मइया खर जितिया कइले हलो बप्पा, बच गइलियो

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gaya sex scandle…..ये अल्फ़ाज है गया नगर निगम के एक पार्षद के जो उप मेयर के साथ अक्सर पटना जाते रहते है और शराब –शबाब की महफ़िल मे हमेशा मौजूद रहते है ।

उप मेयर मोहन श्रीवास्तव को दिनांक 6 जनवरी को पटना के होटल मरवाडी निवास से लडकियो के साथ आपतिजनक अवस्था मे पटना पुलिस ने गिरफ़तार किया । उसके साथ जितेन्द्र वर्मा, विनोद मंडल वार्ड पार्षद एवं एक महिला वार्ड पार्षद अंजू शर्मा के पति जो कुख्यात माने जाते है तथा जनता कालेज के प्रिंसिपल बैजनाथ सिंह की हत्या के अभियुक्त है ,अजय शर्मा उर्फ़ मामू को भी पुलिस ने गिरफ़तार किया ।

इन सबके उपर दो नाबालिग लडकियो का अपहरण कर के बलात्कार करने और देह व्यवसाय करवाने का आरोप है। लडकियो ने धारा 164 के तहत बयान भी दिया है और इन्हे अपराध का दोषी ठहराया है।

7 जनवरी को सुनामी तूफ़ान की तरह इस समाचार ने गया एवं पटना को अपनी चपेट मे ले लिया। मोहन श्रीवास्तव ब्ल्यू फ़िल्म बनाकर ब्लैकमेल करता था यह तो सबको पता था इसलिये इसकी गिरफ़तारी से सारे लोग सकते मे आ गये , क्या पता किस किस की फ़िल्म बरामद हुई है।

मोबाईल मे 80 से ज्यादा विडियो क्लीप की बात समाचार मे उभर कर आ रही थी। मोबाईल की काल ट्यून बजने लगी , मोहन श्रीवास्तव के ढेर सारे नंबर है लेकिन उन नंबरो पर काल करने की हिम्मत कोई नही कर रहा था , हां नेता, अधिकारी एवं पार्षदगण एक दूसरे से फोन कर के हकिकत जानना चाहते थे। सभी का फ़ोन कल्लू के मोबाईल पर जा रहा था क्योंकि कल्लू गिरफ़तार नही हुआ था और मोहन का सबसे नजदीकी वही था। । कल्लू को सब पता चल चुका था, थाने की हाजत से हीं जुगाड बैठाकर दो आदमियो को फ़ोन करवाया था मोहन श्रीवास्तव ने ।

एक कल्लू वार्ड पार्षद एवं दुसरा एक महिला पार्षद के पति एवं मोहन श्रीवास्तव का व्यवसायिक पार्टनर अनिल शर्मा को। कल्लू को जब एक पार्षद ने फ़ोन किया तो उसका जवाब था, “”””मइया खर जितिया कइले हलो बप्पा , बच गइलियो””””””””””””””” । मोहन का एक इनर ग्रूप था । मोहन श्रीवास्तव की जो चौकडी थी उसमे छह सात पार्षद हीं इनर ग्रूप के माने जाते थे।

कल्लू, विनोद मंडल, जितेन्द्र वर्मा, ग्यानू, उपेन्द्र, सुधीर, कमांडर। इनमे से कमांडर के अलावा बाकी सबको लडकी और शराब का नशा था , बिना उसके एक दिन रहना मुश्किल। मोहन श्रीवास्तव के घर पर शाम को बैठकी लगती थी , शराब का दौर चलता था और कभी कभी मसाज पार्लर की एकाध लडकी भी वहां शाकी के रुप मे उपलब्ध रहती थी। जो लोग मनीषा श्रीवास्तव को निर्दोष बता रहे है उन्हे नही पता कि मोहन का पुरा परिवार हीं इस धंधे मे शामिल था, मोहन का भाई विशवनाथ अखोरी , भतीजा अमित , पत्नी मनीषा । जहां पूरा परिवार इस तरह का गंदा काम करेगा वहां बच्चे कैसे अच्छे हो सकते है। मोहन का दस साल का बेटा भी गाली देकर बात करता है यह सबको पता है। यह संस्कार है उस परिवार का।

