मामला डीएमसीएच दरभंगा काः अंधे क्यों बने हैं पुलिस वाले ?

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dmch (1)सारे पुलिस और प्रशासनिक महकमे के मौजूदगी, फिर भी अज्ञात के ही विरुद्ध प्राथमिकी !

शुक्रवार को डीएमसीएच दरभंगा के डॉक्टरों द्वारा एक सिपाही की मौत के मामले मे किया गया हंगामा और थाने से 100 से अधिक की संख्या मे जाकर पुलिस वालो से झड़प करके सिपाही की लाश को उठा कर ले आने के मामले से सभी अवगत हैं।

शनिवार को अंत मे उलटे प्रशासन को ही झुकना पड़ा और एएसपी, एसडीओ, डीएम जैसे वरीय पदाधिकारियों को हस्तक्षेप करा कर मामला शांत कराना पड़ा।

फिर मामला घटित हुआ तो कुछ ना कुछ कारवाई दिखावे के लिए भी होना ही चाहिए। तो लीजिये वरीय पुलिस अधिकारी के निर्देशानुसार बेंता ओपी के एसएचओ ने अज्ञात लोगो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवा कर खानापूर्ति कर दी।

 स्थानीय पुलिस, थाना, प्रशासन के सारे लोगो ने मिल कर भी दिन रात डीएमसीएच मे रहने वाले किसी एक डॉक्टर को भी नही पहचाना। वैसे डीएमसीएच के इन डॉक्टरों की आए दिन की गुंडागर्दी एवं इनके उनके रसूख के बल पर आज तक कारवाई ना होने की बात से सभी परिचित हैं।

इनके रहते किसी और की “गुंडागर्दी कैसे चलेगी !

dmch (2)एक तस्वीर सामने आई डीएमसीएच के डॉक्टरों की। बिहार का प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के प्रतिष्ठित डॉक्टर।  इनके हाथो मे एक पट्टी दिखी “गुंडागर्दी नही चलेगी”। सहसा वाक्य के अधूरेपन का एहसास हुआ। पूरा शायद इस प्रकार किया जा सकता है – “हमारे रहते किसी और की गुंडागर्दी नही चलेगी”।

आज पुलिस, प्रशासन, आम नागरिक, मरीजों के बीच इनकी छवि एक सभ्य डॉक्टर की नही बल्कि रंगदारों जैसी बनती जा रही है।

 कभी हॉस्टल मे रहने वाले स्थानीय दुकानदारों द्वारा फ्री मे या उधार मे सामान देने से मना कर देने पर उनके दुकान को तोड़ देना, आए दिन अगल बगल के मुहल्लों मे समूह बना कर मार पीट के लिए घूस जाना, किसी मरीज के परिजन द्वारा मनमानी का विरोध करने पर लात जूतों से उनकी पिटाई कर देना, इत्यादि आम बातें हैं।

 हाल ही में एक पुलिस वाले की मौत पे कुछ पुलिस वालो से बक झक हो जाने पर 100 से अधिक लोगो का ग्रुप बना कर थाना पर हमला करके पुलिस वालों को मार पीट कर लाश को जबरन उठा कर ले आना थाने से, इनकी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।

सालों से चली आ रही इनके गुंडागर्दी पर प्रशासन को ही झुकना पड़ता है और आज तक इस पर कोई ठोस कारवाई नही हुई है।

 प्रशासन के मजबूर हो जाने के पीछे जो भी कारण हो, इसका परिणाम यह हुआ है कि आमजनो मे इनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत भी ख़त्म हो चुकी है।

दरभंगा के नए एएसपी कुमार आशीष के कारनामों को सुनकर उनका ध्यान यदि इधर दिलाया जाये तो शायद कुछ उम्मीद की जा सकती है।

पर विडंबना यह है कि इस बात की संभावना प्रबल हो जाती है कि यदि कोई अधिकारी इनपर कारवाई करने की कोशिश भी करेंगे तो इनके द्वारा कोई आडंबर खड़ा कर दिया जायेगा और अधिकारी के ऊपर दवाब ला दिया जायेगा। यहाँ आमजनता के सहयोग से प्रशासन को इनको सुधारने की जरूरत है।

….. जर्नलिस्ट इरा के फेसबुक वाल से साभार

 

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2 comments

  1. Aisi harkat ek chikitsa shastra ke vidyarthiyon ko kadachit shobha nahi deta.
    Ve log na to bachhe hai ,na hi kishore aur na hi praudh , unme sohne aur samajhne ki puri kshamta hai aur ve kanoon ko achhi trah samajhte hai. Inke harkaton par prasashan ko inlogon ko press photo ke adhar par chun chun kar inke viruddh dandatmak prakriya apn na chahiye. Kanoon se bada koi nahi hota.

  2. Ye chikitsa shastra ke vidyarthi ko na to bachha,na to kishore aur na hi praudh kah sakte hai. Inhe kanoon ki jankari hoti hi hai. Agar inhone galat kiya hai,to kanoon sammat saza mikni hi chahiye.

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