मनरेगा में भ्रष्टाचार के तमाचे का यूं हुआ समझौता

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मुकेश भारतीय

रांची। केन्द्र सरकार की गरीबी उन्मुलन के साथ विकास भरी महात्वाकांक्षी योजना मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार को ओरमांझी प्रखंड मुख्यालय भवन में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी विद्या मुंडा के ग्राम रोजगार सेवक के गाल पर रशीद एक करारा तमाचे ने सुर्खियों में ला दिया था। उस मामले को प्रखंड विकास पदाधिकारी रजनीश कुमार ने एक समझौते के तहत ढंकने का प्रयास किया है।

बीडीओ का था आदेशः

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने अपने कार्यालय पत्रांकः 455(ii), दिनांकः 16.05.2016 के जरिये प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी विद्या मुंडा, पंचायत सेवक सामुएल नाग एवं ग्राम रोजगार सेवक तौहिद आलम के नाम यह आपात आदेश जारी किया था कि प्रखंड के कुटे में मनरेगा के अन्तर्गत कब्रिस्तान से मसुउद्दीन अंसारी के घर होते हुए तौफिक अंसारी के के घर तक ब्रिक्स खरंजा पथ निर्माण योजना में प्राक्कलन राशि 2,17,500 रुपये, जिसमें सामग्री राशि में 1,45,000 रुपये एवं 72,500 की स्वीकृति थी, लेकिन सामग्री मद में 2,20,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जो प्राक्कलन राशि से 75.000 रुपये अधिक है। अतः तीनों को य़ह आदेश दिया जाता है कि 24 घंटों के भीतर मनरेगा के शून्य खाता में जमा करना सुनिश्चित करें, अन्यथा प्राथमिकी दर्ज कर दी जाएगी। जो कि 20 जून को चार दिन बाद भी नहीं हो पाया है।

आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं:

इस नोटिश के बाद प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी ने अनियमियता व गबन की सारी राशि ग्राम रोजगार सेवक को जमा करने का दबाव डाला। जब उसने इंकार किया तो जोरदार तमाचा जड़ दी। इसके बाद सारा माला सुर्खियों में आ गया। भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल में प्रखंड विकास पदाधिकारी भी साफ नजर आए।

बचने-बचाने का हुआ सुलहनामाः

पुष्ट सूचना है कि भ्रष्टाचार के तमाचे से उपजे सबाल को दबाने की मंशा से प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा अपने आदेश के विपरित प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, पंचायत सेवक और रोजगार सेवक के बीच एक लिखित सुलहनामा करवाया है। इस सुलहनामे के अनुसार तीनों तत्काल 25-25 हजार रुपये बीडीओ के एकाउंट में जमा करेगें। और बाद में कार्य पूरा होने के उपरांत मजदूर मद की राशि निकाल कर तीनों आपस में बांट लेगें।

कहते हैं कि रोजगार सेवक सेवक, पंचायत सेवक और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी ने चेक द्वारा बीडियो के एकाउंट के नाम सौंप भी दिया है।

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