बीबीसी की ‘इंडियाज़ डॉटर’ की आलोचना में महिलाएं आगे

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भारत में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज़ डॉटर’ की आलोचना खूब हो रही है।  इसके आलोचकों में मीडिया और राजनेताओं से भी आगे महिला आंदोलनकारी हैं। हालांकि इसके समर्थन में भी लोग सामने आ रहे हैं।

nirbhaya_rapeवरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह समेत कई महिलाओं ने पत्र लिखकर निर्भया के केस की अदालती कार्रवाई ख़त्म होने तक इस फ़िल्म को ना दिखाए जाने की मांग की है।

इंदिरा जयसिंह मुताबिक़ दोषी या उसके व़कील के बयान आगे की कार्रवाई पर असर डाल सकते हैं। बल्कि उन्हें डर है कि ऐसे बयान घृणा पैदा करेंगे और दोषी के लिए फांसी की मांग को बल मिलेगा और बलात्कार के लिए फांसी की सज़ा के वो ख़िलाफ़ हैं।

ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेन्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कविता कृष्णनन ने एक लेख में कहा है कि बलात्कार करने वाले पुरुषों की मानसिकता दुनियाभर में ऐसी ही है।

वो कहती हैं कि इसे ऐसी फ़िल्म में दोहराने से भारतीय मर्दों और ग़रीब तबके के लड़कों के बारे में ग़लत आम धारणाएं बनने का डर है।

नाराज़गी फ़िल्म के नाम से भी है – निर्भया को ‘इंडियाज़ डॉटर’ कहने से। उनके मुताबिक ये फिर उस सोच को बढ़ावा देता है जो लड़कियों को ‘बेटी’ या ‘बहू’ के दायरे में रखकर उनकी सुरक्षा के लिए उन्हीं की आज़ादी कम करने की पैरवी करती है। (बीबीसी)

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