अब क्या होगा ध……………….. जी ; यह पहला शब्द फ़ोन पर निकला पटना मे पदस्थापित एक अधिकारी की जुबान से जब मोहन के पकडाने के बाद उन्होने गया मे अपने एक नजदीकी पार्षद को फ़ोन किया।

ये अधिकारी पहले गया नगर निगम मे नगर आयुक्त के पद पर थे इन्होने जमकर लूटा नगर निगम को । मोहन श्रीवास्तव के तार उपर तक जूडे हुये थे , नगर विकास विभाग मे अति उच्च पद पर आसिन एक पदाधिकारी जो मोहन श्रीवास्तव के बहुत करीबी थे उनके माध्यम से मोहन श्रीवास्तव गया की मेयर को हटाकर खुद मेयर का पदभार ग्रहण करना चाहता था और वे अधिकारी मोहन श्रीवास्तव के लिये कुछ भी करने को तैयार रहते थे। उनके कई विवादास्पद आदेश की आड मे करोडो का वारा न्यारा हुआ ।

उक्त नगर आयुक्त भी अपने उच्चाधिकारी की शह एवं पैसा तथा खुबसुरत लडकियो के कारण वह सबकुछ करते थे जो मोहन कहता था। ब्लू फ़िल्म तैयार होने के बाद तो वह मोहन के आदेशपाल की तरह काम करने लगे। किस्मत अच्छी थी तबादला हो गया लेकिन पटना मे पडे छापे के बाद उनकी धडकन बढ गई है । रोज फ़ोन पर एक हीं सवाल अब क्या होगा। जिस पार्षद से उन्होने यह सवाल किया था, उसने सबकुछ जानते हुये भी मात्र आनंद लेने के लिये पुछा , आपका भी कुछ था क्या सर ?

न न हम इ सब नही करते थे, लेकिन उसको तो आपजानते है न का पता जोड जाड के भी तो फ़िल्म तैयार हो जाता है न ध……………. जी । बेचारे अधिकारी क्या बताये , क्या छुपायें। एक दुसरे अधिकारी जो दिसंबर मे रिटायर्ड हुये है, वे बहुत घबडाये हुये नही थे क्योंकि उनका काम गया पुलिस के आला अधिकारियो ने कर दिया था और स्वर्गलोग से पकडी गई लडकियो को बिना न्यायालय मे प्रस्तुत किये मोहन श्रीवास्तव के सुपुर्द कर दिया था, परन्तु वे भी बार बार फ़ोन कर के यह जानना चाह रहे थे कि कंहीं उन लडकियो को तो पुन: न्यायालय मे नही प्रस्तुत किया जायेगा और इसके लिये वे अपने एक रिश्तेदार जो सरकारी अपर लोक अभियोजक है उनसे फ़ोन से संपर्क मे थें।

यह गाथा बहुत लंबी है , तार एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री से भी जूडे है जो महाराष्ट्र के है और उनका कार्यालय जब वे मंत्री थे , मोहन श्रीवास्तव के लिये काम करता था। यह गाथा फ़िर कभी ।

तस्वीर मे एक लडकी का चेहरा साफ़ दिख रहा है , क्या गया पुलिस बतायेगी कि यही लडकी बरामद हुई थी? लडकी का नाम या चेहरा प्रकाशित करना गलत है, कानूनन अपराध है परन्तु या तो वह लडकी जिसका चेहरा फ़ोटो मे है वह मुकदमा कर सकती है या पुलिस ।

पुलिस को पहले यह साक्ष्य लाना होगा कि फ़ोटो जिस लडकी का है वही बरामद हुई थी और इसके लिये लडकी को न्यायालय मे प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा और यही मैं चाहता हूं एस एस पी निशांत तिवारी कि लडकिया न्यायालय मे प्रस्तुत हो जो अब तुम्हारे बस मे नही है ।

………वरिष्ठ अधिवक्ता मदन तिवारी अपने फेसबुक वाल पर

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