बीपीओ क्षेत्र में रोजगार के अवसर

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बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग एक नई व्यापार संकल्पना है…बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग एक नई व्यापार संकल्पना है, जिसका अर्थ है किसी 
संगठन के प्रमुख व्यापारिक/उत्पादक कार्यों से इतर, परंतु महत्वपूर्ण अनुषंगी कार्यों को किसी बाहरी विक्रेता को हस्तांतरित करना, जो सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित सेवा वितरण प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा हो। इसमें वितरण चूंकि आईटी आधारित होता है, इसलिए बीपीओ को सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं (आईटीईएस-यानी आईटी इनेबल्ड सर्विसेज) भी कहा जाता है। हालांकि आईटी के क्षेत्र में सेवाओं को बाहरी एजेंसियों से कराने की प्रक्रिया कई वर्षों से अपनायी जा रही है, परंतु इन्टरनेट और संचार प्रौद्योगिकी के उदय के साथ पिछली सदी के अंतिम दशक के उत्तरार्द्ध में इनके प्रचलन में तेजी आई। बड़ी संख्या में विभिन्न उद्योगों से संबद्ध बड़ी कम्पनियों ने बीपीओ के फायदों पर विचार किया और अपने अनुषंगी व्यापारिक/उत्पादक कार्यों का कुछ भाग बाहरी एजेंसियों को सौंपना शुरू कर दिया।

प्रमुख व्यापारिक या उत्पादक गतिविधि से इतर क्रिया-कलाप बाहरी एजेंसियों को सौंपने से संगठनों को अपनी क्षमता प्रमुख उत्पादक/कार्य-व्यापार पर केंद्रित करने में मदद मिली, जिससे उनकी कार्य-क्षमता में सुधार आया और लागत में कमी आई। इस नई व्यापारिक संकल्पना के प्रचलन ने दुनियाभर में अनेक विशेषज्ञतापूर्ण बीपीओ सेवा प्रदाताओं को जन्म दिया। स्थितियां अनुकूल होने के कारण भारत अंतर्राष्ट्रीय बीपीओ गतिविधियों के लिए प्रमुख केंद्र बन गया है। इन अनुकूल स्थितियों में बड़ी संख्या में अंग्रेजी बोलने वाली आबादी, व्यापक कम्प्यूटर साक्षरता, व्यक्तिगत खर्च में कमी, अनुकूल समय-क्षेत्र और उच्च गुणवत्ता युक्त कार्य शामिल हैं। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में बीपीओ संबंधी गतिविधियों में और बढ़ोत्तरी होगी। नतीजतन रोजगार के अवसरों में भी महत्वपूर्ण वृद्धि होने की संभावना है।

भारत में बीपीओ क्षेत्र १९९० के दशक के प्रारंभ में जनरल इलेक्ट्रिक नामक अमरीकी कम्पनी ने यह महसूस किया कि बैक-ऑफिस यानी प्रमुख व्यापारिक क्रिया-कलाप से इतर कुछ गतिविधियों और ग्राहक सेवा प्रक्रियाओं को भारत में स्थानांतरित करके महत्वपूर्ण लाभ उठाए जा सकते हैं। यह फैसला लागत में कमी लाने और गुणवत्ता एवं उत्पादकता के ऊंचे मानदंड हासिल करने की दृष्टि से बड़ी कामयाबी के रूप में सामने आया। इस प्रयास की सफलता ने शेष अमरीकी कॉर्पोरेट जगत को प्रेरित किया कि वह बाहरी संसाधनों आउटसोर्सिंग) के लक्ष्य के रूप में भारत की संभावनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करे। इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए एक अन्य बड़ी कम्पनी अमेरिकन एक्सपे्रस ने भी इस क्षेत्र में कदम रखा।

