भैया, मैं जरा बौद्धिक गरीब हूं

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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने अध्यक्ष संबोधन दिया, ये बेशक सटीक नहीं हो. लेकिन शब्द यह सम्मानजनक ही है. इसके लिये अगर हूटिंग हो, तो झारखंड की जनता महान है. उसे और खासकर भाजपाई हुजूम को इस हूटिंग पर गर्व करना ही चाहिये.

modi_munda_sorenलेकिन क्या, जो मंच संचालन की औपचारिकताएं होती हैं. सरकार का नवाचार, जी हां जिसे लोग सहजता के लिये प्रोटोकॉल कहते हैं, उसमें बकायदा इसका उल्लेख है कि मंच पर संचालन उद्देश्य के लिये एक अध्यक्ष होगा.

पंद्रह साल पहले तक मंच से इसकी उद्घोषणा भी होती थी. प्रेस रिलीज में इसे उद्धृत करते थे. और मुझे यह भी याद है कि संपादक पुछते थे कि संचालन करने वाले और अध्यक्षता करनेवाले के नाम छप रहे हैं न? वो कहते थे भले भाषण दो लाइन काट दो ये दोनों चीजें आनी ही चाहिये. और क्या चीजों को अपनी जिंदगी से जोड़ने का हक किसी खास दल और व्यक्ति को ही है?

क्या सीएम को पीएम के साथ केमिस्ट्री मिलाने के लिये किसी इजाजत की जरूरत है? या इस पर किसी का कॉपीराइट है कि केवल वही व्यक्ति अपनी लाचारी, परिवार की गरीबी और जातीय जाती बातों का प्रचार-प्रसार करे? दूसरे किसी को यह हक नहीं है?

भैया, मैं तो सीएम हेमंत सोरेन की अपनी मां के संघर्ष याद रखने और उसे सार्वजनिक मंच से स्वीकारने के लिये सैल्यूट करता हूं.

अब बात हूटिंग की करें. लोगों ने हूटिंग कर केवल सीएम हेमंत सोरेन का मानमर्दन नहीं किया. बल्कि, मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर भाई मोदी का भी मानमर्दन किया है.

मैं जिन संस्कारों में पला-बढ़ा-पढ़ा हूं, उसमें यही सीखा हूं कि जब कोई बात समूह में या समूह के सामने कही जाती है, तो वह व्यक्ति विशेष की नहीं रह जाती है. सामूहिक हो जाती है. मंच पर ओहदे के हिसाब से पीएम श्री मोदी जी सबसे बड़े ओहदेदार के नाते इस हूटिंग के सबसे बड़े ग्राहक थे. यह हूटिंग उन्हीं की की गई.

HUDDA_MODIजी हां. ग्राहक इसलिये भी क्योंकि कभी देश और समाज को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली भादपा किराये लोगों को लाकर हूटिंग कराती है. वह भी अनुशासन के सबसे बड़े पैरोकार और मैं मानता हूं वास्तविक अनुशासित पीएम के सामने ही. ये लोग देश को कहां ले जाना चाह रहे हैं? यह निराशाजनक और शर्मनाक भी है.

हूटिंग भाजपा ने ही जानबूझकर कराई है, उसके तर्क और प्रमाण भी हैं. ये कि प्रथानमंत्री रांची आ रहे हैं, तो स्कूलों में छुट्टी क्यों हो?

यदि देश के प्रधानमंत्री के स्वागत में या उन्हें छात्रों से मिलवाने के लिये छुट्टी दी गई, तो क्या छात्रों के साथ पीएम का इंटरैक्शन सेशन रखा गया था? नहीं ना? तो इसका सीधा मतलब है कि भीड़ जुटाने के लिये स्कूल बंदकर स्कूली बसों का इस्तेमाल किया गया.

भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम की गरिमा समाप्त कर दी.

इन लोगों ने कार्यक्रम को देश के पीएम के बदले भाजपा नेता का बना दिया. यहां तक कि झारखंड भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री रघुवर दास जी ने जो फेसबुक पर न्योता लिखा उसमें रांची या झारखंड की जनता से सामूहिक अपील न करके, भाजपा कार्यकर्ताओं-समर्थकों से अधिक से अधिक संख्या में आने की अपील की.

अब इसके बाद भी यदि हूटिंग नहीं होती, तो भाजपा का मीडिया मैनेजमेंट ही फेल हो जाता. लानत होती जुटाई भीड़ की. झारखंड भाजपा की भी लानत. मीडिया का कुफ्र अलग गिरता कि कुछ मसाला ही नहीं मिला. पीएम श्री मोदी के रहते भी.

पर, अंततः यह द्वेष की दुखद परंपरा हरियाणा के कैथल में भाजपा ने शुरू की. झारखंड भाजपा इसका ध्वज वाहक बनी. अब देशभर में ऐसा ही माहौल बनाने की कोशिश होगी. लेकिन खुदा न करे कि कहीं यह हिंसक संघर्ष में बदल जाये, तो क्या होगा? आखिरकार मरेगी तो जनता ही न?

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……….  पत्रकार राजेश राय अपने फेसबुक वाल पर

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