साजिश का हिस्सा है ‘केजरी-पुण्य वीडियो’ का वायरलीकरण

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kejriwal-aajtakपुण्य प्रसून बाजपेयी और अरविंद केजरीवाल के वीडियो को बेवजह तूल दिया जा रहा है…. यह भाजपा और कार्पोरेट मीडिया की मिलीजुली साजिश का हिस्सा है… चैनलों में जो डिबेट होते हैं, उसमें ब्रेक के दौरान जाने कौन कौन सी बातें होती हैं.. मुझे याद है… एक बार एक डिबेट के दौरान ब्रेक हुआ तो एक कांग्रेस परस्त कवि ने मुझसे कहा कि ”यशवंत जी, इतना काहे दौड़ाते हो… थोड़ा समझा करो.. कांग्रेस का नमक खाया है तो हलका फुलका उनके पक्ष में तर्क देने ही पड़ेंगे…”

व्यंग्य कविताएं सुनाने वाले उस कवि की यह बात सुन हम सभी हंस पड़े… लेकिन अगर वो बातचीत अगर रिकार्ड करके यूट्यूब पर डाल दिया जाता तो उन कवि महोदय का बैंड बज जाता… ऐसे ही हम सब आप निजी जीवन में ढेरों ऐसी बातें करते हैं जो संभवतः पब्लिक प्लेटफार्म पर नहीं कर सकते…. लखनऊ के पत्रकार संजय शर्मा जी ने सही लिखा है अपने वॉल पर कि नेताओं के इंटरव्यू के बाद जब चलने का दौर होता है तो अक्सर नेता और पत्रकार ऐसी ही बातें करते हैं जो केजरीवाल और पुण्य प्रसून बाजपेयी करते दिख रहे हैं वीडियो में…. कि ये वाला ज्यादा अच्छा कहा… वो वाला ज्यादा प्रामिनेंटली दिखाना चाहिए… आपका ये वोटबैंक है… आपका पार्टी लाइन के मुताबिक ये हिट जाएगा…

ये सब आपसी बातचीत है… ये जायज है…

नाजायज वो है जो मोदी ने किया था करण थापर के साथ… कैमरा बंद करवाकर कहने लगे कि आप तो मेरे दोस्त हैं, ऐसे सवाल क्यों पूछ रहे हैं… ये एक तरह से धमकी और प्रलोभन दोनों हुआ…

केजरीवाल ने पुण्य प्रसून बाजपेयी से ये तो नहीं कहा कि आप ये सवाल मत पूछो… वो सवाल मत पूछो… उन्होंने इंटरव्यू खत्म होने पर पूरे इंटरव्यू के परफारमेंस पर बात की… सफाई दी कि इस मसले पर कम क्यों बोला और उस मसले पर ज्यादा क्यों बोला.. पुण्य प्रसून का ये कहना भी कोई गलती नहीं कि इस हिस्से को दिखाने से आपको ज्यादा वाहवाही मिलेगी…

प्रेस कांफ्रेंसों, इंटरव्यूज आदि में नेताओं की बात सुनकर, उनकी हां में हां मिलाकर या उनके लड़ झगड़कर पत्रकार जब अपने आफिस लौटता है तो वही दिखाता लिखता है जो उसे उचित लगता है.. मैं यहां आजतक या पुण्य प्रसून बाजपेयी या अरविंद केजरीवाल का बचाव नहीं कर रहा… बस केवल इतना कह रहा कि यार इन्हें फंसाने के लिए कोई सालिड स्टिंग लाओ… ये बच्चों सा लालीपाप, झुनझुना लाकर किसे बेवकूफ बना रहे हो.. हां, कुछ कमजोर हृदय वालों / वालियों को झटका जरूर लग सकता है जो मानते हैं कि बड़े पत्रकारों, बड़े नेताओं को 24×7 लगातार परम आदर्श स्थिति में गदा लिए जड़वत मूर्तिवत मनुष्येतर बने रहना चाहिए…