उसने अपने कार्य-व्यापार प्रक्रिया कारोबार (ट्रांजेक्शन प्रोसेसिंग वर्क) का कुछ अंश और कॉल सेंटर भारत में स्थानांतरित किए। लागत, गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार को देखते हुए अनेक कम्पनियां इस दिशा में प्रेरित हुईं और उन्होंने विदेश में अपना कारोबार आरंभ किया तथा तेजी से उसका विस्तार किया। चीन और कनाडा जैसे देशों के साथ भारत धीरे-धीरे आईटी आउटसोर्सिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसकी वजह यह है कि भारत में अत्यन्त कुशल एवं प्रशिक्षित कार्मिकों का समूह उपलब्ध है और यहां भली-भांति परिभाषित व्यापार प्रक्रियाओं को तेजी से अपनाया जा रहा है।
अनुकूल माहौल बनाने में सरकार के सक्रिय सहयोग और ढांचागत सुधारों की बीपीओ उद्योग के विकास में उत्प्रेरक भूमिका है। बीपीओ के लिए भारत को प्रमुख लक्ष्य बनने के पीछे एक प्रमुख कारण यह भी है कि हमारे यहां संचार का मजबूत ढांचा कायम हो चुका है। हाल ही में समुद्र में बिछायी गई भारत की प्रथम प्राइवेट केबल के चालू हो जाने से अंतर्राष्ट्रीय बैंडविड्थ स्थिति में जबरदस्त सुधार आया है। प्राइवेट ऑपरेटरों ने भी अगले कुछ वर्षों में लाइनें बिछाने और समुचित बैंडविड्थ सुविधाओं की स्थापना के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। दूर संचार उद्योग के निजीकरण से नई कम्पनियां अस्तित्व में आई हैं और दूर संचार की दरों में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। इस उद्योग में निरंतर प्रतिस्पर्धा के चलते दूर संचार मूल्यों में और कमी आने की संभावना है।
bpo1कॉल सेंटर भारत को आउटसोर्सिंग का लक्ष्य बनाने वाले प्रारंभिक संगठनों के अध्ययन से पता चलता है कि इस क्षेत्र में प्रमुख संगठनों का वर्चस्व रहा है जिनमें बीमा, बैंकिंग, फार्मास्युटिकल्स, दूरसंचार, ऑटोमोटिव और एयरलाइन्स शामिल हैं। उपरोक्त सूची में से बीमा और बैंकिंग ऐसे क्षेत्र हैं जो भारी मात्रा में बचत राशि हासिल करने में सिर्फ इसलिए कामयाब रहे हैं कि वे अपनी प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा बाहरी एजेंसियों को सौंप सकते हैं। वे कॉल सेंटरों के जरिए दावे और ऋण प्रोसेस करने तथा ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने जैसे कार्य संचालित कर सकते हैं। अनुसंधान से पता चला है कि अमरीका/ब्रिटेन में कॉल सेंटरों के संचालन में आने वाली करीब ७० प्रतिशत लागत का सीधा संबंध प्रशिक्षण, लाभ और अन्य श्रम प्रोत्साहनों सहित कार्मिकों पर आने वाली लागत के साथ है। जबकि भारत में कार्मिकों से संबंधित लागत मात्र ३५ प्रतिशत के आस-पास बैठती है। अन्तर्राष्ट्रीय कॉल्स परिचालित करने वाले ध्वनि आधारित कॉल सेंटर में शामिल कुछ महत्वपूर्ण घटक नीचे दिए गए हैं :- 
१. आईपीएलसी (अन्तर्राष्ट्रीय प्राइवेट लीज्ड सर्किट) लाइन।
२. डाइलर।
३. सीटीआई (कम्प्यूटर टेलीफोनी इंटीग्रेशन)-इस प्रणाली के अंतर्गत कोई भी कॉल स्थानांतंरित होने पर एजेंट के मॉनीटर स्क्रीन पर आवश्यक पोप-अप्स प्रकट हो जाता है। पोप-अप्स स्क्रीन कॉल करने वाले के बारे में जानकारी, अपेक्षित सूचना और कॉल करने वाले व्यक्ति द्वारा वांछित उत्पाद का ब्योरा प्रदान करती है। 
४. एसीडी (ऑटोमेटिक कॉल डिस्ट्रिब्यूशन)-कॉल्स उपलब्ध एजेंटों को स्वतः स्थानांतरित हो जाती है। यह वितरण कौशल आधारित हो सकता है या फिर कॉल्स का सामान्य स्थानांतरण हो जाता है।
