बिहार राज्य को विशेष दर्जा से कोई फर्क नहीं पड़ेगाः लालू

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laluआरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का दावा है कि उन्होंने और राबड़ी देवी ने ही सबसे पहले राज्य को विशेष दर्जा दिलाने की मांग की थी, लेकिन तब नीतीश कुमार ने इसमें अड़ंगा लगाया। उनका कहना है कि जिन राज्यों को मिला है, वहां कितना फर्क आ गया ? क्या वहां लोग स्वर्ग में चले गए ? कोई फर्क नहीं आएगा। यह राजनैतिक मांग है।

क्या आप विशेष दर्जा के पक्ष में हैं ? 
यह सवाल सबसे पहले मैंने और राबड़ी देवी ने उठाया। जब नीतीश रेल मंत्री थे, तो बिहार के कई प्रोजेक्ट का शिलान्यास कराने तत्कालीन पीएम वाजपेयी को पटना गांधी मैदान ले गए थे. तब 3 मई, 2002 को मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आंचल फैलाकर स्पेशल कैटेगरी और पैकेज मांगा था।  वाजपेयी ने आश्वासन भी दिया।  लेकिन नीतीश के कहने पर वाजपेयी पलट गए। अब अल्पसंख्यकों को भ्रमित करने और अपनी चांदी काटने के लिए वे ऐसा कर रहे हैं। 

नीतीश कांग्रेस संग जाएंगे ?  
कांग्रेस में जाएं या जहन्नुम में।  वे हवाबाजी कर रहे हैं।  वे जहां हैं, वहीं रहेंगे। जब बिहार को स्पेशल पैकेज के लिए एनडीए के समय कमेटी बनी तो सभी दलों ने मिलकर नीतीश को अध्यक्ष बनवाया, लेकिन वे गूंगे बन गए।  

विशेष दर्जा से कितना फर्क आएगा ? 
जिन राज्यों को मिला है, वहां कितना फर्क आ गया ?  क्या वहां लोग स्वर्ग में चले गए ?  कोई फर्क नहीं आएगा।  यह राजनैतिक मांग है।  

अपने 15  साल के शासन और अब के शासन में क्या फर्क देखते हैं ? 
हमारे राज में सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द था, ये तो सांप्रदायिक लोग के साथ बैठ गए।  नीतीश तो पांच साल तक हमारे ही साथ थे।  अनाज के मामले में बिहार सरप्लस स्टेट रहा।  हमने कभी भीख नहीं मांगी। 

विशेष दर्जा पर क्या नरेंद्र मोदी को नीतीश स्वीकार कर सकते हैं  ?
ये कभी बीजेपी-आरएसएस नहीं छोड़ेंगे।  बीजेपी में जो मोदी विरोधी हैं, उसके हाथ का ये खिलौना हैं।  उनका ग्राफ नीचे चला गया है और अब इस कोशिश में हैं कि कांग्रेस कहीं मुझसे (लालू से) गठजोड़ न कर ले।   (साभारः आज तक)

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