भस्मासूर बने मांझी, मिली पार्टी से निष्कासन की चेतावनी

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पद से हटाये जाने की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जदयू के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिया है. जदयू ने पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव  के निर्देश पर  सात फरवरी को पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाये जाने पर तीखे तेवर दिखानेवाले मांझी को पार्टी ने प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने की चेतावनी दी है.

nitish_manjhiखुद शरद यादव ने कहा कि मांझी के कहने पर ही विधायक दल की बैठक बुलायी गयी है. उन्होंने यह भी कहा कि हम शुक्रवार की सुबह मांझी से दोबारा बात करेंगे.

इधर, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि  राष्ट्रीय अध्यक्ष को विधायक दल की बैठक बुलाने का संविधानिक अधिकार है. यदि इस बैठक का मांझी या किसी और विधायक ने विरोध किया, तो उन्हें दल की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जा सकता है.

इसके पहले  शाम साढ़े पांच बजे शरद यादव के निर्देश पर मुख्य सचेतक और संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने सात फरवरी को विधायक दल की बैठक बुलायी. सभी विधायक और विधान पार्षदों को शनिवार को दोपहर तीन बजे तक विधानसभा एनेक्सी में आयोजित बैठक में हर हाल में उपस्थित होने को कहा गया है.  मुख्यमंत्री को जब इस बैठक की सूचना मिली, तो उन्होंने तत्काल अपने समर्थक मंत्रियों और अन्य लोगों से विचार-विमर्श किया.

उसके बाद वह मुखर हुए और कहा कि जदयू विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार मुख्यमंत्री होने के नाते सिर्फ मुङो है. उन्होंने सात फरवरी को निर्धारित बैठक को भी अनधिकृत करार दिया. साथ ही अपने इस्तीफे की खबर का भी खंडन किया.  इस बीच मुख्यमंत्री सचिवालय ने मांझी के शुक्रवार के कार्यक्रम जारी कर दिये गये.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के खिलाफ विद्रोही तेवर दिखानेवाले  मांझी शुक्रवार को  तीन मंत्रियों-पथ निर्माण मंत्री ललन सिंह, संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार और वन एवं पर्यावरण मंत्री पीके शाही को मंत्रिपरिषद से बरखास्त करने की सिफारिश राज्यपाल से करेंगे. बरखास्तगी से संबंधित सिफारिशी पत्र को मुख्यमंत्री सचिवालय शुक्रवार की सुबह राजभवन भेज देगा.

lalu manjhi nitishइधर,  शनिवार को विधानसभा एनेक्सी भवन में शाम चार बजे विधायकों की बैठक होगी. पार्टी के मुख्य सचेतक श्रवण कुमार ने  बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर विधायकों को तत्काल पहुंचने को कहा गया है. माना जा रहा है कि विधायकों से मांझी को लेकर उनकी राय जानी जायेगी. साथ ही मांझी के भविष्य को लेकर लग रही अटकलों पर अंतिम फैसला होगा.

शरद यादव ने प्रभात खबर से बातचीत करने के बाद कहा कि मैं तो निष्पक्ष हो कर काम कर रहा था. बुधवार की रात मांझी मिलने आया था, लेकिन उनसे इस बारे में कुछ बात नहीं हुई थी. गुरुवार की दोपहर में मैं एक अणो मार्ग स्थित सीएम हाउस गया था. उनसे इस संबंध में बात की, तो उन्होंने ही कहा कि पहले विधायक दल की बैठक हो जाये, तो बेहतर होगा. आठ फरवरी को दूसरी जगह कार्यक्रम था, इसलिए सात फरवरी को ही बैठक बुलायी गयी.

जदयू विधानमंडल दल की यह बैठक सारी चीजों के समाधान के लिए बुलायी गयी है. जिस प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं, उसे स्थिरता देना जरूरी है. इसमें सभी की एक मत होगी, तो राय-मशविरा कर बात आगे बढ़ायेंगे. जदयू के आगे के रास्ते को सुलभ किया जायेगा. होटल चाणक्या में शरद यादव यादव से मिलने से कई विधायकों को रोक दिया गया. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी, संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार, खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्याम रजक ही यहां उनसे मिल सके.

गुरुवार की सुबह शरद यादव ने 01, अणो मार्ग जाकर मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से मुलाकात की. इसके बाद वह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए. दूसरी ओर विधान परिषद की आचार समिति की बैठक में शामिल होने विधान परिषद पहुंचे नीतीश कुमार ने मांझी के भविष्य पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. जब उनसे संवाददाताओं ने सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से फोन पर बातचीत होने  संबंधी जानकारी चाही, तो उन्होंने कहा कि इन मामलों में मुझे कुछ भी नहीं कहना है.

