बिहार में अराजकता फैला रहे हैं लालू-नीतीश के मांझी !

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jitan राजनामा.कॉम। नक्सली लेवी लेता है तो गलत नहीं करता। यह कहना है बिहार को खैरात में मिले मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का।

मांझी का आगे कहना है कि लेवी के लिये किसी भी ठेकेदार की जेसीबी जल रही है तो उसे अच्छे से जलने दो। क्योंकि चोरी के पैसे में आधा-आधा हिस्सा होता है। ठेकेदार अधिकारी से मिल कर 15 हजार की योजना के लिये तीस हजार का प्रक्कलन तैयार करवाते हैं और सिर्फ पांच हजार का काम करवाते हैं। बाकी बचे पैसे को दोनों मिल कर बांट लेते हैं।

वे आगे कहते हैं कि अगर ऐसे में नक्सली चोरी के पैसे में आधा मांगते हैंतो क्या गलत करते हैं। मुख्यमंत्री का मनना है कि नक्सली हमारे ही घर के बच्चे हैं, उन्हें समाज में न्याया नहीं मिला तो नक्सली बन गये।

पहले नीतीश, फिर लालू की कृपा से बिहार के मुखिया बन इतरा रहे जीतन राम मांझी ने उपरोक्त बातें किसी से व्यक्तिगत भेंट में नहीं कही है। बल्कि उन्होनें जहानाबाद के मदनपुर प्रखंड जैसे अतिसंवेदनशील उग्रवादी क्षेत्र की एक आम जनसभा में कही है।

PTI5_20_2014_000252Bदरअसल, जीतन राम मांझी के ऐसे बयान अराजकता मात्र फैलाने से अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर कोई ठेकेदार-अधिकारी ऐसा करता आया है या कर रहा है तो  वे सीएम की कुर्सी पर बैठ कर घास काटने के लिये नहीं हैं। उन्हें खुद बतानी चाहिये कि अब तक उन्होंने व्यवस्था के कितने लोगों को पकड़ कटघरे में खड़ा किया है। जिस समाज के लोग न्याया न मिलने पर नक्सली घर बना रहे हैं, उनके लिये कितने सामाजिक आसियाने उन्होने तैयार किये हैं। 

क्योंकि, जीतन राम मांझी का बतौर सीएम ऐसा कोई पहला बयान नहीं है। इसके पहले भी उन्होंने बिहार और समाज के लिये घातक अनेक विवादित बयान दिये हैं। उस पर सदैव उनकी थेथरई रही है कि उनके ऐसे किसी बात पर बबाल मचे तो भले मचे, उनके पेट में जो बातें रहेगी, उल्लटियां करते रहेगें।

वेशक जीतन राम अब न तो किसी सुदूर गांव के जीतना हैं और न ही  आरी-अलंगों के बिल से चुहा मार खाने या महुआ-मीठ्ठा दारु पीकर सो जाने वाले। वे उस गौरवशाली बिहार के वर्तमान सीएम हैं, जिसे स्व. श्रीबाबू से लेकर नीतिश जी जैसे नेताओं तक ने अपनी क्षमताओं के अनुरुप जरुर संवारा है।

यह दीगर बात है कि श्री मांझी जिस दलित समाज के जिस मुशहर जाति से आते हैं, उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति आज भी अन्य वर्गों से खराब है। उनके साथ अन्य कई पिछड़ी व दलित जातियों के लोगों का विकास भी उतना नहीं हो पाया है, जितना कि इतर लोगों की है। लेकिन बिहार में कम से कम रामबिलास पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं की हालत वैसी नहीं मानी जा सकती। उनके रहन-सहन में दलितपन नहीं रह गये हैं। उनके बच्चे अब फाइव स्टार होटलों में धूम मचाते हैं। उनके करीबी रिश्त्दारों और चमचे-बेलचे के पांव अब स्कार्पियों-बोलेरो से जमीन पर नहीं उतरते।

हो सकता है कि जीतन राम मांझी फिलहाल विपक्षी दलों खास कर भाजपा की ओर से मिल रही हवा से कोई भावी गलतफहमी पाले हों, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिये कि भाजपा उन्हें नीतिश की खड़ाऊं और रिमोटी कह कर प्रताड़ित कर चुकी है। बाद में उनके शासन को जंगल राज-2 की उपाधि देने लगे। और अब भाजपा के नीचे से उपर तक के नेता उन्हें सर्वश्रेष्ठ सीएम का खिताब दे रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री रामबिलास पासवान और रामकृपाल यादव भाजपा के दूत हनुमान हो सकते हैं लेकिन गठबंधन और पार्टी में दोनों की हैसियत किसी से छिपी नहीं हैं।  …….मुकेश भारतीय

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