बगावत नहीं, धोखा है मांझी के कारनामें :नीतिश कुमार

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बिहार में कुछ दिनों पहले आई राजनीतिक सुनामी का असर जारी है। सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दोनों कद्दावर नेता मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक-दूसरे पर निशाना साधने में लगे हुए हैं।

nitishनीतीश ने  मांझी के बारे में कहा है कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, वह बगावत नहीं बल्कि धोखा है। मांझीजी को सत्ता सौंपे जाते समय साफ बताया गया था कि काम-काज का रोडमैप तैयार है। ठीक ढंग से सरकार चलाते हुए इसे आगे बढ़ाइए, लेकिन वे रोडमैप के अनुसार काम-काज को आगे बढ़ाने के बजाय अलग प्रकार की वैकल्पिक सरकार की तरह काम करने लगे।

इससे सुशासन की धज्जियां उडऩे लगीं और लोग परेशान होकर हम लोगों से शिकायत करने लगे। नीतीश ने कठपुतली सरकार चलाने की कोशिश संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका सरकार से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने तो मांझी को सत्ता सौंप दी थी।

वे ही अपनी मर्जी की करते गए और कहते रहे कि उनका मौन समर्थन प्राप्त है। मैं तो दो तरफा मार झेल रहा था। जनता भी दुखी थी और भाजपा भी कोस रही थी। संपर्क यात्राओं और कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविरों में जो फीडबैक मुझे मिला, उससे पार्टी ऐसा फैसला करने पर मजबूर हुई।

इससे पहले कई बार मांझी को समझाने की कोशिशें हुई, मगर कोई सुधार नहीं हुआ। मांझीजी को सत्ता सौंपने के अपने फैसले पर नीतीश ने कहा कि वह एक भावनात्मक फैसला था।

लोकसभा के चुनाव में जब आशानुरूप वोट नहीं मिले तो मुझे लगा कि लोगों के बीच काम करना और उनका विश्वास हासिल करना चाहिए, मगर जिस प्रकार पूरे प्रदेश में किसी ने भी इसे सही नहीं कहा और मांझी के काम-काज का विरोध किया तो लगा कि मुझे अपना फैसला सुधारना चाहिए। लोकतंत्र और जीवन में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है।

राज्यपाल द्वारा उन्हें सत्ता के लिए उतावला कहे जाने के सवाल पर नीतीश ने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो यह अनुचित होने के साथ संवैधानिक पद की मर्यादा के अनुरूप भी नहीं है। हरेक को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।

nitish_kumarनौ फरवरी को मुलाकात के दौरान राज्यपाल हम लोगों की इस दलील से सहमत दिखे कि आगामी 20 तारीख से आहूत बिहार विधानसभा के बजट सत्र में पहले दिन वे किसका अभिभाषण पढ़ेंगे और बाद में कौनसी सरकार बजट पेश करेगी। लेकिन जब उन्होंने आदेश जारी किया तो यह उनके पूर्व के रुख से भिन्न था। इससे न केवल खरीद-फरोख्त को बढ़ावा मिलेगा बल्कि वे सवाल भी अनुत्तरित रह जाएंगे जो हम लोगों ने पहले व्यक्त किए थे।

मांझी के बिहार विधानसभा में आगामी 20 फरवरी को विश्वास मत हासिल करने के लिए गुप्त मतदान के राज्यपाल द्वारा दिए गए विकल्प के बारे में नीतीश ने कहा कि दल-बदल कानून के बाद यह हो ही नहीं सकता।

नीतीश ने सवाल उठाया कि क्या कोई लोकप्रिय सरकार गुप्त मतदान से चुनी जाएगी। उसके पास नैतिक और राजनीतिक बल होगा। इसलिए सदन में खुले मतदान से ही नेता का चुनाव होना चाहिए। मांझी द्वारा इस्तीफा नहीं दिए जाने पर पार्टी ने उन्हें निकाला है।

नीतीश ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की ऐतिहासिक जीत को भाजपा के कथित अलगाववाद, झूठे वादों और अहंकार की हार बताया और आप को नई किस्म की पार्टी बताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी।

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