भगवान बिरसा जैविक उद्दान के निदेशक ने कहा, ऑब्जेक्शन के साथ हुई बहाली

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मुकेश भारतीय

BBB PARK DIRECTOR ASHOK KUMARरांची। इन दिनों भगवान बिरसा जैविक उद्दान,ओरमांझी में स्वीपर सह पशुपालक पद पर हुई नियुक्तियों का मामला काफी गर्म है। अचयनित अभ्यर्थियों का आरोप है कि विभागीय चयन समिति ने बहाली में खूब धांधली बरती है। विज्ञापन के विपरित मापदंड तो अपनाए ही गए हैं, यहां अनुभव और कार्य का पैमाना भी बदल दिया गया है। ऐसे ही उभरे अनगिणत सबालों के बीच प्रस्तुत है भगवान बिरसा जैविक उद्दान के निदेशक आईएफएस अशोक कुमार के साथ   खास बातचीतः

भगवान बिरसा जैविक उद्दान में नियुक्ति का मामला क्या है ?

……सरकार ने स्वीपर-सह-पशुपालक पद के लिए एक संकल्प निकाला था। संकल्प में यह कहा गया था कि इन लोगों को प्रथमिकता दी जाय और मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में एक चयन कमिटि बनाई गई थी। उस कमिटि ने चयन की सारी प्रक्रिया पूरी की। जिसके अंतर्गत लोगों के ऑबजेक्शन लिए गए है। जबकि पहले ऐसा होता नहीं था। ऑब्जेक्शन के बाद उसे निष्पादित किया गया और उसके बाद कमिटि ने कुल 24 पदों के विपरित कुल 17 लोगों को चयन के लिए योग्य पाया गया।

क्या आपको लगता है कि विज्ञापन में जो निर्देश दिये गए हैं और जिस तरह से नियुक्ति की गई है, उसमें काफी एसमानताएं हैं ?

 ……..हालांकि चयन प्रक्रिया के समय मैं नहीं था लेकिन, उसमें 6-7 वरीय पदाधिकारी लोग थे। उसने सारे अहर्ता को देखा और उनके हिसाब से सब सही था।

अहर्ता तय करने में उनका मूल आधार क्या था ?

…….यह सब प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर हुआ था। चयन की प्रक्रिया के तहत क्या-क्या मापदंड हैं, उस पर ध्यान दिया गया था।

प्रायः दैनिक मजदूरों का आरोप है कि उन अहर्ता में हमें नहीं रखा गया,जिसके लिए उपयुक्त थे ?

……इस संदर्भ में उनका ऑब्जेक्शन लेकर ही सारी प्रक्रिया पूरी की गई थी।

क्या मान लिया जाए कि वैसे मजदूरों का यह दावा गलत है कि उनकी अहर्ता सही थी और नियुक्ति नहीं हुई ?

…………..नहीं, देखिए यह अंतिम नहीं है। उसमें भी माननीय उच्च न्ययालय में मामला अभी लंबित है। और वहां से जो निर्णय आएगा, उस आलोक में आगे कार्रवाई की जाएगी। यहां विभागीय चयन समिति के द्वारा जो भी काम किया गया, वह जरुर फाईनल है। यह हाई कोर्ट के निर्णय से जुड़ा नहीं है।

विज्ञापन में जो कोटावार नियुक्ति होनी थी, आखिर वह अधुरी क्यों रह गई ? एससी और ओबीसी कोटा को क्यों छोड़ दिया गया ?

………यहां एससी कोटा का एकमात्र आवेदक मिला था लेकिन वह मानसिक रुप से विक्षिप्त है। वह मेडिकल बोर्ड के समक्ष भी उपस्थित नहीं हुआ। ओबीसी का कोई योग्य आवेदक सामने नहीं आया।

कहीं ऐसा तो नहीं है कि उद्दान प्रबंधन स्तर से चयन हेतु जो डाटा भेजे गए, उसे चयन समिति ने नजरंदाज कर दिया ?

………चूकि उस समय यहां पदास्थापित नहीं था इसलिए उस संदर्भ में कुछ नहीं बता सकता हूं। लेकिन में जो डाटा दिख रहा है वही फाईनल है।

आपकी नजर में स्वीपर सह पशुपालक पद से क्या अभिप्राय है ?

……….पशु की देखभाल एवं केज की सफाई करना।

विज्ञापन के अनुसार तो सुरक्षा, साफ-सफाई, देखभाल आदि तो एक ही श्रेणी में आते हैं ?

………….नहीं, एक ही श्रेणी में नहीं आते हैं। हो सकता है कि विज्ञापन में कुछ मिस प्रिंट हुआ हो। स्वीपर और गार्ड अगल है। स्वीपर का काम है देखभाल के साथ सफाई करना और गार्ड का काम है सुरक्षा करना। अगर इस संदर्भ में किसी आवेदक को कुछ कहना तो वे अपना अभ्यावेदन दें। यहां कुल 24 पदों के विपरित कुल 17  पदों पर नियुक्ति की गई है। शेष बचे पद सरकार को रेफर किया जाएगा।

जिन लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है, उसमें हाई कोर्ट में लंबित मामले से जोड़ कर अस्पष्टता दिखाई गई है। क्या यह नियुक्ति रद्द भी हो सकती है?

……….नहीं, नियुक्ति रद्द नहीं होगी। नियुक्ति पत्र में साफ लिखा है कि मामला प्रभावित हो सकती है। उसमें यह नहीं लिखा गया है कि उनकी नियुक्ति रद्द हो सकती है।

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