बिहार आईएस एसोसिएशन के आंदोलन से नीतिश के गुड गवर्नेंस पर उठे सबाल

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पटना (संवाददाता)। बीएसएससी पेपर लीक मामले में अध्यक्ष आईएएस सुधीर कुमार की गिरफ्तारी  को लेकर बिहार आईएसएस एसोसिएशन के  आंदोलन ने सीएम के गुड गवर्नेंस पर कई सबाल खड़े कर दिये हैं। आईएस संघ ने बिहार में पुलिस के कथित मनमाने कार्रवाई में केंद्र सरकार से दखल देने की मांग की है। 

बिहार में कार्यरत आईएस ऑफिसर के समर्थन में उतरी आईएस केंद्रीय संघ ने राज्य सरकार और साथ ही साथ केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि पुलिस मशीनरी द्वारा किसी भी निर्दोष सिविल सर्वेंट के साथ मनमानी या दुर्भावनापूर्ण व्यवहार नहीं किया जाए।

आईएस संघ के बिहार खेमा द्वारा कड़े शब्दों में लिखे गए स्टेटमेंट के बाद अब आईएस सेंट्रल एसोसिएशन ने भी बिहार में हुए बीएसएससी पेपर लीक मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग का समर्थन किया है।

सेंट्रल आईएस एसोसिएशन के सचिव संजय रेड्डी का कहना है कि बिहार में पुलिसकर्मियों के द्वारा मनमाना व्यवहार किया जा रहा है और यहां कानून के नियमों का पालन करने की जरूरत है।

उन्होंने आईएस सुधीर कुमार और जितेंद्र गुप्ता की संलिप्तता की गहन जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की।

आईएस बिहार खेमा के ज्ञापन पत्र में बैठक के बाद पारित प्रस्ताव में आईएस सुधीर कुमार को रिहा करने की मांग की गई है। इस ज्ञापन की एक प्रतिलिपि बिहार के राज्यपाल और  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी सौंपी गई है।  जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि आईएस अफसर अब मुख्यमंत्री तक के कोई भी मौखिक आदेश नहीं मानेंगे।

बिहार आईएस खेमा ने यह तय किया है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तब तक वे सभी काला पट्टा बांधे रहेंगे।

इस संदर्भ में  अविभाजित बिहार-झारखंड पूर्व मुख्य सचिव  वी एस दूबे ने भी माना कि सिविल सर्वेंट को हरासमेंट से बचाने के लिए एक संस्थागत तंत्र की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कोई भी सिविल सर्वेंट कोई भी निर्णय कैसे ले पाएगा, जब उन्हें मामूली से आरोप पर बिना किसी ठोस सबूत के गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में पहले ही कह चुके हैं कि अधिकारियों के ज्ञापन की कानूनी जांच पड़ताल के बाद वे नौकरशाहों पर ऐतिहासिक निर्णय लेगें।

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