अब जब कि न्यूज चैनलों ने भी पुण्य प्रसून और अरविंद केजरीवाल के वीडियो पर खेलना शुरू कर दिया है तो कहना पड़ेगा कि इस बार का लोकसभा चुनाव वाकई मीडिया के बल पर लड़ा जा रहा है और मीडिया के ही बल पर छवियां निर्मित व नष्ट की जा रही हैं.. एक तरफ परंपरागत मीडिया है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया… दोनों एक दूसरे पर तगड़ी नजर रखे हुए हैं और एक दूसरे का घृणावत प्रेम और प्रेमवत घृणा के द्वंद्वात्मक नजरिए से विश्लेषण किए पड़े हैं.. इसमें एक अच्छा पहलू भी है… आगे से किसी को यह घमंड नहीं होना चाहिए कि वो महान है इसलिए उसे विवाद कभी छू ही नहीं सकता.. अब महानता निरपेक्ष नहीं रही.. महानता भी सापेक्ष है…

ओम थानवी जी ने एक सच्ची बात कही है अपने वाल पर… आप हमेशा निष्पक्ष नहीं रह सकते… जब चीजें बिगड़ रही हों तो आपको उन लोगों को सपोर्ट करना चाहिए जो बनाने की तरफ अग्रसर हों… मैं खुलकर कहूंगा कि अगर पुण्य प्रसून जैसे पत्रकार अरविंद केजरीवाल के प्रति साफ्ट कार्नर रखते हैं तो ये खराब बात नहीं है… हालांकि वीडियो में ऐसा कोई साफ्ट कार्नर नहीं दिख रहा है.. वीडियो में तो इंटरव्यू खत्म होने के बाद एक दूसरे की औपचारिक मुंहदेखी ‘क्रांतिकारी क्रांतिकारी’ टाइप की बातें हो रही हैं… नेता अपनी बात रख रहा है, सफाई दे रहा है और पत्रकार अपने नजरिए के हिसाब से उसे बता रहा है, सलाह दे रहा है… और इसी प्रक्रिया में इंटरव्यू के बाद वाला नितांत निजी किस्म वेज संवाद खत्म हो रहा है… इसमें कुछ भी अनैतिक या नान-वेज नहीं है…

भाजपा और कांग्रेस जैसी करप्ट, सांप्रदायिक, अवसरवादी और एलीटों की पक्षकार पार्टियों से हटकर कोई केजरीवाल जैसे व्यक्ति का सपोर्ट करता है, इनके प्रति साफ्ट कार्नर रखता है तो ये बेहद सहज और मानवीय है.. पत्रकारिता का तकाजा भी यही है कि हम आम जन के प्रति अपनी पक्षधरता रखकर अपनी राजनैतिक सोच-समझ को आगे बढ़ाएं… जब राजनीति झूठ, मक्कारी, फ्राड, हिप्पोक्रेसी से लिथड़ी पड़ी हो तो कुछ एक केजरीवालों को इसमें घुसाना जरूरी है ताकि अंदर की असलियत सामने तो ले आए…

इंडिया टुडे के कानक्लेव में केजरीवाल ने जितनी दबंगई से भाजपा के दामाद और कांग्रेस के दामाद की असलियत बयान कर दोनों पार्टियों के बीच ‘दामाद घोटाले’ पर चुप्पी साधने का खुलासा किया वह दिल छू लेने वाला था… ऐसा साहस मोदी या राहुल सात जनम में भी न दिखा पाएंगे… सच में इन लोगों को राजनीति करना केजरीवाल ही सिखाएगा… और, मजेदार है कि केजरीवाल के हो-हल्ले में बदहवास हो गए भाजपाई इतने अधीर हो चले हैं कि अब साजिश के नाम पर ऐसे टूटपूंजिया वीडियो सामने ले आ रहे हैं जिसमें शुरुआती फुरफुरी तो है लेकिन पटाखा फूटने से पहले ही फुस्स हो जाता है… अब भाजपा को मान लेना चाहिए कि इस केजरीवाल नामक आदमी ने ‘मोदी मिशन 2014’ को वाकई ठिकाने लगा दिया है… अभी चुनाव में वक्त है.. तैयार रहो… आम आदमी पार्टी वाले जवाबी हमले के लिए ‘राकेट लांचर’ ले कर आ रहे हैं… तब न कहना कि हाय, इसने तो ऐन मौके पर इतना बड़ा कबाड़ा कर दिया… 

……..भड़ास4मीडिया.कॉम के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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