बिहार स्वास्थ्य विभाग का यह विज्ञापन नहीं, आम जन के प्रति है बड़ा अपराध

Share Button
Read Time:6 Minute, 16 Second

”  एक  मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देती है …एक खटमल पूरी रात को अपाहिज बना देता है …क्योंकि आत्मा और अंदर का इंसान मर चुका है… जीने के लिए घिनौने समझौते कर चुका है …साला एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है…”

 -: राज़नामा.कॉम /मुकेश भारतीय :-

लेकिन..यदि आज हम बिहार के समाचार पत्रों में प्रकाशित एक विज्ञापन की बात करें तो साफ स्पष्ट होता है कि नाना पाटेकर अभिनित फिल्म यशवंत की  मशहूर उक्त गीत-डॉयलोग के विपरित एक मच्छर ने  पूरे स्वास्थ्य विभाग-तंत्र को हिजड़ा बना दिया है।

स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार के निदेशक प्रमुख के स्तर से समाचार पत्रों में एक विज्ञापन पीआर नं. 1101 (हेल्थ) 2018-19 प्रकाशित करवाई गई है।

इस विज्ञापन में मूलतः उल्लेख है कि…

श्री सृस्टि राज सिन्हा, एसडीओ सहरसा की मुत्यू डेंगु से नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का श्री सिन्हा की असमायिक मृत्यु पर खेद प्रकट करते हुए खंडन करती है।

विज्ञापन के अनुसार संबंधित निजी अस्पताल, जहां श्री सिन्हा दिनांक 20.10.2018 को पहली बार भर्ती हुए, उसी दिन 7.25 अपराह्न में डिस्चार्ज कर दिये गए। पुनः दिनांक 29.10.2018 को उसी अस्पताल में भर्ती हुए।

उन कागजात के अध्ययन करने पश्चात ज्ञात हुआ कि दिनांक 31.10.2018 को श्री सिन्हा की मृत्यु हुई। चिकित्सीय रिपोर्ट में श्री सिन्हा डेंगू ऋणात्मक पाए गए। मृत्यु के कारणों के संबंध में संदर्भित निजी अस्पताल द्वारा अभी मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया गया है।

विज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कतिपय समाचार पत्रों द्वारा इस संबंध में प्रकाशित समाचार भ्रामक है तथा इस प्रकार का समाचार आम जनों में डेंगू के संबंध में भ्रांति फैलाने का कार्य कर रहा है।

दिवंगत एसडीएम सृस्टि राज सिन्हा की फाइल फोटो……

दरअसल स्वास्थ्य विभाग का यह विज्ञापन ही बड़ा भ्रामक है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख को यह भी पता नहीं है कि सृस्टि राज सिन्हा को हिलसा (नालंदा) के एसडीओ से स्थानान्तरित कर सहरसा का वरीय उप समाहर्ता बनाया गया था, न कि सहरसा का एसडीओ।

सबसे बड़ी बात कि परिजनों के अनुसार उन्हें प्रारंभिक तौर पर ही पारस अस्पताल द्वारा डेंगु होने की बात कही गई। उसी का ईलाज हुआ। अगर डेंगू से सृस्टि राज सिन्हा की मौत नहीं हुई तो फिर फीवर के साथ अचानक मौत कैसे हो गई। क्या बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के कोई अस्पताल किसी का शव परिजनों को सौंप सकती है?

