों में उबाल देखा जा रहा है, वहीं पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी पत्रकारों में गहरा रोष देखा जा रहा है। वैसे कल सराइकेला परिसदन भवन में पत्रकारों की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

पत्रकारों का मानना है कि इस मामले में सीधे-सीधे पुलिस प्रशासन की लापरवाही है और राजनगर थाना में पूरे घटनाक्रम की पटकथा लिखी गई है। वैसे पत्रकारों ने साफ कर दिया है कि जब पत्रकार वीरेंद्र मंडल ने 10:30 बजे राजनगर थाना में मामला दर्ज करा दिया था, फिर मुखिया या उनके गुर्गो की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई ? क्यों काउंटर केस करने तक इंतजार किया गया इसके पीछे का खेल क्या है!

देखिए वीडियो  मुखिया की गुंडई……

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