पटना में कैंप कर रहे शरद यादव दिन भर व्यस्त रहे. बुधवार की रात मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने चाणक्या होटल में उनसे मुलाकात की थी. सुबह में शरद यादव इस मुलाकात के सवाल पर बचते दिखे. कहा कि पार्टी के हर लोग उनसे मिलने आते हैं. एमपी, एमएलए या एमएलसी सभी उनसे मिलने आते हैं. मुख्यमंत्री को बदलने के सवाल को उन्होंने खारिज किया और कहा कि सब अफवाह है. नीतीश व मुलायम के फोन पर बातचीत पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं है. जिसने भी कहा है उसी से पूछिए कि क्या बात हुई है.

jitan ram manjhiपार्टी सूत्रों की मानें, तो बुधवार की रात सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फोन किया था. दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई है. इसमें मुलायम सिंह यादव ने नीतीश कुमार को फिर से कुरसी संभालने का दबाव दिया. मुलायम ने कहा कि भाजपा से मुकाबले के लिए विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ही नेतृत्व करें. इसके बाद से बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गयी.

अध्यक्ष को विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार 

जदयू ने पार्टी अध्यक्ष शरद यादव के निर्देश पर पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाये जाने का विरोध करने पर मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के खिलाफ कड़े कदम उठाने के संकेत दिये हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सांसद केसी त्यागी ने गुरुवार की देर रात कहा कि मांझी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश की अवहेलना की, तो उन्हें दल की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मांझी या कोई भी विधायक सात फरवरी की बैठक में उपस्थित नहीं होता है या विरोध करता है, तो उसे दल में रहने का कोई अधिकार नहीं है.

त्यागी ने कहा कि दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पार्टी की धारा 21 के तहत उप धारा 3/ए में सारे अधिकार हासिल हैं. अपने अधिकारों के तहत वह किसी भी व्यक्ति को दल से बाहर निकाल सकते हैं, किसी को शामिल करा सकते हैं और किसी भी बैठक को बुला सकते हैं. उन्होंने कहा कि सात फरवरी को विधायक दल की बुलायी गयी बैठक पूरी तरह वैध है.  बैठक और इसमें लिये गये निर्णय को उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पास करना होगा.

केसी त्यागी ने यह भी कहा कि जीतन राम मांझी कभी जदयू विधायक दल के नेता थे ही नहीं.  उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया था, तब पार्टी विधायक दल ने उन्हें नये नेता मनोनयन का अधिकार दिया था. इसी के तहत नीतीश कुमार ने उन्हें नेता मनोनीत किया. यहां तक कि अब तक मांझी ने कभी भी विधायक दल का विश्वास भी हासिल नहीं किया.

राष्ट्रीय अध्यक्ष को बैठक बुलाने का अधिकार : श्रवण

मुख्य सचेतक श्रवण कुमार ने कहा कि दल के संविधान के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कभी भी विधायक दल की बैठक बुला सकते हैं. यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष को भी इस बात का अधिकार है. पार्टी नेताओं के मुताबिक, अब तक की परंपरा रही है कि जब विधानमंडल का सत्र होता है, तो उस समय विधायक दल का नेता विधायकों की बैठक बुलाता है.

मुख्यमंत्री आवास पर लगा रहा समर्थकों का मजमा

राजनीतिक उठापटक में सीएम जीतन राम मांझी से मिलने उनके समर्थकों ने शाम से एक अणो मार्ग पहुंचना शुरू कर दिया. नेता के साथ अधिकारियों का भी मिलने का दौर जारी रहा. सीएम से मिलने के लिए पहुंचे पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी ने साफ तौर पर कहा कि मांझी नहीं हटेंगे. मांझी आग हैं. उनको छुनेवाला भस्म हो जायेगा. इससे पहले शिक्षा मंत्री वृषिण पटेल भी सीएम से मिलने पहुंचे. सीएम से मिल कर लौटे विधायक अनिल कुमार ने पत्रकारों से कहा कि विधायक दल की बैठक बुलाने का संवैधानिक अधिकार सीएम को होता है.

अगर सीएम बैठक बुलायेंगे, तो उसमें शामिल होंगे. मांझी के साथ विधायकों का पूरा समर्थन है. मांझी ने नौ माह में काफी काम किया है. वे दलितों व पिछड़ों के नेता हैं. नीतीश ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया था. वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें नेतृत्व करना था. आठ माह पहले मांझी ने ऐसा क्या कर दिया कि उसे बदलने की नौबत आ गयी. सीएम से मंत्री जावेद इकबाल अंसारी, सम्राट चौधरी, शाहिद अली खान, नीतीश मिश्र ने मुलाकात की. वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र, पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने फोन पर सीएम से बात की. (साभारः प्रभात खबर)

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