भागलपुर जिले में खुला देश का पहला गरुड़ संरक्षण केन्द्र

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shri_vishnu_on_his_mount_garurमिथकों के अनुसार भगवान विष्णु के वाहक गरुड़ की विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाने और उसके पुनर्वास का केंद्र बिहार में खोला गया है जहां इस परिवार के पक्षियों को संरक्षण दिए जाने की व्यवस्था की गई है। संभागीय वन अधिकारी संजय सिन्हा ने कहा कि इसी सप्ताह भागलपुर जिले में अपनी तरह का पहला केंद्र खोला गया है।

करीब आठ वर्ष बाद विलुप्ति के कगार पर पहुंचे इन पक्षियों ने भागलपुर जिले में घोंसला बनाना और प्रजनन शुरू किया है, जिससे 78 की संख्या तक पहुंच चुके पक्षियों की संख्या अब 400 हो गई है।

सिन्हा ने बताया, “गरुड़ के संरक्षण के विकास में यह एक सकारात्मक विकास है। इसके तहत अत्यंत आवश्यक अस्पताल सह बचाव एवं पुनर्वास केंद्र को छोटे स्तर पर शुरू किया गया है।”

वर्तमान में तीन पक्षियों को केंद्र में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। भारतीय पक्षी संरक्षण नेटवर्क के लिए बिहार एवं झारखंड के समन्वयक अरविंद मिश्र ने कहा कि यदि यह सफल होता है तो यह केंद्र दूसरे राज्यों के लिए रोल मॉडल बनेगा।

garur_biharमिश्र ने कहा कि घोंसले से गिरने वाले बच्चों को उचित देखभाल मुहैया कराने और गिर जाने या घायल हो जाने वाले वयस्क पक्षियों को उचित देखभाल मुहैया कराने के लिए केंद्र खोला गया है। गरुड़ की चिकित्सा के लिए पश्चिम बंगाल के वल्चर संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में पशु चिकित्सकों और पारामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है।

उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों में पक्षियों के संरक्षण एवं आश्रय के लिए जागरुकता पैदा की गई है।” घोंसले में कमी और प्रदूषण एवं बाधाओं के अलावा शिकार और अंडा जमा करने के कारण प्रजातियों की संख्या में व्यापक कमी आ गई है।

मिश्र ने भागलपुर जिले के गंगा दियारा इलाके में 2007 में रेशम के पेड़ पर सबसे पहले गरुड़ को निवास और प्रजनन करते पाया था। इससे पहले पक्षी को बिहार में प्रजनन की अवधि में कभी नहीं देखा गया था।

मिश्र ने कहा, “पक्षी विलुप्त होने के कगार पर हैं। पूरी दुनिया में उन्हें बचाने और संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”  (साभारः पर्दाफाश)

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