५. आईवीआर (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पोन्स)-इससे किसी संपर्क केंद्र यानी कॉल सेंटर पर फोन करने वाले ग्राहकों को अपेक्षित जानकारी हासिल करने के लिए किसी एजेंट से बात किए बिना ही ध्वनि कमान का इस्तेमाल करके वांछित जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है। इससे सेवा प्रदाता द्वारा ग्राहक को जानकारी प्रदान करने में खर्च होने वाले समय की बचत होती है। 
६. वॉयस लॉगर – इसके जरिए सभी एजेंटों की बातचीत को लॉग किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल एजेंटों द्वारा प्रदान की जा रही सेवा की गुणवत्ता की जांच के लिए किया जा सकता है।
७. एमयूएक्स-इसका इस्तेमाल आईपीएलसी को दोनों ओर से जोड़ने के लिए किया जाता है। आजकल ज्यादातर कॉल सेंटर आईपी नेटवर्क अपना रहे हैं, इसलिए एमयूएक्स का इस्तेमाल कम हो गया है और आईपीएलसी को दोनों सिरों पर जोड़ने के लिए राउटर्स की आवश्यकता पड़ती है।
८. कॉल सेंटर प्रबंधन सॉफ्टवेयर – कॉल्स और रिपोर्टिंग की व्यवस्था करने वाला सॉफ्टवेयर।
९. एलएएन केबलिंग – यह आंकड़ों को प्राप्त करने, लॉगिंग करने और उन्हें स्थानांतरित करने का आधार है। कॉल सेंटर के जरिए संचालित की जाने वाली गतिविधियों में ग्राहक सेवा, टेलिमार्केंटिंग, ऋण और वसूली संबंधी कार्य शामिल है। आईबीआर प्रणाली बड़ी संख्या में और बार-बार रोजमर्रा के कामकाज से संबंधित असंख्य कॉल प्राप्त करती है। जटिल स्थितियों से संबद्ध ऐसी कॉल्स मानव ऑपरेटरों को स्थानांतरित कर दी जाती है, जिनका उत्तर देने के लिए मानव बुद्धि की आवश्यकता हो। कॉल सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली बीपीओ कम्पनियों में ऑपरेटर ग्राहकों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं। डॉटा कन्वर्सन डाटा कन्वर्सन यानी आंकडों का रूपांतरण; एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आंकड़े एक संरचनागत स्वरूप से उस प्रणाली के अनुरूप रूपांतरित हो जाते हैं, जिसमें उन्हें परिवर्तित किया गया हो। डॉटा कन्वर्सन उस समय अनिवार्य हो जाता है, जब कोई कम्पनी व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण अपने आंकड़ों का रूपांतरण इस कार्य का उदाहरण है। आंकड़ों को बनाए रखने के लिए किसी नए सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग को अपनाने का फैसला करती है। परम्परागत प्रणालियों से आधुनिक प्रौद्योगिकियों पर आधारित डॉटा बेस में आंकड़ों को श्रव्य या दृश्य रूप में एनकोडिंग और प्रोसेसिंग करते हुए समरूप जानकारी में परिवर्तित करना भी डाटा कन्वर्सन का ही एक रूप है। इससे उन तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलती है। मेडिकल ट्रांस्क्रिप्शन, हस्तलिखित अनुप्रयोगों से आंकड़ों की एनकोडिंग भी ऐसी ही सेवाओं के उदाहरण हैं। डॉटा मैपिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें स्रोत डॉटा एलिमेंट को लक्षित डॉटा एलिमेंट प्रदान किया जाता है। डाटा मैपिंग के अंतर्गत विरासत प्रणाली में प्रत्येक फील्ड के लिए लक्षित फील्ड की पहचान और प्रलेखन की प्रक्रिया शामिल होती है। डॉटा मैपिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे अंजाम देने के लिए एक ऐसी टीम अनिवार्य है जिसमें व्यापार विश्लेषक, टैक्निकल टीम और डाटा मैपिंग टीम शामिल हो। बीपीओ – अवसर नैस्कोम के अनुसार निकट भविष्य में बीपीओ उद्योग के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यापार संभावनाएं इस प्रकार हैं :
