बिहार में केंद्रीय विश्वविद्यालय की नियुक्तियों पर उठते सवाल

Share Button

बिहार माध्यमिक विद्यालयो में फैले भ्रष्टाचार की कहानी से जहां हर रोज मीडिया के पन्ने भरे रहते है वही केंद्र सरकार द्वारा बिहार में स्थापित दो नए केंद्रीय विश्वविद्यालय महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी और केंद्रीय विश्वविद्यालय साउथ बिहार गया में की जा रही विभागीय प्रोफेसरों की नियुक्तियो में भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद की गंध आनी शुरू हो गयी है। जो तथ्य सामने आ रहे है उससे पता चलता है की इन दोनों विश्वविद्यालय के उपकुलपति अपने पद और गरिमा के खिलाफ जाकर शिक्षा जगत के साथ ना सिर्फ खिलवाड़ कर रहे है वल्कि धृतराष्ट्र की तरह सिर्फ अपने बेटो के लिए हर फैसला लेने में कोई कोताही नहीं बरत रहे।

 अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ लेखक पत्रकार  'अखिलेश अखिल '
अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ लेखक पत्रकार ‘अखिलेश अखिल ‘

मामला मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग से जुड़ा है। अभी हाल में ही यहाँ के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में तीन सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति की गयी है। तपन अग्निहोत्री की नियुक्ति सहायक प्रोफेसर के पद पर हुयी है। इसी विभाग में दूसरी नियुक्ति सौरभ सिंह राठौर की नियुक्ति भी सहायक प्रोफेसर के पद पर हुयी। तीसरी नियुक्ति शशिकांत रे की हुयी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताविक तपन अग्निहोत्री , केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के उपकुलपति प्रोफ० कुलदीप अग्निहोत्री के पुत्र है। जबकि सौरभ सिंह राठौर केंद्रीय विश्वविद्यालय साउथ बिहार गया के उपकुलपति प्रोफ० एच सी एस राठौर के पुत्र है। यानी दो नियुक्ति केंद्रीय विश्वविद्यालय के उपकुलपति के बेटो की।

बायोटेक्नोलॉजी विभाग में जो तीसरी नियुक्ति शशिकांत रे की हुयी है वे बायोटेक्नोलॉजी के छात्र ना होकर बायोकेमिस्ट्री के छात्र है। जबकि बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े ५ से ज्यादा छात्र लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू के लिए बुलाये गए थे। लेकिन चयनित हुए शशिकांत रे।

इंटरव्यू में गए छात्रों के मुताविक महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के वर्तमान उपकुलपति प्रोफ ० अरविन्द अग्रवाल है। अरविन्द अग्रवाल यहाँ आने से पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में कार्यरत थे। तब वहा प्रो. एच सी एस राठौर उनके बॉस थे।वर्तमान में प्रो. राठौर, केंद्रीय विश्वविद्यालय साउथ बिहार गया के उपकुलपति है।

जब महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के उपकुलपति पद के लिए सिलेक्शन कमिटी बनायी गयी तो उस कमिटी के हेड के तौर पर प्रोफ० राठौर की नियुक्ति की गयी थी। कह सकते है कि चूकि प्रो. अग्रवाल की नियुक्ति में प्रो. राठौर ने मदद की। इसी अहसान को लौटाने के लिए प्रो. अग्रवाल ने अपने विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की नियुक्तियों में सबसे ज्यादा तरजीह प्रो. राठौर के बेटे सौरभ राठौर को दी और उसकी नियुक्ति की। हो सकता है की यह नियुक्ति एक इत्तेफाक भी हो या फिर सौरभ राठौर सभी उम्मीदवारों में सबसे अब्बल रहे हो।

कह सकते है कि बिहार के दोनों प्रमुख विश्वविद्यालय में कुल तीन पदों की नियुक्ति में दो पद पर दो उपकुलपति के बेटे बिराजमान हो गए है। और ये दोनों नियुक्तियां केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश से जुडी जान पहचान और आपसे समझदारी की नजर आ रही है। तुम हमें दो ,हम तुम्हे देंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ ये तीनो नियुक्तियां इतनी जल्दबाजी में की गयी कि इंटरव्यू देने वाले किसी भी छात्र को इसकी जानकारी भी नहीं मिली। कहा जा रहा है की इन नियुक्तियों से जुड़े रिजल्ट भी सामने नहीं लाये गए और जड़बाजी में सभी तीनो चयनित उम्मीदवारों को उनके पद पर स्थापित कर दिया गया है।

कुछ छात्रों का यह भी आरोप है की इन नियुक्तियों से जुडी लिखित परीक्षा में भी गड़बड़ी की गयी थी। परीक्षा ९ बजे से शुरू होनी थी जबकि १० बजे से परीक्षा शुरू की गयी। माना जा रहा है की देर से परीक्षा लेने के पीछे कोई गड़बड़ी की गयी हो। सूत्रों का कहना है की इस तरह के खेल कई और विभागों में हुयी नियुक्तियों में भी होने की संभावना है। चुकी इस बार जिस तरीके से परीक्षा और इंटरव्यू लिए गए है इससे पहले कभी नहीं हुआ था।

उम्मीद की जा रही है की केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस मसले की जांच करेगा। कही ऐसा ना हो की केंद्र सरकार के ये विश्वविद्यालय भी राजनीति और मूर्खो का अखाड़ा न बन जाए। देखा गया है की देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालय इसी तरह के रोग शिकार होकर कराह रहे है।

Share Button

Relate Newss:

ईटीवी(न्यूज़18) पत्रकार मनोज के बचाव में यूं उतरे करीबी लोग
पत्रकारों के हित झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट ने की आज शानदार पहल
बरखा दत्‍त ने अरनब गोस्‍वामी से पूछा- मोदी से डरते हो ?
मोदी को क्लीन चिट पर हाई कोर्ट पहुंचीं जकिया जाफरी
आजसू नेत्री हेमलता की मुश्किलें बढ़ी, पटना डीएसपी ने सही ठहराया आरोप
SBI बैंक में देखिये भ्रष्टाचार, मिड डे मिल का 100 करोड़ बिल्डर के एकाउंट में डाला
कंप्यूटर क्रांति वनाम कैशलेस इकोनॉमी की बेहतरी
पीएलआईफ नक्सलियों के "बिहार बंद" के पर्चे से सनसनी
पत्रकार संतोष ने लिखा- साथियों, आज वीरेंद्र की तो कल तेरी बारी है
मन की बात के लिए भारत सबसे मुश्किल देश : करन जौहर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...