जिस मानसिकता से स्वास्थ्य विभाग मीडिया की खबरों का खंडन कर रही है, वह काफी शर्मनाक है। विज्ञापन में एक प्रशासनिक अफसर की मौत के कारणों का भी उल्लेख किया जाना चाहिए। लेकिन उसे यह कह कर छुपा लिया गया है कि अस्पताल से अभी मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हुआ है।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पारस अस्पताल सरीखे बड़े बड़े निजी अस्पताल सरकारी सांठगांठ से अधिक पनपते हैं। यह अलग बात है। लेकिन डेंगू को लेकर इस तरह के विज्ञापन आम जन में भ्रम पैदा करने वाले हैं।

दिवंगत एसडीएम सृस्टि राज सिन्हा को मुखाग्नि देते उनके 6 वर्षीय पुत्र…

यह विभागीय निकम्मापन और सरकार की लापरवाही ही है कि एक तरफ राज्य में डेंगू जैसे जानलेवा रोग के वायरस तेजी से फैल रहे हैं, वहीं उसे लेकर भ्रामक संदेश जिम्मेवार लोग ही दे रहे हैं। क्या विभाग या सरकार यह मानती है कि बिहार में डेंगु का प्रकोप नहीं है और उससे कोई मौत नहीं हुई है?

यह सब जानते हैं कि सूबे में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत क्या है। कहीं लगता ही नहीं है कि विभागीय मंत्री पद भी कोई है। ऐसे भी सरकार खुद की कथित सुशासन की छवि से इस कदर ग्रस्त हो चुकी है कि वे आयना देखने को तैयार ही नहीं होती।

अगर किसी भ्रामक समाचार का खंडन ही करना है या फिर अपनी लापरवाहियों को ढंकना ही है तो विभागीय निदेशक प्रमुख या मंत्री या फिर अस्पताल को मीडिया के सामने खुलकर प्रेस कांफ्रेस करनी चाहिये थी, चोरी छुपे विज्ञापन के जरिये अपनी बात कहने की क्या जरुरत पड़ गई? छुपाने से काली दाल सफेद नहीं हो जाती।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Share Button

Relate Newss:

पत्रकार की पिटाई करने वाले पूर्व विधायक के खिलाफ जांच करायेगी भाजपा
मोदी और शरीफ के बीच काठमांडू में हुई थी गुप्त बैठक
राजगीर मलमास मेला सैरात भूमि को अतिक्रमणमुक्ति के योद्धा पुरुषोतम को जान-माल का खतरा
सेंसरशिप सिर्फ बिहार में ही नहीं हैं काटजू साहब
मुखबिर और ठग है दैनिक भास्कर का पत्रकार सुबोध मिश्रा !
सांसद अजय कुमार ने डाली मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के गले में फांस !
लालू ने पोस्ट की रैली पूर्व की यूं रंगारंग वीडियो, कहा- इनको शर्म नहीं आती
कमजोर की बीबी सबकी भौजाई, MDM मामले में जिला प्रशासन ने की उल्टी कार्रवाई
स्वरूपानंद ने साईं भक्तों के खिलाफ नागा साधुओं को उतारा !
साज़िश के तहत निराधार खबर चला रही है मीडियाः तेजस्वी यादव
पूँजीवादी कारपोरेट मीडिया का राजनीतिक अर्थशास्त्र
सुदर्शन न्यूज का गोरखधंधाः बाबा रामदेव को भी बनाया शिकार
अब नोटों के लिए जिस्म बेचने को विवश हैं ये विदेशी एक्ट्रेस
नवयुवक पत्रकारों के लिये खतरनाक हैं ऐसे प्रयास
जो हुकुम सरकारी, वही पके तरकारी !
प्रिंट मीडिया के लिये यह है आत्म-चिंतन का समय
पश्चिम बंगाल में सेना तैनात, भड़कीं ममता, कहा- आपातकाल
कलाम को बेहद पसंद थी झारखंड की भोली भाली जनता
दैनिक ‘प्रभात खबर’ में हैं इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई संदिग्ध !
अनुचित है रांची कॉलेज का नाम बदलना
'ड्रग सिंडिकेट' का बड़ा किंगपिन है बिहार का यह 'बालू किंग'
भारत में रोज़ बिकता है 61 लाख किलो गौ मांस !
जीत से उत्साहित ममता का नारा-'भाग भाजपा भाग'
अंततः कैंसर की आगोश में समा गये बिहार के वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार
अंततः वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष को भी 'आप' न आई रास, दिया यूं इस्तीफा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...