मुंडा’काज हो या ‘रघु’राज, नहीं बदल रहे वन विभाग के भ्रष्ट’साज !

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renger_anandराज़नामा.कॉम। झारखंड में अधिकार और भ्रष्टाचार की बात करना बिल्कुल बेमानी प्रतीत होता है। खास कर भाजपा राज में तो और भी मुश्किल नजर आता रहा है। ‘मुंडा’साज’ में जो हो रहा था, ‘रघु’राज’ में भी वही सब होता दिख रहा है।

फिलहाल स्थिति और भी विकट नजर आ रही है। शायद रघु’राज में व्यवस्था और नीति से जुड़े लोगों के इतने अच्छे दिन आ गए हैं कि वे तंत्र को अपनी बपौती मान बैठे हैं।

अब जरा झारखंड वन विभाग के रेंजर आनंद कुमार को देखिए। एकला वन विभाग में कायम भ्रष्टाचार के बीच अपने अधिकार की जंग को लेकर काफी परेशान हैं। इधर विभाग के आला अधिकारियों ने उन पर मुकदमा करने की अनुमति मांगी है।

 anand_matterक्षेत्रीय वन पदाधिकारी ने श्री कुमार के खिलाफ फेसबुक पर अधिकारियों को लेकर टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए आइटी एक्ट की धारा 2000 के अंडर सेक्सन 72 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी है।

श्री कुमार ने इसके पूर्व फेसबुक वाल में जिन अधिकारियों पर आरोप लगाया है, उनकी लिखित शिकायत वन सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक,मुख्य सचिव, गृह सचिव तथा मुख्यमंत्री से भी की गई है।

anand_forest श्री कुमार के फेसबुक वाल में एक विभागीय अधिकारी पर 11 करोड़ रुपये की गड़बड़ी में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अन्य एक अधिकारी पर अवैध रुप से नियुक्त होने तथा अवैध रुप से वन प्रमंडल पदाधिकारी के रुप में काम करने के साथ ही उन पर महिलाओं को प्रताड़ित करने का भी आरोप है।

लातेहार जिले में अधिकारियों की मिलीभगत से 438 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। इसकी जांच उपायुक्त स्तर से कराई जा रही है।

श्री कुमार ने पूरे मामले में विभागीय सचिव और विभाग के विशेष सचिव के भी शामिल होने का आरोप लगाया है। श्री कुमार ने यह भी लिखा है कि ऐसे अधिकारी भ्रष्ट अफसरों को संरक्षण दे रहे हैं।

फेसबुक पर अपने आरोपों की रेंजर आनंद कुमार कहते हैं कि उन्होंने जो भी आरोप लगाया है, वह सही है। वह बार-बार लिखित शिकायत विभाग की लेकिन विभाग ने नहीं सुनी। मजबूरन उन्हें शोसल साइट पर आना पड़ा। पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिये।

anandबहरहाल, वन विभाग के अंदर और बाहर के भ्रष्टाचार को लेकर रेंजर आनंद कुमार एक लंबे अरसे से मुखर रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर आमरण अनशन तक की है। लेकिन सरकार की सबसे टेढ़ी दूम वन विभाग के लुटेरे कभी सीधे होते दिखते ही नहीं।

इधर सबको लगा था कि भाजपा की नवेली रघुबर सरकार में आनंद कुमार सरीखों को अच्छे दिन दिखने के आसार लगे, लेकिन इस सरकार में भी भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद है।

शायद अन्य सरकारों की भांति रघुबर सरकार के नुमाइंदें भी उसी कुतर्क में यकीन रखते हैं कि सराकार की छवि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं बल्कि कर्मण्य लोगों की आवाज दबाने से ही सुधरती है। .….मुकेश भारतीय

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