मीडिया की विश्वसनीयता पर स्वाभाविक संकट

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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के परिसर में  नई एवं पुरानी पीढियों का संगम देखने को मिला। विश्वविद्यालय की स्थापना काल से अब तक अध्ययन कर चुके विद्यार्थी एवं वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मिलन एवं अनुभव साझा करने के इस समारोह में पूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थी, सेवारत एवं सेवानिवृत्त शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं पूर्व कुलपतियों ने एक साथ मुलाकात की और बीते दिनों को याद किया। तथा भविष्य की पत्रकारिता के दशा और दिशा पर चिंतन किया।

पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एकदिवसीय पूर्व विद्यार्थी मिलन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव आमंत्रित थे। पूर्व कुलपति एवं वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र, राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी, सांसद उदयप्रताप सिंह, विधायक विश्वास सारंग तथा विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो. बी.के.कुठियाला ने इस समारोह में अपने विचार व्यक्त किये। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को मीडिया जगत की चुनौतियों के बारे में बताया साथ ही इन चुनौतियों से निपटने के कुछ सूत्र भी बताये।

श्री राहुल देव ने कहा कि मीडिया पर विश्वसनीयता का संकट हमेशा रहा है और इस पर मंथन होना स्वाभाविक भी है। डिजिटल मीडिया ने प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के समक्ष नई चुनौतियाँ पेश की हैं। हम आज नये मीडिया के अकल्पनीय विस्तार की ओर बढ़ रहे हैं अतः इससे पैदा होने वाली चुनौतियों के लिए हमें तैयार रहना चाहिए।

श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय के बढ़ते विस्तार को देखकर बहुत खुशी होती है। विश्वविद्यालय मीडिया की दशा और दिशा पर चिंतन करते हुए शोध कार्य करे। यहाँ संचालित पाठ्यक्रमों में ऐसा प्रयास हो कि अकादमिक पक्ष, पेशे की आवश्यकता के अनुरूप हो।

विश्वविद्यालय के प्रथम महानिदेशक प्रो. राधेश्याम शर्मा ने पुराने विद्यार्थियों को संघर्ष के दिनों के साथी कहते हुए संबोधित किया और विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े हुए तथ्यों से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय रूपी छोटा सा पौधा आज एक बड़े बगीचे में परिवर्तित हो गया है जिसे देखकर बड़ी खुशी होती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में विवेक की बड़ी आवश्यकता होती है। यहाँ से निकले विद्यार्थियों को विवेकवान बनकर पत्रकारिता करनी है। उन्होंने कहा कि मीडिया को चौथा स्तंभ या फोर्थ स्टेट कहा जाता है। नई पीढ़ी को यह प्रयास करना होगा कि फोर्थ स्टेट, रियल स्टेट में न बदले।

प्रो. रामशरण जोशी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय से निकले छात्र आज देश-दुनिया में मीडिया संस्थाओं पर उच्च पदों पर कार्य कर रहे हैं। मूल्यों के संरक्षण एवं बाजार के दबाव के बीच बेहतर कार्य करने की चुनौती आज की युवा पीढ़ी के सामने है और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

विधायक विश्वास सारंग ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना अतुलनीय योगदान दिया है और भविष्य में निकले विद्यार्थी पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान देकर विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे। सांसद एवं विश्वविद्यालय महापरिषद के सदस्य श्री उदयप्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे पत्रकार तैयार करे जो अपनी व्यावसायिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन एक साथ कर सके।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विश्वविद्यालय के विस्तार के बारे में जानकारी दी और बताया कि विश्वविद्यालय का विस्तार प्रबंधन, न्यू मीडिया एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुआ है। संपे्रषण कौशल एवं टेक्नोलॉजी का बेहतर तालमेल भविष्य की मीडिया की आवश्यकता होगी और विश्वविद्यालय इस दिशा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को तैयार कर रहा है।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में विश्वविद्यालय के स्थापना से अब तक अध्ययन कर चुके पूर्व विद्यार्थियों ने भी अपने विचार रखे। पूर्व विद्यार्थियों के सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री विजयमनोहर तिवारी ने किया। इस सत्र में श्री अजय उपाध्याय, श्री सतीश ऐलिया, श्री मनोज मनु, श्री अनुज खरे के अतिरिक्त अनेक विद्यार्थियों ने अपने विचार रखे और अपने अनुभवों को साझा किया। विद्यार्थियों ने पूर्व विद्यार्थियों के स्वागत में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों में अपने पूर्व विद्यार्थियों के स्वागत के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियाँ की थीं।

विभागीय स्तर पर विद्यार्थियों के मिलन का एक सत्र संपन्न हुआ जिसमें पत्रकारिता, जनसंचार, इलेक्ट्रानिक मीडिया, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, प्रबंधन एवं कम्प्यूटर विभाग के विद्यार्थी आपस में मिले और अपने अनुभव साझा किये। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की तीन पुस्तकों का विमोचन हुआ। श्री रविशंकर द्वारा लिखित पुस्तक ‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता’ एवं विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका ‘मीडिया मीमांसा’ का विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं वरिष्ठ पत्रकार स्व. वेदव्रत गिरि पर लिखित पुस्तक ‘एक था वेद’ का विमोचन भी किया गया।  इस आयोजन के दौरान यह तय किया गया कि प्रतिवर्ष इस तरह के पूर्व छात्र समागम का आयोजन किया जाएगा।

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