१. ग्राहकों की सेवाएं : इन सेवाओं के अंतर्गत तकनीकी सहायता और हेल्प डेस्क विशेषताएं शामिल हैं, जिनमें कॉल सेंटरों में कार्यरत ऑपरेटर ग्राहकों और उनके कॉर्पोरेट ग्राहकों के कार्मिकों की सहायता करते हैं। इसके लिए प्रत्यक्ष ग्राहक परस्पर संपर्क की आवश्यकता पड़ती है।
२. विपणन सेवाएं : इनके अंतर्गत विपणन और गतिविधियां शामिल हैं। इस टेली मार्केटिंग क्रियाकलाप का एक महत्वपूर्ण पहलू ऑटोमेटिड वॉयस ब्राडकास्ट अभियान के लिए विषय वस्तु विकास और परामर्श प्रदान करना है। बिक्री क्रियाकलापों के अंतर्गत उन ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करना है, जो फोन पर ऑर्डर देते हैं। 
३. मानव संसाधन सेवाएं : बाहरी एजेंसियों को सौंपे जाने वाले कार्यों में वेतन रोल, लाभ, शिक्षा/प्रशिक्षण, भर्ती, कार्मिक प्रशासन, आकस्मिक श्रमिक प्रबंधन और श्रमिक विश्लेषण शामिल है।
४. वित्त एवं लेखा सेवाएं : हालांकि इन सेवाओं की शुरुआत ट्रांजेक्शनल प्रोसेसिंग गतिविधियों से होती है, फिर भी बाजार से उम्मीद की जाती है कि वह व्यापारिक निर्णय लेने में ग्राहकों की सहायता के लिए वित्तीय विश्लेषण समाधान सेवाएं प्रदान करें।
५. इंजीनियरी सेवाएं : इनके अंतर्गत किसी उत्पाद या सेवा के निर्माण के लिए तकनीकी परामर्श प्रदान किया जाता है। इन कार्यों में अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद डिजाइन, परीक्षण, परियोजना प्रबंधन, प्रलेखन और इंजीनियरी विश्लेषण शामिल हैं। 
६. लॉजिस्टिक्स या संभार तंत्र : इसके अंतर्गत स्टॉक लागत में कमी लाने और वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन संबंधी मुद्दे शामिल हैं। इन सेवाओं में इन्वोइस एकत्र करना, भुगतान प्रक्रिया, ढुलाई मार्ग अनुकूलन, वेयर हाउसिंग और स्टॉक नियंत्रण सेवाएं शामिल हैं।
७. स्वास्थ्य देखभाल : इस उद्योग की शुरुआत मेडिकल ट्रांस्क्रिप्शन सेवाओं से हुई है, और इनकी परिणति रोग प्रबंधन एवं मेडिकल इमेजिंग जैसी सेवाओं में हो रही है। अपेक्षित व्यावसायिक कौशल और व्यक्तित्व के गुण : प्रमुख बीपीओ क्षेत्रों में आवश्यक कुछ व्यावसायिक और व्यक्तिगत गुण नीचे दिए गए हैं। जैसा कि उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि बीपीओ व्यापार सिर्फ कॉल सेंटर संबंधी क्रियाकलाप पर आधारित नहीं है। इसके अंतर्गत विविध प्रकार का कौशल रखने वाले व्यावसायियों के लिए अवसर उपलबध हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि इस उद्योग में रोजगार का आधार सुदृढ़ व्यावसायिक कौशल के साथ सॉफ्रटवेयर/हार्डवेयर की जानकारी है। इन व्यावसायिक कौशलों अंतर्गत वित्त एवं लेखा से लेकर इंजीनियरी प्रबंधन ओर परिचालन अनुसंधान तथा उससे भी आगे व्यापार प्रशासन से लेकर फार्मेसी तक के कौशल शामिल हैं। किसी व्यवसायी द्वारा अर्जित मूल्यसंवर्धन उन सुदृढ़ प्रोत्साहनों में से एक है, जो किसी भी उद्योग में श्रेष्ठ एवं योग्यतम लोगों को आकर्षित करता है। बीपीओ उद्योग में कार्य का स्वरूप इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह एक स्वागत योग्य कदम है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि प्रतिभाशाली और परिश्रमी स्थानीय व्यावसायियों के लिए रोजगार के वैश्विक अवसर उपलब्ध होंगे।

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