मीडिया के चतुर सयानों की सूचना को अब राज़नामा नहीं लेगी संज्ञान

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इस साइट पर “वरिष्ठ संपादक हरिनारायण जी ने यूं उकेरी उषा मार्टिन एकेडमी के छात्र की पीड़ा  ”  शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की थी। उस खबर पर रांची के एक पत्रकार ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर हरिनारायण जी बताईये,  दैनिक आजाद सिपाही में क्यों नहीं छापी अपनी फेसबुक पीड़ा ? नामक ई-मेल की थी। लेकिन हम इस खबर को निम्न अपी के साथ हटा रहे हैं……..

raznama NEWSहरिनारायण जी बताईये,  दैनिक आजाद सिपाही में क्यों नहीं छापी अपनी फेसबुक पीड़ा ?  शीर्षक से जुड़े समाचार को साइट से हटा दिया गया है क्योंकि, उसे एक ऐसी ई-मेल द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर प्रसारित की गई थी, जिसमें सूचक ने अपना नाम और ईमेल पता गोपनीय रखने को कहा था। राजनामा.कॉम की पहले यह नीति रही थी कि हम सूचक के नाम और पता को गोपनीय रखेगें। लेकिन हमने देखा कि लोग इस नीति की आड़ में स्वार्थी लोग अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। खासकर मीडिया से जुड़े चतुर सयान लोग।

सबसे बड़ी बात कि सूचक लोग, खासकर मीडिया से जुड़े लोग राजनामा की नीति का जम कर दुरुपयोग कर रहे हैं। हमें किसा भय नहीं है। किसी भी व्यक्ति या संस्था चाहे वह कितने भी रसुखदार क्यों न हो, हम उसकी सच उघेड़ने का जिगर रखते हैं। लेकिन कायरों की सूचना की प्रश्रय नहीं दे सकते। कितनी बड़ी मक्कारी है कि जिस संस्थान में वे काम करते हैं, उसकी पोल राजनामा जैसी साईटों पर खुलती देखना चाहते हैं। परन्तु नामर्द बन कर। खुद को छुपा कर। वेशक ऐसे कायरों की सही गलत किसी भी तरह की  बातों को तरजीह देना मानसिक विक्षिप्ता को बढ़ाबा देना है।

उपरोक्त शीर्षक से प्रकाशित खबर में सूचना प्रेषक के मेल से हुबहु रखा गया था। उसमें जो सबाल निहित था, उसे शीर्षक में बरकरार रखा गया है। लेकिन हम तत्काल प्रभाव से उसके भीतर के सभी अंशो को हटा रहे हैं। वह भी इस नीति के साथ कि राजनामा  भविष्य में ऐसी कोई भी सूचना प्रकाशित नहीं करेगी , जिसमेंं सूचक खुद को गोपनीय रखने की शर्त रखता हो। अपनी जुगाली दूसरे की मुख से करने की शतरंज खेलता हो।

संबंधित खबर एक मीडिया हाउस से जुड़े संस्था को लेकर एक फेसबुक पोस्ट पर आधारित थी। शोसल साइट की बातों को सब प्राथमिकता दे रहे हैं। हमने भी दिया।  लेकिन उसे लेकर जो सबाल उठा, उसे भी गलत नहीं कहा जा सकता। लेकिन उठाने की मंशा स्वस्थ मानसिकता के परिचायक नहीं थे। अगर सूचक अपने नाम पता को सार्वजनिक करने को तैयार रहता तो मुझे उस खबर की जगह इतना लंबा-चौड़ा लिखने की जरुरत नहीं होती। हम अड़ जाते। भिड़ जाते। लेकिन एक पत्रकार ही किसी अखबार को लेकर अपना नाम सामने न लाये तो हम ऐसे छक्कों का समर्थन या बचाव किसी भी हाल मेंं नहीं कर सकते।

…………मुकेश भारतीय,प्रधान संपादक, राजनामा.कॉम।  

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