सच्चाई कुछ…छापा-दिखाया कुछ

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तुझे मान गये भाई। तू है असली झारखंडी मीडिया का एक ऐसा बड़ा वर्ग, जिसके चश्में के गर्द साफ करने की कला राजनामा डॉट कॉम  में नहीं है। तू  कुछ भी छाप-दिखा सकते हो। आखिर वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तेरी जागीर जो ठहरी। भला तू भाई लोग राजनामा डॉट कॉम को ये आजादी क्यों दोगे ! ऐसी भी बात नहीं है कि तू सब राजनामा डॉट कॉम या उसके संचालक-संपादक मुकेश भारतीय को नहीं जानते हो। सब जानते हो। लेकिन,सबाल है कि तू लोग एक बड़े समाचार पत्र को छोड़ मेरा साथ क्यों दोगे। वह भी व्यूरोकेट्स और कॉरपोरेटस् मीडिया की विस्तर पर  गहरी नींद में सोई राजनीतिक सत्ता के दौर में। तू सब  भले ही बड़े तीसमार खां संपादक-पत्रकार हो लेकिन, क्या यह कहना गलत है कि तू भाई  लोग किसी को आयना भी नहीं दिखा सकते और नहीं किसी को दिखाने ही दे सकते हो। फिर क्या करुं। आदत से मजबूर हूं। चलो कम से कम ये आयने तो देख लो ताकि पता चल सके कि कौन कहां खड़ा है…………. मामला कुछ…सच्चाई कुछ…छापा-दिखाया कुछ…यह तेरी कैसी पत्रकारिता 🙂

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