बोलिये सूचना भवन के शुक्राचार्य की जय…

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वरिष्ठ लेखक-पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र अपने फेसबुक वाल पर……

झारखण्ड के रांची स्थित सूचना भवन के आइपीआरडी में एक शुक्राचार्य है, हालांकि उसके माता-पिता ने उसका बड़ा ही सुंदर नाम रखा है, पर आप तो जानते ही है कि हमारे देश में एक नाम परिवार रखता है तो दूसरा नाम समाज रखता है। परिवार जो नाम रखता है, उसमें केवल एक ही बात निहित रहता है कि उस बालक के नाम से उसका परिचय हो जाय, जबकि समाज उस बालक के क्रियाकलापों और चरित्र के आधार पर नामकरण कर डालता है।

आइपीआरडी में जो शुक्राचार्य है, उसका शुक्राचार्य नामकरण उनके क्रियाकलापों और चरित्र के आधार पर ही, वहां कार्यरत कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने कर दिया है। शुक्राचार्य भी, इस नाम को सुनकर बहुत ही प्रसन्न होता है।

बेशर्मी, कर्तव्यहीनता, मूर्खता भरे काम, सरकारी काम-काज में कैसे बैकडोर से मनपसंदीदा चीजें प्राप्त होती है?, किसी काम को कैसे लटकाया जाता है? इन सारे कार्यों में उसे महारत हासिल है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास के आस-पास रहनेवाले कनफूंकवों से इसकी खूब पटती है। यह कनफूंकवों को खूब टिप्स देता है, साथ ही आइपीआरडी में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छोटी से लेकर बड़ी गतिविधियों की जानकारी, ये मुख्यमंत्री के आस-पास रहनेवाले कनफूंकवों को दे दिया करता है (इस आधार पर आप फिल्म शोले के हरिराम नाई पात्र से इसकी तुलना कर सकते है)।

यहीं नहीं जब आइपीआरडी में टेंडर खुलता है तो यह अपने लोगों को टेंडर दिलवाने में रात-दिन एक कर देता है और जैसे ही उसके चाहनेवालों को टेंडर प्राप्त होता है, वह मिठाइयां बांटता और खूब अकड़ कर चलता है, साथ ही टेंडर प्राप्त करनेवालों को यह बताना नहीं भूलता कि उसी की कृपा से उसे टेंडर प्राप्त हुआ है, इसलिए टेंडर प्राप्त करनेवाला उसके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहे, यह टेंडरप्राप्तकर्ता को इसका समय-समय पर भान दिलाता रहता है, साथ ही धमकी भी दे डालता है कि, नहीं तो वो मुख्यमंत्री के कनफूंकवों को कह देगा, जिससे उसकी परेशानी बढ़ जायेगी।

टेंडर प्राप्त करनेवाला भी इस डर से शुक्राचार्य को अपनी सेहत के मुताबिक भेंट चढ़ा देता है, जिससे शुक्राचार्य आशीर्वाद के रूप में अभयदान दे देता है।

शुक्राचार्य की एक सबसे बड़ी विशेषता है कि जबसे बायोमिट्रिक एटेंडेंस बनना शुरू हुआ है तो वह आने और जाने के समय अपना अंगूठा बायोमिट्रिक सिस्टम में लगाना नहीं भूलता और उसके बाद बीच में वो कब आफिस से निकला और कब आया, आपको पता ही नहीं चलेगा।

यहीं नहीं मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में अपना चेहरा चमकाना नहीं भूलता, साथ ही अखबारों में उसकी फोटो छपे, ये भी सुनिश्चित कराना नहीं भूलता, पर इधर कुछ दिनों से उसकी फोटो अखबारों में नहीं आ रही, क्योंकि नये निदेशक ने उससे कुछ और बड़े-बड़े काम लेना शुरु कर दिया है, क्योंकि निदेशक को लगता है कि आइपीआरडी में उसके जैसा विद्वान और कनफूंकवों का मददगार कोई है ही नहीं।

इसकी विद्वता का ही हाल था कि 23 जनवरी को जब मुख्यमंत्री रघुवर दास बजट पेश कर रहे थे तो बजट पेश करने के बाद इसने बजट की प्रति लेने के लिए पत्रकारों के बीच ऐसी व्यवस्था कर दी, जिसकी आलोचना सभी ने की। गड़बड़ियों के लिए दूसरों को दोष देना और हर अच्छे कार्यों के लिए स्वयं को प्रतिष्ठित करना इसकी यादों में शुमार है।

चूंकि अभी सभी का ध्यान ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की ओर है तो नये निदेशक ने इसको अपना सबसे प्रिय व्यक्ति मानकर, कार्य करना शुरु कर दिया। हद तो यह भी है कि आजकल ये सूचना भवन में आये नये-नये पदाधिकारियों और समय-समय पर होनेवाले डीपीआरओ की मीटिंग में निदेशक के इशारे पर प्रवचन देना भी शुरु कर दिया है, जिस प्रवचन को उसके ही अधिकारी हवा में उड़ा देते है।

इसकी हरकतों से सभी परेशान है, पर कनफूंकवों के आशीर्वाद तथा नये निदेशक से उसकी मित्रता ने उसका भाव बढ़ा दिया है, जबकि दो महीने पूर्व तक इसकी हालत पस्त रहती थी, क्योंकि इसके गलत कार्यों के कारण तथा दीर्घसूत्रता के कारण शुक्राचार्य को हमेशा डांट पड़ती थी, पर इसके ढीठई ऐसी थी कि इसकी मोटी चमड़ी पर उसका असर ही नहीं पड़ता था, फिर भी आजकल ये स्वयं को निदेशक से कम नहीं समझता, कभी-कभी तो वह यह भी कह देता है कि वह निदेशक से कम है क्या?, क्योंकि जितना वेतन निदेशक को मिलता है, उससे कम तो उसे भी नहीं मिलता…

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