‘महापाप’ की रिपोर्टिंग से रोक हटाएं मी लार्ड :एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

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एडिटर्स गिल्ड ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह और न्यायमूर्ति रवि रंजन के 23 अगस्त के मौखिक आदेश पर गौर किया जिसमें कहा गया था कि जब तक आश्रय गृह मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती है, तब तक सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर मामले के संबंध में और खासतौर पर पहले ही शुरू हो चुकी जांच या आगे होने वाली जांच के बारे में रिपोर्टिंग करने पर रोक लगाई जाती है….”

राजनामा.कॉम। भारतीय संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने हाईकोर्ट के द्वारा मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के आदेश पर चिंता जताते हुए रोक हटाने की अपील की है। एडिटर्स गिल्ड ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश से फैसले की समीक्षा करने की अपील की।

बिहार के बहुचर्चित ‘मुजफ्फरपुर महापाप’ घटना की जांच की खबर को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक दिशा निर्देश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को जारी किया है।जिसमें आदेश दिया गया है कि मुजफ्फरपुर घटना से संबंधित जांच की खबरें मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित न की जाए।

हाईकोर्ट के इस फैसले पर चिंता जताते हुए ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ एक बयान जारी कर कहा है कि जन महत्व के मामले की रिपोर्टिंग पर इस तरह का रोक लगाना ठीक नहीं है। यह मीडिया और समाज के प्रतिकूल होगा।

साथ ही गिल्ड ने मीडिया पर इस तरह का रोक लगाने की अदालतों की बढ़ती हालिया प्रवृत्ति की निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के स्तंभों में से एक को कमजोर करता है।

बयान में कहा गया है कि गिल्ड इस बात से परेशान है कि मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करने की बजाय कोर्ट ने ऐसा आदेश जारी किया है, जो इसपर अंकुश लगाता है।

गिल्ड ने भारत के चीफ जस्टिस और पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रोक लगाने वाले आदेश की समीक्षा करने और स्वतंत्र मीडिया एवं लोकतंत्र के सिद्धांतों को बरकरार रखने की मांग की है।

पीठ ने दावा किया था कि रिपोर्टिंग से मामले की जांच गंभीर रूप से बाधित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी पटना हाईकोर्ट के आदेश को गैर संवैधानिक करार देते हुए इसकी आलोचना की।

प्रशांत भूषण ने कहा कि पटना हाईकोर्ट का आदेश फ्रीडम ऑफ स्पीच के खिलाफ है। उन्होंने इसे प्रेस की आजादी के खिलाफ बताया।

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