भ्रष्टाचार को लेकर दोहरा मापदंड अपना रही है झारखंड की रघुबर सरकार

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झारखंड प्रदेश की भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के प्रति कितनी गंभीर है और उसके इरादे कितने साफ हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस अधिकारी पर विभागीय मंत्री ने भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए, उसके खिलाफ रिश्वत लेते हुए वीडियो फुटेज की बात कही….

और तो और उसपर हामी भरते हुए सीएम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ पहला कदम उठाने का दंभ भरते हुए पद से हटा दिया, उस अधिकारी पर कोई भी जांच कार्रवाई किए बिना प्रमोशन दे दिया गया।

पता चला है कि कई काले कारनामों के बल करोड़पति बने अधिकारी अब संयुक्त सचिव स्तर के पद पर विराजमान हो गए हैं। जाहिर है कि यह सब मंत्री-सीएम की कृपा के वगैर संभव नहीं है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं रांची नगर निगम के सीइओ एवं आवास बोर्ड के निदेशक पद से भ्रष्टाचारी साबित होने के बाद हटाए गए आइएएस मनोज कुमार की।  रांची के विधायक एवं नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने तब कहा था कि मनोज कुमार के भ्रष्टाचार का वीडियो फुटेज उनके पास है।

रघुबर दास ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत कहा था। लेकिन, कार्रवाई स्वरुप मनोज कुमार का सिर्फ विभागीय स्थानांतरण किया गया। इधर उन्हें संयुक्त सचिव स्तर का सम्मान मिला है। जाहिर है कि यहां हर स्तर पर मैनेज हो गया होगा। नहीं तो क्या भ्रष्टाचार के वीडियो फुटेज होने के बाबजूद कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

यह सब जानते हैं कि रांची नगर निगम में नक्शा पास करने के नाम पर पैसों का खुला खेल चल रहा था। नक्शा पास करने के लिए हर चरण पर पैसों की वसूली की जाती थी।

सहायक अभियंता सुशील कुमार निगम के सीइओ और टाउन प्लानर घनश्याम अग्रवाल के लिए वसूली करते थे। इसके लिए लोगों का भयादोहन करते थे। इससे संबंधित एक वीडियो फुटेज भी होने की बात सार्वजनिक हुई।

इस वीडियो में टाउन प्लानर घनश्याम अग्रवाल, उनका करीबी व आरआरडीए का कंप्यूटर ऑपरेटर अजीत कुमार, सहायक अभियंता सुशील कुमार और सहायक अभियंता सुरेंद्र कुमार के अलावा नक्शा पास कराने का ठेका लेनेवाले कई दलाल भी दिखायी देते हैं।  टाउन प्लानर और सहायक अभियंता बार-बार बताते हैं कि सीइओ को भी घूस की रकम में हिस्सा दिया जाना है।  

नगर निगम में पैसों के खेल का यह वीडियो कांके रोड निवासी कमल अग्रवाल ने बनाया है। कमल को कांके रोड में आवासीय इस्तेमाल के लिए चार मंजिली इमारत बनानी है।  वह पिछले एक साल से नक्शा पास कराने के लिए नगर निगम का चक्कर लगा रहे थे। निगम के दफ्तर में अपनी फाइल खोज-खोज कर परेशान हो चुके कमल निगम के सीइओ मनोज कुमार के पास गये। अपनी बात बतायी। इस पर सीइओ ने उन्हें काफी बेइज्जत किया। विधायक, मेयर और डिप्टी मेयर की पैरवी से नाराज सीइओ ने कमल को घर तोड़वाने और जेल भेज देने तक की धमकी दी। इसके बाद कमल ने मामले का खुलासा करने के इरादे से वीडियो बनाने का फैसला लिया।

इस वीडियो में दिखाया गया है कि नक्शा पास करने के बदले उनसे 80 हजार रुपये घूस मांगे गये। कमल ने इसमें से दस हजार रुपये निगम के एइ सुशील कुमार को दिये। सुशील कुमार ने फील्ड विजिट कर रिपोर्ट तैयार की। उसके बाद सीइओ, टाउन प्लानर और अन्य खर्चो को बताते हुए 70 हजार रुपये और मांगने लगे। रुपये नहीं देने पर उनका नक्शा लटकाये रखा।

रांची नगर निगम में सीइओ मनोज कुमार ने 13 दिसंबर 2014 को इस पद पर योगदान दिया था। मनोज कुमार के योगदान देने के साथ ही उनके साथ रहनेवाले एक युवक तनवीर अली ने भी निगम में अपना अड्डा बनाया। तनवीर दिन भर निगम कार्यालय कार्यालय में बैठा रहता। अपने कार्यालय अवधि में सीइओ किससे मिलेंगे, यह तय भी तनवीर ही किया करता था।

नक्शे के भले सैकड़ों फाइल सीइओ के पास लंबित हों, परंतु सीइओ किस फाइल पर हस्ताक्षर करेंगे, यह तय भी तनवीर ही करता था। शाम को सीइओ जब घर जाते, तो तनवीर ही यह तय करता था कि किन फाइलों को सीइओ के घर लेकर जाना है।

सीइओ के एक साल के कार्यकाल के दौरान तनवीर निगम के अभियंताओं, कर्मचारियों को इस तरह से निर्देश देता, जैसे की वह खुद बड़ा अधिकारी हो।

और तो और,  55 वार्डो को नगर निगम के दो टाउन प्लानर गजानंद राम व घनश्याम अग्रवाल के बीच बांटा दिया गया। घनश्याम अग्रवाल को एक से 29 नंबर वार्ड तक के नक्शे पास करने का जिम्मा दिया गया है। ये वे वार्ड हैं, जहां ज्यादातर अमीर लोग रहते हैं।

बहरहाल, आइएएस मनोज कुमार शुरु से ही काफी विवादास्पद रहे हैं। जब उनकी तैनाती एसडीओ पद पर हुई थी, उसी वक्त से उन पर भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता के अनेक गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार के खिलाफ नगाड़ा बजा रहे भाजपा के सीएम रघुबर दास, मंत्री सीपी सिंह की असली मंशा आसानी से समझी जा सकती है ….. …..मुकेश भारतीय

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