बेउर जेल में बंद कुख्यात रीतलाल के घर पहुंचे लालू

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राजनामा.कॉम। एक अदना सा क्रिमिनल राजद के सुप्रीमो लालू यादव की खाट खड़ी कर देता है और भयभीत लालू यादव उसके घर पहुँच जाते है। उसके पिता के समक्ष गिड़गिड़ाने लगते है और वहां कहते है कि आप मेरे गार्जियन है। फिर आने की बात करते हैं। जो निर्णय होगा, उसे मानने की बात करते है। यह अफसोस और दुर्भाग्य है लालू जैसे नेताओं की मजबूरियों पर।  क्या अपने जमीर को बेचकर राजनीति करना जरुरी है ?

laluखबर है कि 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में दानापुर से राजद का टिकट न मिलने से क्षुब्ध कुख्यात अपराधी रीतलाल यादव को मनाने के लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद शनिवार को देर शाम रीतलाल के खगौल स्थित कोथवां गांव में जाकर उसके परिजनों और समर्थकों से मुलाकात की।

फिलवक्त रीतलाल बेऊर जेल में बंद है। शनिवार को उसकी कोर्ट में पेशी भी थी, जहां राजद के दो बड़े नेता कोर्ट में ही उससे मुलाकात करने गए थे। पर रीतलाल द्वारा राजद को किसी तरह से मदद करने से इनकार करने के बाद राजद खेमें में बेचैनी बढ़ गई और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को खुद उस रीतलाल के घर जाना पड़ा।

विदित हो कि लालू ने रीतलाल को वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में टिकट देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि ‘जिन गलतियों के कारण वह और उनकी सरकार बदनाम हुई वह काम वो दुबारा नहीं करेंगे।’

लेकिन, आसन्न लोकसभा चुनाव में लालू के हनुमान रामकृपाल के बागी होने और लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती के खिलाफ पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव के चुनाव लड़ने को लेकर राजद सुप्रीमों के चेहरे पर आयी चिंता की सिलवटें साफ देखी जा सकती है।

ritlalजहां तक कुख्यात अपराधी रीतलाल का सवाल है तो उसकी पहचान अपने इलाके में राबिन हुड वाली है। जेल में ही रहकर दानापुर से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले रीतलाल ने तब 40 हजार से उपर मत लाकर सबको चौका दिया था।

 रीतलाल नीतीश सरकार में एक मात्र ऐसा अपराधी था, जिसके पीछे पूरे बिहार की पुलिस और एसटीएफ लगी थी, पर वह गिरफ्तार नहीं हो सका और उसने विधानसभा चुनाव के पूर्व खुद सरेंडर किया।

लालू प्रसाद के रीतलाल के घर जाने को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जहां कुछ लोग इसे लालू प्रसाद के गिर रहे दिन और अपशकुन की बात कह रहें है तो कुछ लोग इसे राजनीति में सब जायज ठहरा रहे हैं।

 इधर राजद सुप्रीमों ने कोथवां में मीडिया से बात करते हुए कहा कि रीतलाल के पिता और कोथवां पंचायत के मुखिया रामाशीष राय से उनकी पुरानी पहचान है जिस नाते वह उनसे मिलने आए थे।

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