भगवान बिरसा जैविक उद्दान ओरमांझीः चतुर्थवर्गीय पदों की नियुक्ति में भारी अनियमियता

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Birsa-Park ormanjhiमुकेश भारतीय

रांची। हाल ही में भगवान बिरसा जैविक उद्दान ओरमांझी  में पशुपालक सह स्वीपर के रिक्त चतुर्थवर्गीय पदों की नियुक्ति में भारी अनियमियता बरती गई है। कई अयोग्य लाभान्वित लोगों को भी जिस प्रकार से नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है, वह भी अने सबाल खड़े करते हैं।

मुख्य वन सरंक्षक एवं निदेशक कार्यालय  के विज्ञापन संख्या-01/2013-14 के अनुसार भगवान बिरसा जैविक उद्दान में पदनाम पशुपालक सह स्वीपर के लिए विभागीय स्तर पर कुल 24 लोगों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। जिनमें अनारक्षित-12, अनूसूचित जन जाति-09, अनुसूचित जाति-01 तथा अत्यंत पिछड़ी जाति-02 पद आरक्षित थे।

उपलब्ध सूचना के अनुसार यहां अब तक कुल 16 पदों पर नियुक्तियां की गई है, उनमें अनुसूचित जाति तथा अत्यंत पिछड़ी जाति एक भी योग्य दावेदारों की नियुक्ति नहीं की गई है।

इसके आलावे अधिकांश ऐसे लोगों की नियुक्ति की गई है, जो वरीयता सूची से बाहर हैं। विभागीय चयन समिति ने जिस आधार पर वरीयता को परिभाषित किया है, उसका विज्ञापन में निर्धारित मापदंड से कोई सरोकार नजर नहीं आता है।

विज्ञापन में उल्लेख है कि यह विज्ञापन भगवान बिरसा जैविक उद्दान में वन्यप्राणियों का पालन, रख-रखाव, प्रदर्शन, सुरक्षा, साफ-सफाई आदि से संबंधित कार्य हेतु है। लेकिन नियुक्ति में सिर्फ उन लोगों को प्रथमिकता दी गई है, जो केज में कार्य करते हैं। हालांकि जहां किसी केज में 2-3 लोगों की नियुक्ति की गई है, वहीं किसी केज में अनुभवी योग्य उम्मीदवारों की कोई सुध नहीं ली गई है।

विज्ञापन के अनुसार पद की शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक लेकिन भगवान बिरसा जैविक उद्दान में कम से कम 20 वर्षों से कार्यरत वर्तमान दैनिक श्रमिक उम्मीदवारों के लिए पांचवी कक्षा उतीर्ण बताई गई है। यहां कई ऐसे दैनिक श्रमिक उम्मीदवारों की नियुक्ति कर डाली गई है, जो यह अहर्ता नहीं रखते हैं या फिर उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया है, जो यह योग्यता रखते हैं। यहां झारखंड सरकार की आरक्षण नीति एवं स्थानीय निवासी नीति का भी पालन नहीं किया गया है।

इस जैविक उद्यान में 100 से उपर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत हैं। ये पिछले 25 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन इन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया है। स्थायीकरण की मांग को लेकर इन लोगों ने कई बार आंदोलन भी किया। अंत में विभाग की ओर से इनसे स्थायीकरण के लिए आवेदन मांगा गया। लेकिन आवेदनों की जांच के बाद विभागीय नियुक्ति चयन समिति ने महज 16 कर्मचारियों को ही योग्य करार दिया है। शेष 84 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए।

उल्लेखनीय है कि विभाग ने यहां कुल 45 पदों की स्वीकृति दी थी। जिसके विरुद्ध 21 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति कर ली गई है। शेष 24 पशुपालकों की नियुक्ति की सूची बनाई जा रही है। नियुक्ति कमेटी ने उद्यान के निदेशक को कर्मचारियों की सूची तैयार कर कमेटी में रखने का आदेश दिया था।

इसके बाद उद्यान निदेशक ने सभी कर्मचारियों को अनुभव प्रमाण पत्र देते हुए इनकी सूची कमेटी को भेज दी। लेकिन कमेटी की जांच में महज 16 कर्मचारियों को योग्य बताया गया।

कर्मचारियों का कहना है कि वैसे कर्मचारियों को योग्य माना गया है, जो सीधे वन्य प्राणियों के केज से संबंधित है। जबकि वे लोग 25 साल से समायोजन का इंतजार कर रहे हैं। सूची में जूनियर लोगों को शामिल किया गया है। सीनियरों को यूं ही छोड़ दिया गया है।

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