बिहार में भाजपा की लंका जलाने में मोदी-शाह के विभिषण प्रशांत की रही अहम भूमिका

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Prashant-Nitish-Modiवर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और पिछले साल के आम चुनाव के दौरान ब्रांड नरेंद मोदी को स्थापित करने में जिस व्यक्ति ने अहम भूमिका निभायी, उसने ही इस बार बिहार में नीतीश कुमार की अभियान रणनीति तैयार करने में बडा योगदान दिया और कुमार ने विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी पर भारी विजय प्राफ्त की।

बिहार के प्रशांत किशोर ने वर्ष 2011 में अफीका में संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य विशेषज्ञ की नौकरी छोड़ दी थी और वह युवा पेशेवरों का एक समूह बनाने भारत लौट आए थे।

Prashant Kishor_narendra modiउन्होंने 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और पिछले साल के आम चुनाव में मोदी को सुशासन के चेहरे के रूप में पेश करने की रणनीति बनायी और भारी सफलता भी मिली।

किशोर ने एक बार फिर अपनी कामयाबी का झंडा गाड़ा और नीतीश कुमार के बिहार में भाजपा नीत राजग को करारी शिकस्त देकर लगातार तीसरा बार जीत दर्ज करने में उनकी अहम भूमिका रही।

जदयू नेता कुमार के प्रतिद्वंद्वी नरेंद मोदी ने यहां अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था और कम से कम 31 चुनावी रैलियां संबोधित की जबकि सामान्यत: प्रधानमंत्री राज्य के चुनाव इतनी रैलियां नहीं करते हैं।

किशोर के बारे में एक कहावत है कि वह जिस किसी चीज को छू लेते हैं, वह सोना बन जाती है।

मोदी की लोकप्रिय `चाय पर चर्चा’ पहल की अवधारणा रचने और क्रियान्वित करने वाले किशोर ने विकल्प `पर्चा पे चर्चा’ तैयार किया जिसके तहत नीतीश के चुनाव प्रबंधकों ने पिछले दशक में राज्य सरकार के प्रदर्शन पर लोगों से उनकी राय मांगी।

किशोर की टोली को यह अहसास होने के बाद कि जदयू भाजपा से संसाधनों के मामले में नहीं टिक सकती, उसने `हर घर दस्तक’ रणनीति भी बनायी जिससे जदयू को जनसमूह से निजी संपर्क कायम करने में मदद मिली।

prashant_nitishजब शीर्ष भाजपा नेता हेलीकॉफ्टर से पूरे बिहार की खाक छान रहे थे तब नीतीश कुमार और उनके पार्टी कार्यकर्ता सीधे संपर्क के तहत मतदाताओं के घर घर जाकर उनसे वोट मांग रहे थे।

किशोर की टीम के सदस्यों ने कहा कि जब टीम पटना पहुंची तब सामान्यत: बिल्कुल कम बोलने वाले कुमार बमुश्किल चर्चा का विषय थे।

पर्दे के पीछे से अहर्निश काम करते हुए टीम के सदस्यों ने एक ऐसी रणनीति बनायी कि कुमार ने मोदी की हर तीखी आलोचना का सामना हाजिर जवाबी से किया।

किशोर मोदी के 2014 के चुनाव अभियान पर काम करने को अपनी टीम बनाने के लिये `सिटीजंस फोर एकाउंटेबल गर्वनेंस’ :कैग: के तहत भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से स्नातकों को ले कर आये थे। चुनाव के कुछ महीने बाद उन्होंने कैग को भंग कर दिया था।

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